एजुकेशन
जया पाण्डेय | Jan 19, 2026, 06:31 PM IST
1.आईआईटी से भी पहले शुरू हो चुकी थी भारत में इंजीनियरिंग की पढ़ाई

भारत में इंजीनियरिंग शिक्षा की शुरुआत आईआईटी से बहुत पहले हो चुकी थी. अक्सर लोग मानते हैं कि 1951 में आईआईटी खड़गपुर की स्थापना से ही देश में तकनीकी शिक्षा का आधुनिक युग शुरू हुआ, लेकिन असल में भारत में संगठित इंजीनियरिंग शिक्षा की जड़ें 18वीं शताब्दी तक जाती हैं. ब्रिटिश शासन के दौरान नहरों, रेलवे, सड़कों और पुलों के निर्माण के लिए प्रशिक्षित इंजीनियरों की आवश्यकता थी. इसी जरूरत के कारण कई तकनीकी संस्थानों की स्थापना हुई.
(नोट- सभी तस्वीरें AI जनरेटेड हैं.)
2.भारत का सबसे पुराना इंजीनियरिंग कॉलेज

चेन्नई के कॉलेज ऑफ इंजीनियरिंग, गिंडी (College of Engineering, Guindy) को भारत ही नहीं बल्कि एशिया का सबसे पुराना तकनीकी संस्थान माना जाता है. इसकी शुरुआत 1794 में एक सर्वे और इंजीनियरिंग प्रशिक्षण विद्यालय के रूप में हुई थी. बाद में 1858 में इसे औपचारिक रूप से एक पूर्ण इंजीनियरिंग कॉलेज का दर्जा मिला. यह संस्थान आज अन्ना यूनिवर्सिटी का हिस्सा है.
3.आईआईटी रुड़की का ऐतिहासिक योगदान

वर्तमान आईआईटी रुड़की की स्थापना 1847 में थॉमसन कॉलेज ऑफ सिविल इंजीनियरिंग के रूप में हुई थी. इसका मुख्य उद्देश्य गंगा नहर परियोजना के लिए सिविल इंजीनियर तैयार करना था. 1949 में इसे यूनिवर्सिटी ऑफ रुड़की और 2001 में इसे आईआईटी का दर्जा मिला.
4.भारत के आईआईटी से भी पुराने इंजीनियरिंग इंस्टीट्यूट्स

इन दोनों इंस्टीट्यूट के अलावा भारत के पुराने इंजानियरिंग कॉलेजों में कॉलेज ऑफ इंजीनियरिंग, पुणे (1854), इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ इंजीनियरिंग साइंस एंड टेक्नोलॉजी, शिबपुर (IIEST)(1856), बंगाल इंजीनियरिंग कॉलेज, शिबपुर, बिहार कॉलेज ऑफ इंजीनियरिंग, पटना (1924) का नाम आता है. इन संस्थानों ने भारत में प्रोफेशनल इंजीनियरिंग शिक्षा की मजबूत नींव रखी.
5.आईआईटी से पहले और बाद का अंतर

आईआईटी से पहले के कॉलेज मुख्य रूप से औपनिवेशिक भारत की व्यावहारिक जरूरतों के लिए काम करते थे. जबकि आईआईटी प्रणाली स्वतंत्रता के बाद उच्च स्तरीय अनुसंधान, विज्ञान और वैश्विक तकनीकी मानकों को स्थापित करने के लिए बनाई गई. इन पुराने कॉलेजों ने इंजीनियरिंग को केवल कारीगरी से आगे बढ़ाकर एक मान्यता प्राप्त शैक्षणिक विषय बनाया, जिसने आगे चलकर आधुनिक भारत के औद्योगिक और वैज्ञानिक विकास की नींव रखी.
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