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कौन हैं वह महिला IAS जिन्होंने प्राइवेट की जगह सरकारी अस्पताल में करवाया इलाज? B.Tech की पढ़ाई के बाद क्रैक की थी UPSC

आज हम आपको एक ऐसी महिला आईएएस अधिकारी से मिलवाने जा रहे हैं जिन्होंने प्रशासनिक काम करते हुए काफी मिसालें पैदा की हैं. फिलहाल तबीयत खराब होने पर वह सरकारी अस्पताल में इलाज करवाकर सुर्खियों में बनी हुई हैं, जानें कौन हैं ये आईएएस अधिकारी...

Jaya Pandey | Jun 17, 2025, 11:54 AM IST

1.सरकारी अस्पताल में इलाज करवाकर जमकर तारीफें बटोर रहीं IAS

सरकारी अस्पताल में इलाज करवाकर जमकर तारीफें बटोर रहीं IAS
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तेलंगाना कैडर की एक आईएएस अधिकारी ने ऐसा कदम उठाया है कि आम लोगों से लेकर राज्य के मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी तक उनकी तारीफ करते नहीं थक रहे हैं. दरअसल सांस की समस्या से जूझ रहीं आईएएस  पामेला सत्पथी ने किसी प्राइवेट नहीं बल्कि सरकारी अस्पताल पर भरोसा जताते हुए वहां से सर्जरी करवाई है. 

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2.आंगनबाड़ी में करवाया था बच्चे का दाखिला

आंगनबाड़ी में करवाया था बच्चे का दाखिला
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IAS पामेला सत्पथी तेलंगाना के करीमनगर जिले की कलेक्टर हैं और यह पहली बार नहीं है, जब उन्होंने ऐसा कदम उठाया हो. इससे पहले उन्होंने अपने बेटे का दाखिला आंगनबाड़ी केंद्र में करवाकर भी मिसाल कायम की थी. पामेला सत्पथी ने आंगनबाड़ी और स्कूलों के लिए जमकर काम किया है.

3.सरकारी अस्पताल में हुई सर्जरी

सरकारी अस्पताल में हुई सर्जरी
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IAS पामेला सत्पथी को सिरदर्द की शिकायत के साथ सांस लेने में दिक्कत हो रही थी और उनकी साइनस की समस्या भी बढ़ गई थी. उन्होंने सरकारी अस्पताल पर भरोसा जताया और करीमनगर के सरकारी जनरल अस्पताल में भर्ती हो गईं. डॉक्टरों ने पाया कि उनके नाक की हड्डी बढ़ गई है और फिर उनकी एंडोस्कोपी नेसल सर्जरी और सेप्टोप्लास्टी सर्जरी की गई.

4.कंप्यूटर साइंस से की है इंजीनियरिंग

कंप्यूटर साइंस से की है इंजीनियरिंग
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पामेला सत्पथी 1985 बैच की आईएएस अधिकारी हैं. उन्होंने इंजीनियरिंग बैकग्राउंड से पढ़ाई की है लेकिन वह बचपन से डॉक्टर बनना चाहती थीं. उन्होंने कंप्यूटर साइंस से इंजीनियरिंग की है और फिर उन्होंने सोशियोलॉजी और मानवाधिकार पोस्टग्रेजुएशन भी किया. इसके अलावा उन्होंने ट्राइबल डेवलपमेंट एंड मैनेजमेंट में पीजी डिप्लोमा किया है.

5.B.Tech के बाद प्राइवेट सेक्टर में भी किया काम

B.Tech के बाद प्राइवेट सेक्टर में भी किया काम
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अपनी बीटेक की पढ़ाई पूरी करने के बाद उन्होंने इन्फोसिस में सॉफ्टवेयर इंजीनियर के पद पर काम किया और वह CAIR में साइंटिस्ट फेलो के तौर पर भी काम कर चुकी हैं. हालांकि इसके बाद उन्हें लगा कि वह सिविल सेवा में जाकर समाज के लिए कुछ बेहतर कर सकती है और वह यूपीएससी की तैयारी में जुट गईं. आज वह अपने प्रशासनिक कामों से लोगों के बीच प्रेरणास्रोत बनी हुई हैं.

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