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रेलवे स्टेशनों पर नाम के साथ क्यों लिखी होती है समुद्र तल से ऊंचाई? अंग्रेजों के जमाने से जुड़ा है खास कनेक्शन

क्या आपने यह बात नोटिस की है कि रेलवे स्टेशनों पर उनके नाम के साथ समुद्र तल से ऊंचाई भी लिखी होती है. इसका कनेक्शन अंग्रेजों के जमाने से है...

Jaya Pandey | May 11, 2026, 03:19 PM IST

1.रेलवे स्टेशन पर क्यों लिखी होती है समुद्र तल से ऊंचाई?

रेलवे स्टेशन पर क्यों लिखी होती है समुद्र तल से ऊंचाई?
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आपने अपने जीवन में कभी न कभी ट्रेन से जरूर सफर किया होगा. लेकिन क्या आपने यह बात नोटिस की है कि रेलवे स्टेशनों पर उनके नाम के साथ समुद्र तल से ऊंचाई भी लिखी होती है. कभी आपने सोचा है कि आखिर ऐसा लिखे होने के पीछे की वजह क्या होती है? आज हम आपको इसके बारे में विस्तार से बताएंगे. 
(Image Credit: Wikimedia Commons)

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2.Mean Sea Level का क्या मतलब होता है?

Mean Sea Level का क्या मतलब होता है?
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Mean Sea Level (MSL) समुद्र की सतह के औसत स्तर को कहा जाता है. इसे ऊंचाई मापने का एक मानक आधार माना जाता है. भारत समेत दुनिया के कई देशों में पहाड़ों, शहरों, सड़कों और रेलवे स्टेशनों की ऊंचाई इसी मानक के आधार पर मापी जाती है. उदाहरण के लिए, अगर किसी स्टेशन के बोर्ड पर लिखा हो कि वह समुद्र तल से 348 मीटर ऊपर है, तो इसका मतलब यह है कि वह स्टेशन समुद्र की औसत सतह से 348 मीटर की ऊंचाई पर स्थित है. हालांकि, रेलवे बोर्डों पर अक्सर ऊंचाई मीटर में लिखी जाती है और कई बार Above Mean Sea Level का उल्लेख भी देखने को मिलता है.
(Image Credit: Wikimedia Commons)

3.रेलवे के लिए क्यों जरूरी है MSL?

रेलवे के लिए क्यों जरूरी है MSL?
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यह जानकारी रेलवे के लिए इसलिए अहम होती है क्योंकि ट्रेनों का संचालन पूरी तरह समतल जमीन पर नहीं होता. रेल मार्गों में कहीं चढ़ाई होती है तो कहीं ढलान. ऊपर की ओर जाने वाली ट्रेन को ज्यादा खींचने की शक्ति (ट्रैक्शन) की जरूरत पड़ती है, जबकि ढलान पर उतरने वाली ट्रेनों में ब्रेकिंग सिस्टम का इस्तेमाल अधिक सावधानी से किया जाता है.
(Image Credit: Wikimedia Commons) 

4.रेलवे इंजीनियर के लिए क्यों जरूरी है MSL?

रेलवे इंजीनियर के लिए क्यों जरूरी है MSL?
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स्टेशन और रेल मार्ग की सटीक ऊंचाई की जानकारी से रेलवे इंजीनियर यह समझ पाते हैं कि किसी रूट पर ट्रेन को कितनी ताकत की जरूरत होगी और कहां ज्यादा सावधानी बरतनी होगी. खासकर भारी माल ढोने वाली मालगाड़ियों के लिए यह डेटा काफी अहम होता है क्योंकि वजन के हिसाब से इंजन की क्षमता, ईंधन या बिजली की खपत और गति नियंत्रण तय करना पड़ता है.
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5.रेलवे इंजीनियरिंग और बुनियादी ढांचे की योजना

रेलवे इंजीनियरिंग और बुनियादी ढांचे की योजना
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रेलवे इंजीनियरिंग और बुनियादी ढांचे की योजना में भी समुद्र तल से ऊंचाई की जानकारी बड़ी भूमिका निभाती है. रेलवे ट्रैक, पुल, सुरंग, जल निकासी प्रणाली और स्टेशन परिसर का डिजाइन तैयार करते समय इंजीनियर इलाके की ऊंचाई और ढलान को स्टडी करते हैं. कम ऊंचाई वाले क्षेत्रों में बारिश के दौरान जलभराव या बाढ़ का खतरा अधिक हो सकता है इसलिए रेलवे को पहले से तैयारी करनी पड़ती है. उदाहरण के लिए तटीय इलाकों के स्टेशन आमतौर पर समुद्र तल के ज्यादा करीब होते हैं, जबकि पहाड़ी क्षेत्रों के स्टेशन काफी ऊंचाई पर स्थित होते हैं. ऐसे में हर इलाके के हिसाब से अलग तरह की इंजीनियरिंग योजना बनाई जाती है.
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6.इंजीनियरिंग, सर्वे और टेक्निकल कामों में इस्तेमाल

इंजीनियरिंग, सर्वे और टेक्निकल कामों में इस्तेमाल
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यह बात समझना जरूरी है कि स्टेशन बोर्ड पर लिखी ऊंचाई का सीधा इस्तेमाल लोको पायलट ट्रेन चलाने के दौरान नहीं करते. ट्रेन संचालन के लिए ड्राइवरों को पहले से तय रूट प्रोफाइल, सिग्नल सिस्टम, ग्रेडिएंट चार्ट और ऑपरेटिंग निर्देश दिए जाते हैं. स्टेशन बोर्ड पर लिखी ऊंचाई खासतौर से इंजीनियरिंग, सर्वे और टेक्निकल कामों के लिए ज्यादा इस्तेमाल होती है. 
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7.ब्रिटिश काल से क्या है कनेक्शन?

ब्रिटिश काल से क्या है कनेक्शन?
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रेलवे स्टेशनों पर ऊंचाई लिखने की परंपरा नई नहीं है. ब्रिटिश काल में जब भारत में रेलवे नेटवर्क का विस्तार शुरू हुआ, तब रेल लाइनों के निर्माण के लिए जमीनों का सर्वे किया गया था. उस समय ऊंचाई और ढलान से जुड़े आंकड़े रेलवे इंजीनियरों के लिए बेहद जरूरी माने जाते थे क्योंकि इन्हीं के आधार पर ट्रैक बिछाने और सुरक्षित संचालन की योजना बनाई जाती थी. आज डिजिटल तकनीक और आधुनिक मैपिंग सिस्टम के दौर में भी रेलवे स्टेशन बोर्डों पर समुद्र तल से ऊंचाई लिखने की यह परंपरा जारी है.
(Image Credit: Wikimedia Commons)

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