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टाटा की पहली महिला इंजीनियर जिनके लेखों ने एपीजे अब्दुल कलाम को भी किया था मोहित, जानें Sudha Murthy की दिल छू लेने वाली कहानी

जब नौकरी पाने के लिए सुधा मूर्ति को जेआरडी टाटा को भी लिखनी पड़ी थी चिट्ठी, जानें कैसे बनीं टाटा की पहली महिला इंजीनियर और कैसे पूर्व राष्ट्रपति एपीजे अब्दुल कलाम थे उनकी लेखनी के कायल

Jaya Pandey | Aug 18, 2025, 04:38 PM IST

1.टाटा मोटर्स की पहली महिला इंजीनियर थीं सुधा मूर्ति

टाटा मोटर्स की पहली महिला इंजीनियर थीं सुधा मूर्ति
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टाटा मोटर्स में पहली महिला इंजीनियर के रूप में जाने जाने वाली सुधा मूर्ति कर्नाटक के हुबली-धारवाड़ स्थित इंजीनियरिंग कॉलेज में अपनी कक्षा में एकमात्र छात्रा थी. मूर्ति ने पूर्वाग्रह और भेदभाव को मात देते हुए कर्नाटक के सभी इंजीनियरिंग विश्वविद्यालयों में सर्वोच्च अंक प्राप्त करने के लिए इंस्टीट्यूशन ऑफ इंजीनियर्स, इंडिया से गोल्ड मेडल और कर्नाटक के मुख्यमंत्री से सिल्वर मेडल हासिल किया.

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2.नौकरी पाने के लिए जेआरडी टाटा को लिखनी पड़ी थी चिट्ठी

नौकरी पाने के लिए जेआरडी टाटा को लिखनी पड़ी थी चिट्ठी
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इसके बावजूद उन्हें टाटा मोटर्स में नौकरी पाने के लिए एक साहसिक कदम उठाने की जरूरत आ पड़ी थी. उन्होंने आईआईएससी से स्नातकों के लिए एक आमंत्रण के जवाब में आवेदन किया था, जबकि इस पर्चे में कंपनी की ओर से साफ लिखा गया था कि महिला उम्मीदवारों को आवेदन करने की जरूरत नहीं है. बावजूद इसके मूर्ति ने आवेदन किया और साहस के साथ सीधे जेआरडी टाटा को पत्र लिख डाला.

3.जेआरडी टाटा को चिट्ठी में सुधा मूर्ति ने क्या लिखा?

जेआरडी टाटा को चिट्ठी में सुधा मूर्ति ने क्या लिखा?
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जेआरडी टाटा को लिखी चिट्ठी में उन्होंने समूह को रसायन, इंजन और लौह-इस्पात उद्योग में अग्रणी मानते हुए महिलाओं को आगे बढ़ने के अवसर देने का आग्रह किया था. उन्होंने लिखा था कि अगर महिलाओं को शिक्षा और रोजगार के अवसर नहीं मिलेंगे तो समाज या देश कभी तरक्की नहीं कर पाएगा और टेल्को, पुणे में महिला छात्रों को नौकरी के लिए आवेदन करने की अनुमति न देना कंपनी की एक बड़ी भूल है.
 

4.सुधा मूर्ति ने लिखी हैं 40 से ज्यादा किताबें

सुधा मूर्ति ने लिखी हैं 40 से ज्यादा किताबें
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उत्तरी कर्नाटक के शिगगांव में 19 अगस्त 1950 को जन्मी सुधा मूर्ति अपने दादा-दादी से महाभारत और रामायण की कहानियां सुनकर बड़ी हुईं. आज मूर्ति की पहचान एक लेखिका, समाजसेवी, शिक्षिका, इंजीनियर और वक्ता के रूप में होती है. एक लेखिका के रूप में मूर्ति ने 40 से ज्यादा किताबें लिखी हैं. उनकी बेस्टसेलर किताबों में थ्री थाउजेड स्टिचेज, डॉलर बहू और वाइज एंड अदरवाइज शामिल हैं.

5.किन विधाओं में लिखती हैं सुधा मूर्ति?

किन विधाओं में लिखती हैं सुधा मूर्ति?
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सुधा मूर्ति बच्चों और बड़ों के लिए विभिन्न विधाओं जैसे उपन्यास, लघुकथाएं और यात्रा वृत्तांत लिखती हैं. उनकी कहानियां उनकी यात्राओं, जीवन के अनुभवों और उनसे मिलने वाले लोगों से प्रेरित हैं. वह अक्सर पौराणिक कथाओं से प्रेरणा लेती हैं जिससे युवा पाठकों को मूल्यों और सिद्धांतों को सहज और रोचक तरीके से समझने में मदद मिलती है.

6.इन पुरस्कारों से सम्मानित हो चुकी हैं सुधा मूर्ति

इन पुरस्कारों से सम्मानित हो चुकी हैं सुधा मूर्ति
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सुधा मूर्ति के साहित्यिक कार्यों को कई पुरस्कारों से सम्मानित किया गया है जिनमें 2023 में साहित्य अकादमी पुरस्कार, 2006 में साहित्य के लिए आर.के. नारायण पुरस्कार और 2020 में लाल बहादुर शास्त्री राष्ट्रीय पुरस्कार शामिल हैं. उन्हें भारत भर के विश्वविद्यालयों से साहित्य में दस मानद डॉक्टरेट की उपाधियां प्राप्त हैं.

7.सुधा मूर्ति की लेखनी के कायल थे कलाम

सुधा मूर्ति की लेखनी के कायल थे कलाम
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सुधा मूर्ति भारत के पूर्व राष्ट्रपति डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम को लेकर एक किस्से का जिक्र कर बताती हैं कि एक बार जब उन्हें देश के राष्ट्रपति का फोन आया तो उन्हें लगा यह गलती से किया गया फोन कॉल था. हालांकि देश के राष्ट्रपति ने यह कॉल सुधा मूर्ति को ही किया था जिसमें उन्होंने बताया था कि वे अक्सर मूर्ति के लिखे लेख पढ़ते हैं.

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