एजुकेशन
Jaya Pandey | Jun 10, 2026, 01:27 PM IST
1.कौन-सी नदी भूमध्य रेखा को दो बार काटती है?

नदियां न सिर्फ पृथ्वी पर वन्यजीवों को जीवन देती हैं बल्कि ये करोड़ों लोगों के लिए पानी, भोजन और आजीविका का साधन भी हैं. दुनिया की कई नदियां अपनी भौगोलिक विशेषताओं की वजह से अलग पहचान रखती हैं. क्या आप जानते हैं कि दुनिया में एक ऐसी नदी मौजूद है जो भूमध्य रेखा को एक बार नहीं बल्कि दो बार काटती है.
(Image Credit: Wikimedia Commons)
2.मध्य अफ्रीका में बहती है यह अनोखी नदी

भूमध्य रेखा को दो बार काटने वाली नदी मध्य अफ्रीका में बहने वाली कांगो है. यह नदी अपनी गहराई, विशाल जल प्रवाह और दुनिया के दूसरे सबसे बड़े वर्षावन कांगो रेनफॉरेस्ट को भी पोषित करने के लिए दुनियाभर में मशहूर है. यह नदी पृथ्वी के उत्तरी और दक्षिणी दोनों गोलार्धों से गुजरती है. ऐसे में यह जलवायु, पारिस्थितिकी और मानव जीवन पर गहराई से असर डालती है.
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3.अटलांटिक महासागर में मिल जाती है कांगो नदी

कांगो की सबसे लंबी सहायक नदी चंबेशी है, जो जाम्बिया के ऊंचे इलाके से निकलती है और आगे बढ़कर कांगो रिवर सिस्टम का हिस्सा बनती है. यह नदी पहले उत्तर दिशा में बहती है और फिर भूमध्य रेखा को पार करके उत्तरी गोलार्ध में एंट्री करती है. इसके बाद यह मध्य अफ्रीका के घने वर्षावनों से होकर गुजरती है और फिर दक्षिण की ओर मुड़कर दोबारा भूमध्य रेखा को पार करती हुई दक्षिणी गोलार्ध में एंट्री कर जाती है. आखिर में कांगो नदी अटलांटिक महासागर में जाकर मिल जाती है.
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4.भूमध्य रेखा क्या है?

भूमध्य रेखा धरती की सतह की एक काल्पनिक रेखा है जो पृथ्वी को उत्तरी गोलार्ध और दक्षिणी गोलार्ध में बांटती है. इसे विषुवत रेखा या इक्वेटर भी कहा जाता है. इसे इसे 0° अक्षांश भी माना जाता है. भूमध्य रेखा की कुल लंबाई 40,075 किलोमीटर है. इस पर सूरज की किरणें सालभर सीधी पड़ती हैं और यहां 24 घंटे में से 12 घंटे दिन और 12 घंटे रात होती है.
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5.किन देशों में फैला है कांगो रेनफॉरेस्ट?

कांगो नदी का बेसिन धरती का दूसरा सबसे बड़ा ट्रॉपिकल रेनफॉरेस्ट रीजन, कांगो रेनफॉरेस्ट है. यह सिर्फ अमेजन रेनफॉरेस्ट से छोटा है. कांगो रेनफॉरेस्ट मध्य अफ्रीका के कई देशों में फैला हुआ है, जिनमें कांगो लोकतांत्रिक गणराज्य, कांगो गणराज्य, कैमरून, मध्य अफ्रीकी गणराज्य और गैबॉन जैसे देश आते हैं. कांगो नदी भूमध्य रेखा के दोनों ओर फैला हुआ है इसलिए इसके किसी न किसी हिस्से में पूरे साल बारिश होती रहती है और यह नदी सालभर पानी से लबालब भरी रहती है.
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6.कांगो बेसिन है दुनिया का सबसे अहम कार्बन सिंक

कांगो बेसिन दुनिया का महत्वपूर्ण कार्बन सिंक है क्योंकि इसके जंगल बड़ी मात्रा में कार्बन डाइऑक्साइड सोखते हैं और दुनिया की जलवायु संतुलित रखने में मददगार होते हैं. इस जंगल में कुछ ऐसे जानवर और पेड़-पौधे मिलते हैं, जो दुनिया में और कहीं नहीं पाए जाते. गोरिल्ला, बोनोबो, वन हाथी और ओकापी जैसे दुर्लभ जीव सिर्फ कांगो रेनफॉरेस्ट में ही पाए जाते हैं.
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7.दुनिया की सबसे गहरी नदी भी है कांगो

कांगो नदी की एक और खासियत इसकी गहराई है. यूनाइटेड स्टेट जियोलॉजिकल सर्वे (USGS) के मुताबिक यह दुनिया की सबसे गहरी नदी है. कांगो नदी की गहराई कुछ जगहों पर 220 मीटर यानी लगभग 720 फीट से भी अधिक मापी गई है. इसके अलावा जल प्रवाह की मात्रा के आधार पर कांगो अमेजन नदी के बाद दुनिया की दूसरी सबसे बड़ी नदी है. हर सेकंड इसमें से लाखों घन फीट पानी अटलांटिक महासागर की ओर बहता है.
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8.कांगो नदी दो देशों के बीच बनाती है सरहद

कांगो नदी ने कई हजार साल से मानव सभ्यताओं और बस्तियों को आकार दिया है. इस नदी के बारे में एक और खास बात यह है कि इस नदी के दोनों तरह दो देशों की राजधानियां हैं. कांगो नदी के एक तट पर डेमोक्रेटिक रिपब्लिक ऑफ कांगो की राजधानी किंशासा और इसके दूसरे तट पर रिपब्लिक ऑफ कांगो की राजधानी ब्राजाविल मौजूद है. कांगो नदी इन दोनों देशों के बीच राजनीतिक सीमा की तरह काम करती है.
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