एजुकेशन
जया पाण्डेय | Dec 04, 2025, 11:06 AM IST
1.साल 1992 का वो दिन जिसने बदल दिया इतिहास

साल 1992 में चेन्नई में ऑफिसर्स ट्रेनिंग एकेडमी में एक ऐतिहासिक दृश्य देखने को मिला. जैसे ही परेड ग्राउंड सुबह की धूप में जगमगा उठा, एक युवती अपनी रैंक ग्रहण करने के लिए आगे बढ़ी और भारतीय सेना में एक नए युग की शुरुआत हुई. इस युवती का नाम था मेजर प्रिया झिंगन.
2.कौन हैं लेडी कैडेट नंबर 1?

मेजर प्रिया झिंगन की पहचान हमेशा के लिए लेडी कैडेट नंबर 1 के रूप में दर्ज हो गई जो नॉन-मेडिकल भूमिका में भारतीय सेना में शामिल होने वाली पहली महिला थीं. 1992 से पहले महिलाएं सशस्त्र बलों में सिर्फ डॉक्टर या नर्स के रूप में ही सेवारत थीं. महिलाओं को अधिकारी के रूप में आर्मी की वर्दी पहने हुए देखना किसी सपने से कम नहीं था लेकिन हिमाचल प्रदेश की लॉ ग्रेजुएट प्रिया झिंगन ने इसे बदलने की ठान ली थी.
3. सेना प्रमुख को पत्र लिखकर की थी अपील

राष्ट्र सेवा के लिए दृढ़ संकल्पित प्रिया ने तत्कालीन सेना प्रमुख जनरल सुनीथ फ्रांसिस रोड्रिग्स को एक पत्र लिखकर उनसे भारतीय सेना में महिलाओं को शामिल करने का अनुरोध किया. महीनों बाद प्रतिक्रिया मिली और एक सपना नीति में बदल गया. अब सेना ने शॉर्ट सर्विस कमीशन (एसएससी) के तहत महिलाओं के लिए अपने दरवाजे खोल दिए थे.
4.ट्रेनिंग पूरी होने के बाद इस शाखा में हुई नियुक्ति

21 सितंबर 1992 को 25 महिला कैडेटों का पहला बैच ओटीए में दाखिल हुआ और प्रिया ने इसका नेतृत्व किया. उनका कैडेट नंबर था 001. ट्रेनिंग पूरा होने के बाद उन्हें जज एडवोकेट जनरल (जेएजी) शाखा में नियुक्त किया गया जो सेना के कानूनी मामलों को देखती है. अगले दस साल तक उन्होंने समर्पण, अनुशासन और गर्व के साथ सेवा की और फिर मेजर के पद से रिटायर हुईं.
5.रिटायरमेंट के बाद भी लोगों को प्रेरित कर रही हैं मेजर प्रिया झिंगन

वर्दी छोड़ने के बाद भी मेजर झिंगन प्रेरणा देती रहीं. बाद में उन्होंने पत्रकारिता और अध्यापन का काम किया और देश की सेवा करने की इच्छा रखने वाली युवतियों के लिए एक प्रेरणास्रोत बन गईं. उन्होंने एक बार कहा था, 'वर्दी आपको कभी नहीं छोड़ती बल्कि वह आपको अपना व्यक्तित्व बना लेती है.'
6.किसी प्रेरणा से कम नहीं मेजर प्रिया झिंगन की यात्रा

सेना में उनके शुरुआत के बाज कई और महिलाओं को बाधाओं को तोड़ते हुए देखा गया जिसमें कर्नल गीता राणा, लेफ्टिनेंट भावना कस्तूरी, कैप्टन तानिया शेरगिल, लेफ्टिनेंट जनरल माधुरी कानिटकर जैसे उदाहरण शामिल हैं. साहस से सेना प्रमुख को चिट्ठी लिखने से लेकर सेना को बदलने वाली विरासत तक मेजर प्रिया झिंगन की यात्रा किसी प्रेरणा से कम नहीं है.
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