एजुकेशन
जया पाण्डेय | Dec 14, 2025, 08:15 AM IST
1.दुनिया के सबसे छोटे कद के लोग किन 5 देशों में रहते हैं?

रूप-रंग हमेशा से ही मानव जाति के लिए चिंता का विषय रहा है. कद से लेकर रंग तक मानव के शरीर की विविधता जेनेटिक्स, आहार और पर्यावरणीय परिस्थितियों जैसे कारकों पर निर्भर करता है. लेकिन क्या आप जानते हैं कि दुनिया में कुछ ऐसे देश हैं जो अपनी जनसंख्या के कम औसत कद के लिए जाने जाते हैं. यहां देखिए 5 कम कद वाले लोगों की 5 देशों की लिस्ट
2.तिमोर-लेस्ते

तिमोर-लेस्ते दुनिया में सबसे कम औसत ऊंचाई वाले लोगों का देश है. दक्षिण-पूर्वी एशिया में तिमोर द्वीप के पूर्वी भाग में स्थित यह देश छोटे कद के लोगों का देश है. यहां पुरुषों की औसत ऊंचाई लगभग 160 सेंटीमीटर (5 फीट 3 इंच) है, जबकि महिलाओं की औसत ऊंचाई 153 सेंटीमीटर (5 फीट) है. कम कद का मुख्य कारण पोषण की कमी और आनुवंशिक कारण हैं.
3.लाओस

दक्षिणपूर्व एशिया का एक और देश लाओस दुनिया में दूसरे सबसे कम कद वाले लोगों का देश है. यहां पुरुषों की लंबाई लगभग 163 सेंटीमीटर (5 फीट 4 इंच) और महिलाओं की लंबाई 153 सेंटीमीटर (5 फीट) है. यहां कम कद का एक प्रमुख कारण आनुवंशिकी है.
4.सोलोमन द्वीप समूह

प्रशांत महासागर में स्थित मेलनेशियन देश सोलोमन द्वीप समूह में पुरुषों की औसत ऊंचाई 163 सेंटीमीटर (5 फीट 4 इंच) है, जबकि महिलाओं की औसत ऊंचाई 157 सेंटीमीटर (5 फीट 2 इंच) है. परंपरागत रूप से द्वीपवासी पारंपरिक आजीविका पर निर्भर रहे हैं जो उनकी अधिक ऊंचाई का एक कारण हो सकता है.
5.पापुआ न्यू गिनी

सोलोमन द्वीप समूह की तरह ही पापुआ न्यू गिनी में पुरुषों की औसत ऊंचाई 63 सेंटीमीटर और महिलाओं की 157 सेंटीमीटर है, जो सांस्कृतिक और भौगोलिक कारकों की वजह से है.
6.मोजाम्बिक

दक्षिण-पूर्वी अफ्रीका में मोजाम्बिक में पुरुषों की औसत ऊंचाई लगभग 164 सेंटीमीटर (5 फीट 5 इंच) और महिलाओं की 155 सेंटीमीटर (5 फीट 1 इंच) है. हालांकि यह एक तटीय देश है और यहां की जलवायु उष्णकटिबंधीय है, फिर भी कुपोषण और स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं औसत ऊंचाई को प्रभावित करती हैं.
7.भारत की क्या है स्थिति?

भारत सबसे कम कद वाले देशों की सूची में शामिल नहीं है. अरबों की आबादी वाले इस देश में पुरुषों की औसत ऊंचाई 5 फीट 6 इंच है, जबकि महिलाओं की औसत ऊंचाई 5 फीट 4 इंच है. भारत में लोगों की औसत ऊंचाई मध्यम है, लेकिन पोषण, जीवनशैली और आनुवंशिकी जैसे कारकों के कारण वैश्विक औसत से थोड़ी कम है.
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