एजुकेशन
Jaya Pandey | Apr 14, 2026, 10:12 AM IST
1.कैसे पैसे कमा रहे दुनिया के ये 8 देश?

दुनिया के सबसे व्यस्त समुद्री मार्गों पर नियंत्रण करके कई देश बिना नेचुरल गैस, क्रूड ऑयल बेचे या बिना बड़े पैमाने पर उत्पादन किए ही अरबों डॉलर कमाते हैं. हाल के समय में ईरान ने स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से जहाजों की आवाजाही बंद करके, इन समुद्री मार्गों की अहमियत को और बढ़ा दिया है. इन समुद्री मार्गों पर थोड़ी सी पाबंदी भी दुनिया के सप्लाई चेन को प्रभावित करने के लिए काफी है.
(Image Credit: Wikimedia Commons)
2.समुद्री चोकपॉइंट

स्वेज नहर से लेकर मलक्का जलडमरूमध्य तक कई ऐसे समुद्री चोकपॉइंट हैं, जिनसे होकर दुनिया का बड़ा हिस्सा व्यापार करता है. ये रास्ते जहाजों की यात्रा को हजारों किलोमीटर छोटा कर देते हैं. अगर जहाज इन मार्गों से न जाएं, तो उन्हें लंबा रास्ता लेना पड़ता है, जिससे ईंधन खर्च, समय और लागत तीनों बढ़ जाते हैं. इसी वजह से शिपिंग कंपनियां खुशी-खुशी भारी टोल फीस देती हैं और तटवर्ती देश टोल, पोर्ट चार्ज, ईंधन, मरम्मत और लॉजिस्टिक्स सेवाओं से बड़ी कमाई करते हैं.
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3. ईरान और ओमान

स्ट्रेट ऑफ होर्मुज दुनिया की तेल आपूर्ति की जीवनरेखा माना जाता है. यह ईरान और ओमान के बीच स्थित है और दुनिया के कुल तेल व्यापार का लगभग 20 प्रतिशत हिस्सा इसी रास्ते से गुजरता है. इस क्षेत्र में मौजूद देशों ने बंदरगाह, तेल भंडारण और लॉजिस्टिक्स नेटवर्क विकसित करके इस ट्रैफिक से बड़ा आर्थिक लाभ उठाया है. ओमान के मुसंदम क्षेत्र का विकास इसी रणनीति का हिस्सा है.
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4.मिस्र

स्वेज नहर मिस्र की अर्थव्यवस्था की रीढ़ है. यह भूमध्य सागर और लाल सागर को जोड़ती है और यूरोप-एशिया के बीच सबसे छोटा समुद्री रास्ता देती है. आमतौर पर वैश्विक व्यापार का लगभग 10 से 12 प्रतिशत हिस्सा इसी नहर से गुजरता है. 2023 में मिस्र ने इससे करीब 10 अरब डॉलर से ज्यादा की कमाई की थी. हालांकि 2024 में लाल सागर क्षेत्र में सुरक्षा चुनौतियों (जैसे यमन के हूती हमलों) के कारण जहाजों की आवाजाही घटी, जिससे राजस्व में गिरावट आई. फिर भी यह नहर मिस्र के लिए विदेशी मुद्रा का सबसे बड़ा स्रोत बनी हुई है.
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5.पनामा

पनामा नहर अटलांटिक और प्रशांत महासागर को जोड़ती है और पनामा की अर्थव्यवस्था का मुख्य आधार है. इसके बिना जहाजों को दक्षिण अमेरिका के दक्षिणी सिरे (केप हॉर्न) से होकर लंबा और खतरनाक रास्ता लेना पड़ता. 2024 में सूखे की वजह से जहाजों की संख्या सीमित करनी पड़ी, लेकिन इसके बावजूद नहर ने लगभग 5 अरब डॉलर का राजस्व अर्जित किया. बड़े जहाजों से एक बार गुजरने के लिए लाखों डॉलर तक टोल लिया जाता है.
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6.इंडोनेशिया, मलेशिया और सिंगापुर

मलक्का जलडमरूमध्य, जो इंडोनेशिया, मलेशिया और सिंगापुर के बीच स्थित है, दुनिया का सबसे व्यस्त समुद्री मार्ग है. वैश्विक समुद्री व्यापार का लगभग एक चौथाई हिस्सा यहां से गुजरता है. सिंगापुर ने इस ट्रैफिक को अवसर में बदलकर खुद को दुनिया का प्रमुख पोर्ट और शिपिंग हब बना लिया है. यहां जहाज ईंधन भरते हैं, मरम्मत कराते हैं और सामान ट्रांसशिप करते हैं, जिससे इन देशों को भारी राजस्व मिलता है.
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7.जिबूती

बाब-अल-मंडेब लाल सागर के दक्षिणी छोर पर स्थित है और स्वेज नहर के लिए प्रवेश द्वार जैसा काम करता है. जिबूती जैसे छोटे देश ने इस स्थान का फायदा उठाकर विदेशी सैन्य अड्डों और बंदरगाह निवेश को आकर्षित किया है. अमेरिका, चीन और फ्रांस यहां सैन्य उपस्थिति बनाए हुए हैं, जिससे जिबूती को किराया, सेवाओं और लॉजिस्टिक्स से आय होती है.
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8.तुर्की

काला सागर को भूमध्य सागर से जोड़ने वाले बोस्फोरस जलडमरूमध्य और डार्डानेल्स जलडमरूमध्य पर तुर्की का नियंत्रण है. रूस-यूक्रेन युद्ध के दौरान इन मार्गों का महत्व और बढ़ गया था, क्योंकि अनाज और ऊर्जा आपूर्ति इन्हीं रास्तों से होती थी. मोंट्रेक्स कन्वेंशन के कारण तुर्की यहां से सीधे टोल नहीं लेता, लेकिन पायलटिंग, सुरक्षा और पोर्ट सेवाओं से आय अर्जित करता है और साथ ही कूटनीतिक प्रभाव भी हासिल करता है.
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9.समुद्री मार्गों से कमाई करना नहीं है आसान

हालांकि इन समुद्री मार्गों से कमाई आसान नहीं है. नहरों की नियमित खुदाई (ड्रेजिंग), सुरक्षा व्यवस्था, समुद्री ट्रैफिक नियंत्रण और पर्यावरणीय चुनौतियों से निपटना काफी महंगा और कठिन काम है. जलवायु परिवर्तन, सूखा और क्षेत्रीय संघर्ष भी इन मार्गों को प्रभावित करते हैं. इसके बावजूद आज की वैश्विक अर्थव्यवस्था में भौगोलिक स्थिति एक बड़ी आर्थिक ताकत बन चुकी है.
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