एजुकेशन
Jaya Pandey | Feb 24, 2026, 01:35 PM IST
1.क्या होता है लोको पायलट का काम?

भारत में प्रतिदिन लाखों यात्री रेलवे की ट्रेनों से यात्रा करते हैं और इन ट्रेनों को सुरक्षित चलाने की बड़ी जिम्मेदारी लोको पायलटों पर होती है. लोको पायलट को आम बोलचाल में ट्रेन ड्राइवर कहा जाता है लेकिन उनका काम सिर्फ इंजन चलाना नहीं होता. उन्हें सिग्नल पर नजर रखना, ट्रैक की स्थिति समझना, स्पीड कंट्रोल करना, कंट्रोल रूम के निर्देशों का पालन करना और किसी भी आपात स्थिति में तुरंत फैसला लेना पड़ता है. ट्रेन चलाते समय एक छोटी गलती भी बड़ी दुर्घटना बन सकती है इसलिए यह पद अत्यंत जिम्मेदारी वाला माना जाता है.
(Photo: AI Generated)
2.कितनी होती है लोको पायलट की सैलरी?

रेलवे में अधिकतर भर्ती असिस्टेंट लोको पायलट के पद से शुरू होती है जिसकी भर्ती आमतौर पर रेलवे रिक्रूटमेंट बोर्ड के माध्यम से होती है. सातवें वेतन आयोग के अनुसार असिस्टेंट लोको पायलट का बेसिक वेतन पे-लेवल-2 में लगभग ₹19,900 प्रति माह से शुरू होता है.
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3.सीनियर असिस्टेंट लोको पायलट को कितना मिलता है वेतन?

ट्रेनिंग पूरी होने और अनुभव बढ़ने पर पदोन्नति होकर सीनियर असिस्टेंट लोको पायलट, लोको पायलट और फिर सीनियर लोको पायलट तक पहुंचा जा सकता है. इन पदों पर बेसिक सैलरी लगभग ₹35,000 से ₹60,000 या उससे अधिक हो सकती है. विभिन्न भत्तों को जोड़ने के बाद शुरुआती कुल वेतन आम तौर पर लगभग ₹35,000-₹45,000 से शुरू होकर अनुभव और रूट के अनुसार ₹70,000-₹90,000 प्रति माह या उससे अधिक तक पहुंच सकता है.
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4.सैलरी के अलावा लोको पायलट को कौन से भत्ते मिलते हैं?

लोको पायलट की कमाई में बेसिक वेतन के अलावा कई भत्ते शामिल होते हैं. इसमें महंगाई भत्ता, मकान किराया भत्ता, परिवहन भत्ता, नाइट ड्यूटी भत्ता और सबसे महत्वपूर्ण रनिंग अलाउंस शामिल होता है, जो ट्रेन द्वारा तय दूरी और ड्यूटी के प्रकार के आधार पर मिलता है. लंबी दूरी या अधिक किलोमीटर चलाने वाले लोको पायलटों को रनिंग भत्ता ज्यादा मिलता है, जिससे कुल आय काफी बढ़ जाती है. कुछ मामलों में ओवरटाइम और विशेष ड्यूटी भत्ते भी दिए जाते हैं.
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5.लोको पायलट के काम के घंटे

काम के घंटों की बात करें तो लोको पायलट की ड्यूटी सामान्य ऑफिस नौकरी जैसी तय नहीं होती. उन्हें दिन और रात दोनों समय शिफ्ट में काम करना पड़ता है और कभी-कभी लगातार कई घंटे इंजन में रहना होता है. हालांकि सुरक्षा नियमों के अनुसार अधिकतम कार्य अवधि और अनिवार्य विश्राम समय तय किया गया है ताकि थकान से दुर्घटना न हो.
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6.कड़ी ट्रेनिंग के बाद बन सकते हैं रेलवे के लोको पायलट

इस पद के लिए सिलेक्शन के बाद कड़ा तकनीकी प्रशिक्षण दिया जाता है और नियमित मेडिकल जांच भी होती है जिसमें आंखों की रोशनी, रंग पहचानने की क्षमता, सुनने की शक्ति और मानसिक फिटनेस की जांच शामिल होती है. यही कारण है कि लोको पायलट का पद तकनीकी कौशल, अनुशासन और सतर्कता का मिश्रण माना जाता है.
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