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भारत की किस नदी में बहता है 'दूध'? जानें इसे गुप्तगामिनी के नाम से क्यों जानते हैं लोग

भारत की इस नदी को क्षीर नदी यानी दूध की नदी कहते हैं और इसे ऐसा कहने के पीछे की वजह क्या है? साल में अधिकतर समय यह रेत के नीचे छिपी हुई बहती है इसलिए इसे गुप्तगामिनी के नाम से भी जाना जाता है...

Jaya Pandey | Mar 03, 2026, 10:58 AM IST

1.भारत में बहने वाली 'दूध की नदी'

भारत में बहने वाली 'दूध की नदी'
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भारत में सैकड़ों नदियां बहती हैं, लेकिन दक्षिण भारत की एक नदी ऐसी भी है जिसके दो नाम भारतीय भूगोल के सबसे काव्यात्मक नामों में गिने जाते हैं. यह है पलार नदी, जिसे स्थानीय लोग सदियों से क्षीर नदी यानी दूध की नदी और गुप्तगामिनी यानी छिपी हुई नदी के नाम से जानते हैं. यह लगभग 348 किलोमीटर लंबी नदी कर्नाटक, आंध्र प्रदेश और तमिलनाडु से होकर बहती है और दक्षिण भारत के शुष्क इलाकों में जीवन की महत्वपूर्ण धारा मानी जाती है.

(Image: AI Generated)

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2.किन-किन जगहों से होकर बहती है पलार नदी?

किन-किन जगहों से होकर बहती है पलार नदी?
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पलार नदी का उद्गम कर्नाटक की नंदी हिल्स में होता है. यही पहाड़ियां बेंगलुरु के पास स्थित हैं और यहीं से अर्कावती नदी भी निकलती है. नंदी हिल्स से निकलकर पलार लगभग 93 किलोमीटर कर्नाटक में बहती है, फिर करीब 33 किलोमीटर आंध्र प्रदेश की सीमा को छूती है और उसके बाद लगभग 222 किलोमीटर तमिलनाडु से होकर गुजरती है. तमिलनाडु में यह वेल्लोर, रानीपेट और कांचीपुरम जिलों से बहती हुई चेन्नई से लगभग 75 किलोमीटर दक्षिण में वायलूर-कदलूर गांव के पास बंगाल की खाड़ी में मिल जाती है.

(Image: AI Generated)

3.भारत के महत्वपूर्ण नदी तंत्र का हिस्सा है पलार

भारत के महत्वपूर्ण नदी तंत्र का हिस्सा है पलार
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हालांकि पलार को आज एक मौसमी नदी माना जाता है, लेकिन ऐतिहासिक रूप से यह दक्षिण भारत के महत्वपूर्ण नदी तंत्र का हिस्सा रही है. इसके किनारों पर कई राजवंशों का उत्थान और पतन हुआ. पल्लव राजाओं ने इसके तट पर मंदिर स्थापत्य को बढ़ावा दिया. जिंजी के नायकों और अरकोट के नवाबों ने भी इस क्षेत्र में शासन और व्यापार किया. औपनिवेशिक काल में ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी ने इस क्षेत्र के जल संसाधनों और व्यापार मार्गों का उपयोग किया. इस तरह यह नदी केवल जलधारा नहीं रही, बल्कि इतिहास की साक्षी भी बनी.

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4.इसे दूध की नदी क्यों कहा जाता है?

इसे दूध की नदी क्यों कहा जाता है?
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पलार नाम तमिल शब्द 'पाल' यानी दूध और 'आरू' यानी नदी से मिलकर बना है. इसका एक कारण इसका रेतीला तल है, जो मुख्य रूप से क्वार्ट्ज और फेल्डस्पार जैसे खनिजों से बना है. शुष्क मौसम में जब पानी सतह पर दिखाई नहीं देता, तब इसकी चौड़ी धारा सफेद और चमकीली रेत से ढकी रहती है. दूर से देखने पर यह दृश्य दूधिया विस्तार जैसा लगता है. यही वजह है कि इसे क्षीर नदी कहा गया. इसके अलावा यह नदी चूना पत्थर और कैल्शियम युक्त क्षेत्रों से होकर बहती है, जिससे इसके पानी में स्वाभाविक स्पष्टता पाई जाती है. स्थानीय मान्यताओं और पुराने शिलालेखों में भी इसके जल को शुद्ध और जीवनदायी बताया गया है.

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5.इसे गुप्तगामिनी नदी क्यों कहा जाता है?

इसे गुप्तगामिनी नदी क्यों कहा जाता है?
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पलार साल के अधिकांश समय सतह पर सूखी दिखाई देती है, लेकिन वास्तव में इसका जल प्रवाह पूरी तरह समाप्त नहीं होता. मानसून के दौरान नंदी हिल्स और आसपास के क्षेत्रों में होने वाली वर्षा का पानी इसके रेतीले तल में समा जाता है और भूमिगत धारा के रूप में आगे बढ़ता है. यह रेतीला तल एक प्राकृतिक जलभंडार की तरह काम करता है, जो आसपास के इलाकों में भूजल स्तर को बनाए रखने में मदद करता है. तमिलनाडु के सूखाग्रस्त जिलों में कुएं और बोरवेल काफी हद तक इसी भूमिगत प्रवाह पर निर्भर रहे हैं. ऐतिहासिक रूप से कर्नाटक के कोलार गोल्ड फील्ड्स क्षेत्र ने भी पानी की जरूरतों के लिए इस नदी तंत्र पर निर्भरता दिखाई थी. सतह पर शांत और कई बार सूखी दिखने के बावजूद यह नदी भीतर ही भीतर जीवन को पोषित करती रहती है इसलिए इसे गुप्तगामिनी कहा जाता है.

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6.पलार नदी के तट पर इतिहास और संस्कृति की गहरी छाप

पलार नदी के तट पर इतिहास और संस्कृति की गहरी छाप
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पलार नदी के किनारे इतिहास और संस्कृति की गहरी छाप दिखाई देती है. तीसरी से नौवीं शताब्दी के बीच दक्षिण भारत में प्रभावशाली रहे पल्लव राजाओं ने इसके आसपास कई मंदिरों का निर्माण कराया. कांचीपुरम क्षेत्र, जो कभी पल्लव राजधानी रहा, इसी नदी तंत्र के प्रभाव क्षेत्र में आता है. वासवसमुद्रम में स्थित श्री कैलाशनाथर कोविल जैसे प्राचीन शिव मंदिर नदी के सांस्कृतिक महत्व को दर्शाते हैं. मानसून के बाद जब आसपास के खेतों में हरियाली छा जाती है और नदी में पानी भरता है, तब यह क्षेत्र अद्भुत दृश्य प्रस्तुत करता है.

(Image: AI Generated)

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