एजुकेशन
Jaya Pandey | Aug 07, 2025, 11:20 AM IST
1.कौन हैं मंजुल भार्गव?

मंजुल भार्गव दुनिया के सबसे प्रतिष्ठित मैथमेटिशियन में से एक हैं जिन्हें नंबर थ्योरी में उनके योगदान के लिए जाना जाता है. उन्होंने हाल ही में कहा था कि एक या दो साल के अंदर एआई मॉडल किसी भी अंडरग्रेजुएट साइंस प्रॉब्लम का समाधान करने में सक्षम होंगे. उन्होंने कहा था कि एआई एक क्वांटम लीप के कगार पर है जिसने दुनियाभर के साइंटिस्ट का ध्यान खींचा था.
2.मां थीं गणित की पहली टीचर

मंजुल का जन्म 8 अगस्त 1974 को हैमिल्टन, ओंटारियो में हुआ था. वे लॉन्ग आइलैंड और न्यूयॉर्क में पले-बढ़े. गणित के प्रति उनका जुनून कम उम्र में ही गहरा हो गया था. उनकी मां मीरा भार्गव मैथ्स की प्रोफेसर और उनकी पहली गुरु थीं जिन्होंने गणित की दुनिया में कुछ हासिल करने के लिए उन्हें प्रेरणा दी.
3.ज़ाकिर हुसैन से ली थी तबला बजाने की ट्रेनिंग

14 साल की उम्र तक उन्होंने गणित और कंप्यूटर विज्ञान में हाई स्कूल का पूरा पाठ्यक्रम पूरा कर लिया था. अपनी भारतीय जड़ों से उनके गहरे जुड़ाव का भी उन पर गहरा प्रभाव पड़ा. उन्होंने ज़ाकिर हुसैन से तबला बजाने की ट्रेनिंग ली और अपने प्राचीन भारतीय इतिहास के प्रोफेसर दादा पुरुषोत्तम लाल भार्गव से संस्कृत सीखी.
4.हार्वर्ड से किया है मैथ्य में ग्रेजुएशन

मंजुल भार्गव ने हार्वर्ड यूनिवर्सिटी से 1996 में मैथ्स में ग्रेजुएशन किया. ग्रेजुएशन में उनका रिसर्च इतना जबर्दस्त था कि उन्हें उन्हें मॉर्गन पुरस्कार से सम्मानित किया गया जो उत्तरी अमेरिका में अंडरग्रेजुएट मैथमैटिशियन के लिए सर्वोच्च सम्मान है.
5.इस महान साइंटिस्ट के अंडर पूरी की पीएचडी

इसके बाद उन्होंने प्रिंसटन यूनिवर्सिटी में महान साइंटिस्ट सर एंड्रयू विल्स के मार्गदर्शन में पीएचडी की. विल्स Fermat's Last Theorem के प्रमाण के लिए प्रसिद्ध थे. उनकी डॉक्टरेट थीसिस ने उनकी सबसे प्रसिद्ध खोजों की नींव रखी.
6.नंबर थ्योरी में बेहद खास था योगदान

मंजुल भार्गव का काम खास नंबर थ्योरी में हमेशा इतिहास रचने में सक्षम रहा है. इस उपलब्धि के लिए उन्हें 2014 में प्रतिष्ठित फील्ड्स मेडल से सम्मानित किया गया. यह नंबर्स की ज्योमेट्री में शक्तिशाली नई विधियों का उनका विकास था.
7.विदेश में रहते हुए भारत के साथ भी हैं अच्छे संबंध

प्रिंसटन यूनिवर्सिटी ने उनकी प्रतिभा को पहचाना और 29 साल की उम्र में वह वहां फुलटाइम प्रोफेसर बन गए. प्रिंसटन में रहते हुए भी भार्गव भारत के साथ मजबूत संबंध बनाए रखते हैं. वे टाटा इंस्टीट्यूट ऑफ फंडामेंटल रिसर्च, आईआईटी बॉम्बे और हैदराबाद यूनिवर्सिटी में सहायक पदों पर कार्यरत हैं.
8.2015 में पद्म भूषण से हुए सम्मानित

साल 2015 में मंजुल को भारत के तीसरे सर्वोच्च नागरिक पुरस्कार पद्म भूषण से सम्मानित किया गया. मंजुल भार्गव का जीवन एक सबक है कि शिक्षा सिर्फ प्रतिष्ठा का नाम नहीं है बल्कि यह जुनून का नाम है. हार्वर्ड के लेक्चर हॉल से लेकर प्रिंसटन की रिसर्च लैब तक उन्हें आगे बढ़ाने वाली चीज़ सिर्फ़ बुद्धिमत्ता नहीं बल्कि अन्वेषण का आनंद था.
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