एजुकेशन
जया पाण्डेय | Dec 10, 2025, 08:09 AM IST
1.भारत की पहली महिला चार्टर्ड अकाउंटेंट

कॉरपोरेट जगत में लैंगिक समानता की बात शुरू होने से दशकों पहले एक युवा महिला ने वित्तीय जगत का नियम चुपचाप बदल दिया. आर.शिवभोगम को भारत की पहली महिला चार्टर्ड अकाउंटेंट के रूप में याद किया जाता है. उन्होंने उस दौर में पूरी तरह से पुरुषों के वर्चस्व वाले क्षेत्र में क्रांति ला दी थी.
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2.मर्दों के पेशे में यूं लाईं क्रांति

1907 में तमिलनाडु में जन्मी शिवभोगम के शुरुआती जीवन में इस बात का कोई संकेत नहीं था कि वह इतना बड़ा नाम बनेंगी. लेकिन जब उन्होंने संख्याओं की दुनिया में कदम रखा तो सब कुछ बदल गया. उनकी शैक्षणिक प्रतिभा उभरकर सामने आई और जल्द ही उन्होंने खुद को अकाउंटेंसी की ओर आकर्षित पाया. हालांकि उस वक्त इस पेशे में कोई महिला नहीं थी.
3.स्वतंत्रता आंदोलनों में भी लिया हिस्सा

आर.शिवभोगम ने जब पहली बार सीए की परीक्षा के लिए आवेदन किया तो लोग हंसे. उनसे कहा गया कि ये लड़कियों का काम नहीं है लेकिन फिर भी वे डटी रहीं. सीए बनने से पहले ही शिवभोगम नियमों को तोड़ रही थीं. उन्होंने स्वतंत्रता आंदोलन में हिस्सा लिया और अंग्रजों के खिलाफ प्रदर्शनों में हिस्सा लेने के कारण जेल भी गईं.
4.खुद की प्रैक्टिस के साथ जूनियर्स का भी किया मार्गदर्शन

1933 में शिवभोगम चार्टर्ड अकाउंटेंट बनने वाली पहली भारतीय महिला बनीं. इस पल ने इतिहास ही बदल डाला. बाद में उन्होंने अपनी खुद की प्रैक्टिस शुरू की, जूनियर का मार्गदर्शन किया और यह साबित किया कि विशेषज्ञता का कोई लिंग नहीं होता.
5.सीए प्रोफेशन में महिलाओं के लिए खोला रास्ता

उनकी उपलब्धियों ने सीए के पेशे में और महिलाओं के लिए रास्ता खोला. आज CA पेशे में हर साल लगभग 45% महिलाएं शामिल होती हैं लेकिन 1930 के दशक में यह अकल्पनीय था. आर. शिवभोगम न केवल भारत की पहली महिला CA बनीं बल्कि यह साबित करने वाली पहली महिला भी बनीं कि फाइनेंस केवल पुरुषों का क्षेत्र नहीं है.
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