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डॉक्टर बनने का सपना देखते थे राजेश मेहता, फिर कैसे खड़ा कर दिया बिलियन डॉलर का ज्वेलरी बिजनेस? जानें कहां तक की है पढ़ाई-लिखाई

राजेश मेहता ने जब बचपन से डॉक्टर बनने का सपना देखा था तो फिर कैसे वह ज्वेलरी इंडस्ट्री के बड़े कारोबारी बन गए. जानें उनका एजुकेशनल बैकग्राउंड और कैसे उनकी फैमिली ने ज्योतिषी की बात मानकर उनके नाम पर रखा कंपनी का नाम...

Jaya Pandey | Jun 04, 2026, 06:09 PM IST

1.चर्चा में क्यों हैं कारोबारी राजेश मेहता?

चर्चा में क्यों हैं कारोबारी राजेश मेहता?
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ज्वेलरी उद्योग के दिग्गज कारोबारी और राजेश एक्सपोर्ट्स लिमिटेड के चेयरमैन और मेनेजिंग डायरेक्टर राजेश मेहता इन दिनों चर्चा में हैं. SEBI ने उनकी कंपनी और उनके खिलाफ एक अंतरिम आदेश जारी किया है. सेबी ने जांच में पाया कि राजेश एक्सपोर्ट्स लिमिटेड ने 2021 से 2025 के वित्त वर्ष के बीच लगभग 15.15 लाख करोड़ रुपये के कंसोलिडेटेड रेवेन्यू के बारे में गलत जानकारी दी है. मार्केट रेगुलेटरी की जांच जारी है. ऐसे में लोग ज्यादा से ज्यादा राजेश मेहता के बारे में जानना चाहते हैं. 
(Image Credit: Social Media)

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2.बचपन में डॉक्टर बनना चाहते थे राजेश

बचपन में डॉक्टर बनना चाहते थे राजेश
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20 जून 1964 को बेंगलुरु में जन्मे राजेश मेहता का शुरुआती सपना डॉक्टर बनने का था. वह स्कूल-कॉलेज में एक अच्छे स्टूडेंट माने जाते थे और उनका परिवार भी चाहता था कि वे मेडिकल फील्ड में करियर बनाएं लेकिन किस्मत को कुछ और ही मंजूर थी. समय के साथ उन्होंने अलग राह चुनी और परिवार के बिजनेस से जुड़कर ज्वेलरी इंडस्ट्री में अपनी पहचान बनाने का फैसला लिया. 
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3.राजेश मेहता का एजुकेशनल बैकग्राउंड

राजेश मेहता का एजुकेशनल बैकग्राउंड
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राजेश मेहता ने बेंगलुरु के सेंट जोसेफ स्कूल से अपनी स्कूली शिक्षा पूरी की. इसके बाद उन्होंने बेंगलुरु के नेशनल कॉलेज में दाखिला लिया और यहां से आगे की पढ़ाई की. वह पढ़ाई में तेज छात्र थे और अपने फ्यूचर को लेकर काफी फोकस थे. हालांकि, इस समय तक उनका सपना बदल चुका था और मेडिकल की पढ़ाई की राह चुनने के बजाय उन्होंने कारोबार की दुनिया में कदम रखा.
(Image Credit: Social Media) 

4.राजेश मेहता का फैमिली बैकग्राउंड

राजेश मेहता का फैमिली बैकग्राउंड
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राजेश मेहता का पालन-पोषण बेंगलुरु के एक जैन परिवार में हुआ. वह चार भाइयों में तीसरे नंबर पर हैं. उनके परिवार की जड़ें गुजरात के राजकोट से जुड़ी हैं. फोर्ब्स इंडिया की रिपोर्ट के मुताबिक, उनके माता-पिता 1946-47 में बेहतर मौके की तलाश में बेंगलुरु आकर बस गए थे. उनके पिता जसवंतराय मेहता ने शुरुआत में अपने कजिन के कीमती पत्थरों के कारोबार में उनकी मदद करते थे. बाद में उन्होंने लगभग 25 साल बाद राजेश डायमंड कंपनी नाम से अपना खुद का बिजनेस शुरू किया. 
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5.कैसे उनके नाम पर रखी गई परिवार की कंपनी?

कैसे उनके नाम पर रखी गई परिवार की कंपनी?
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जसवंतराय मेहता को एक ज्योतिषी ने बताया था कि राजेश एक दिन परिवार के लिए लकी साबित होंगे और भविष्य में कारोबार को नई ऊंचाइयों को पहुंचाएंगे. बाद में यह बात सच साबित हुई और राजेश मेहता ने भारत की ज्वेलरी उद्योग में एक बड़ी पहचान बनाई. राजेश एक्सपोर्ट्स के नेतृत्व में कंपनी ने सोने और आभूषण कारोबार में विस्तार किया. कंपनी ने इंटरनेशनल मार्केट में भी अपनी मौजूदगी दर्ज की और राजेश मेहता ने परिवार के बिजनेस को एक बड़े कॉरपोरेट लेवल तक पहुंचाने में अहम भूमिका निभाई.
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