एजुकेशन
Jaya Pandey | May 20, 2026, 07:09 PM IST
1.दुनिया की वो ट्रेन जो बिना पहिए के चलती है

दुनिया में कई ऐसी ट्रेनें हैं जो अपनी अनोखी तकनीक और तेज रफ्तार के लिए मशहूर हैं. लेकिन मैग्लेव ने टेक्निक के मामले में सबको पीछे छोड़ दिया है. इसकी सबसे बड़ी खासियत ये है कि दुनिया की बाकी ट्रेनों की तरह इसमें पहिए नहीं होते, फिर भी यह दुनिया की सबसे तेज ट्रेनों में से एक है. मैग्लेव नाम मैग्नेटिक लेविटेशन से बना है. इसकी टेक्निक इतनी एडवांस है कि ये पटरी को बिना छुए उसके ऊपर तैरती हुई दिखाई देती है. इसी वजह से इसमें घर्षण बेहद कम होता है और यह बहुत तेज रफ्तार से दौड़ती है.
(Image Credit: Wikimedia Commons)
2.किस टेक्निक से चलती है मैग्लेव ट्रेन?

मैग्लेव ट्रेन को चलाने के लिए शक्तिशाली इलेक्ट्रोमैग्नेट का इस्तेमाल किया जाता है. ये चुंबक ट्रेन को ट्रैक से कुछ सेंटीमीटर ऊपर उठा देते हैं. इससे ट्रेन और पटरी के बीच कोई सीधा संपर्क नहीं रहता. यह ट्रेन लगभग 8 से 10 सेंटीमीटर तक ट्रैक के ऊपर तैरती है. पहिए नहीं होने की वजह से यह ट्रेन ट्रैक से घर्षण नहीं करता और इसी वजह से दूसरे ट्रेनों की तुलना में यह ज्यादा शांत, स्मूद और तेज चलता है.
(Image Credit: Wikimedia Commons)
3.कैसे पटरी के ऊपर दौड़ती है ये ट्रेन?

मैग्लेव सिस्टम दो टेक्निक पर काम करता है. पहली है इलेक्ट्रोमैग्नेटिक सस्पेंशन (EMS) जिसमें मैग्नेटिक अट्रेक्शन के जरिए ट्रेन को ऊपर उठाया जाता है. दूसरी तकनीक इलेक्ट्रोडायनामिक सस्पेंशन (EDS) है, जिसमें मैग्नेटिक रिपल्शन का इस्तेमाल होता है. ट्रेन को आगे बढ़ाने के लिए ट्रैक में लगी खास कॉइल्स बिजली से एक्टिव होती हैं और एक चुंबकीय क्षेत्र बनाती हैं. यह ट्रेन को आगे की ओर धकेलता या खींचता है. इस पूरे सिस्टम में पारंपरिक इंजन की जरूरत नहीं पड़ती.
(Image Credit: Wikimedia Commons)
4.मैग्लेव ट्रेनों की सबसे बड़ी पहचान

मैग्लेव ट्रेनों की सबसे बड़ी पहचान उनकी रफ्तार है. जापान की L0 सीरीज मैग्लेव ट्रेन ने साल 2015 में 603 किलोमीटर प्रति घंटे की स्पीड के साथ वर्ल्ड रिकॉर्ड बनाया था. वहीं, चीन की शंघाई मैग्लेव ट्रेन दुनिया की पहली कॉमर्शियल हाई-स्पीड मैग्लेव सर्विस है. यह शंघाई पुडोंग इंटरनेशनल एयरपोर्ट और शहर के बीच चलती है और लगभग 30 किलोमीटर की दूरी कुछ ही मिनटों में तय कर लेती है. इसकी अधिकतम ऑपरेटिंग स्पीड करीब 431 किलोमीटर प्रति घंटा रही है.
(Image Credit: Wikimedia Commons)
5.किन देशों में चल रहीं ये मैग्लेव ट्रेनें

फिलहाल चीन, जापान और दक्षिण कोरिया ऐसे देश हैं जहां कॉमर्शियल मैग्लेव ट्रेन सर्विस का लुत्फ पैसेंजर्स उठा पा रहे हैं. जापान में चुओ शिंकानसेन नाम की मैग्लेव लाइन पर काम जारी है, जो टोक्यो और नागोया को जोड़ेगी और भविष्य में इसे ओसाका तक बढ़ाने की योजना है. भले ही इस तकनीक की ट्रेन का स्पीड के मामले में कोई तोड़ नहीं है लेकिन इसकी लागत भी काफी ज्यादा है. इन ट्रेनों को सामान्य ट्रैक पर नहीं चलाया जा सकता और इसके दौड़ने के लिए खास ट्रैक और अलग इंफ्रास्ट्रक्चर बनाना पड़ता है. इसके अलावा बहुत ज्यादा स्पीड की वजह ऊर्जा खपत भी बढ़ जाती है.
(Image Credit: Wikimedia Commons)
6.मैग्लेव टेक्निक का इतिहास

मैग्लेव टेक्निक का इतिहास भी काफी पुराना है. 20वीं सदी की शुरुआत से ही वैज्ञानिक चुंबकीय ट्रेन टेक्निक पर एक्सपेरिमेंट कर रहे थे. 1960 और 1970 के दशक में ब्रिटिश इंजीनियर एरिक लैथवेट ने लीनियर मोटर तकनीक को विकसित करने में अहम भूमिका निभाई. दुनिया की पहली कॉमर्शियव मैग्लेव सर्विस 1984 में ब्रिटेन के बर्मिंघम में शुरू हुई थी. यह एयरपोर्ट और रेलवे स्टेशन के बीच चलती थी. हालांकि तकनीकी समस्याओं के कारण इसे 1995 में बंद कर दिया गया. इसके बावजूद मैग्लेव तकनीक लगातार विकसित होती रही और आज इसे भविष्य की सबसे तेज और आधुनिक रेल तकनीकों में गिना जाता है.
(Image Credit: Wikimedia Commons)
अपनी राय और अपने इलाके की खबर देने के लिए जुड़ें हमारे गूगल, फेसबुक, x, इंस्टाग्राम, यूट्यूब और वॉट्सऐप कम्युनिटी से.