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पिता की मौत और 27 लाख का कर्ज, ₹500 की पेंशन से गुजारा कर राजस्थान की बेटी पहली बार में NEET पास कर बनी डॉक्टर

प्रेरणा ने 1033वीं रैंक के साथ नीट क्वालीफाई किया जिसने उन्हें भारत के सर्वश्रेष्ठ  सरकारी चिकित्सा संस्थानों में से एक में दाखिला दिलाया. जानें उनकी सक्सेस स्टोरी

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पिता की मौत और 27 लाख का कर्ज, ₹500 की पेंशन से गुजारा कर राजस्थान की बेटी पहली बार में NEET पास कर बनी डॉक्टर

Prerna Singh NEET Topper

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देश में सबसे कठिन कॉलेज प्रवेश परीक्षाओं में से एक NEET (नेशनल एलिजिबिलटी कम एंट्रेंस एग्जाम) भी है. भारत में मेडिकल की पढ़ाई के इच्छुक स्टूडेंट्स के लिए इस एग्जाम को क्रैक करना बेहद जरूरी है. हालांकि इसे पास करना बच्चों का खेल नहीं है. लेकिन कुछ ऐसे भी बच्चे हैं जो अपनी कड़ी मेहनत और लगन से परीक्षा पास करने में सफल होते हैं और सभी के लिए मिसाल कायम करते हैं. मेडिकल की पढ़ाई करने की इच्छा रखने वालों में प्रेरणा सिंह एक ऐसा ही नाम है जिन्होंने NEET-UG 2023 परीक्षा में 720 में से 686 अंक हासिल किए हैं. प्रेरणा ने विपरीत परिस्थितियों से कभी हार नहीं मानी और अपनी दृढ़ इच्छाशक्ति के दम पर खास मुकाम हासिल किया.

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कैंसर की वजह से छूटा पिता का साथ
राजस्थान के कोटा की रहने वाली प्रेरणा सिंह ने इस उपलब्धि को हासिल करने के लिए कई मुश्किलों का सामना किया. उनके पिता बृजराज सिंह एक ऑटोरिक्शा चालक थे. 2018 में कैंसर की वजह से उनकी मृत्यु हो गई जिससे उनके परिवार को आर्थिक संकट और भावनात्मक टूटन से जूझना पड़ा. परिवार की जिम्मेदारी का बोझ अब प्रेरणा और उसकी मां के कंधों पर था लेकिन उनकी मुश्किलें तब और बढ़ गईं जब उन्हें पता चला कि उनके सिर पर 27 लाख रुपए का कर्ज है. इसके अलावा प्रेरणा को 12वीं की परीक्षा के बाद NEET की कोचिंग का खर्च भी उठाना था. उस दौरान प्रेरणा और उनके भाई-बहनों के गुजारे का सहारा उनकी मां को मिलने वाली 500 रुपये की मासिक पेंशन थी.

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सिर्फ 1 रोटी खाकर किया गुजारा
पैसे बचाने के लिए उन्हें कभी-कभी दिन में एक बार खाना खाना पड़ता था. पूरा दिन सिर्फ एक रोटी और चटनी खाकर गुजारा करना पड़ रहा था. लेकिन ये परिस्थितियां भी प्रेरणा के हौसले को डिगा नहीं सकी. उन्होंने खुद को 12 घंटे पढ़ाई के लिए समर्पित किया. उनके कुछ रिश्तेदारों ने भी मदद के लिए हाथ बढ़ाया. प्रेरणा की कड़ी मेहनत ने आखिरकार रंग दिखाया और उन्होंने मेडिकल एंट्रेंस एग्जाम में टॉप के नंबर हासिल किए जिसने उनके भविष्य का मार्ग प्रशस्त किया. 

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1033वीं रैंक के साथ नीट क्वॉलिफाई
प्रेरणा सिंह के पिता को इससे बड़ी श्रद्धांजलि नहीं हो सकती थी जिन्होंने अपनी बेटी के लिए बड़े सपने देखे थे.  प्रेरणा याद करती हैं, 'हम चार भाई-बहन हैं. मेरे पिता हमेशा कहा करते थे कि मेरी गुड़िया एक दिन मेरा नाम रोशन करेगी.' प्रेरणा ने 1033वीं रैंक के साथ नीट क्वालीफाई किया जिसने उन्हें भारत के सर्वश्रेष्ठ  सरकारी चिकित्सा संस्थानों में से एक में  दाखिला दिलाया.  उनके परिवार को उन पर बहुत गर्व है  और उनकी उपलब्धि ने उनके लिए बेहतर भविष्य का द्वार खोल दिया.

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