एजुकेशन
Jaya Pandey | Nov 28, 2025, 11:34 AM IST
1.धर्मेंद्र की 'प्रतिज्ञा' ने इस शख्स को बनाया पुलिस अधिकारी

सदाबहार सितारे धर्मेंद्र के निधन से भारतीय सिनेमा ने अपने दिग्गज को खो दिया है. उनकी फिल्में तो अमर हैं ही, साथ ही उनका विशाल व्यक्तित्व आज भी पीढ़ियों को प्रेरित करता है. आज हम आपको उस पुलिस अधिकारी से मिलवाने जा रहे हैं जिन्हें आईपीएस बनाने में धर्मेंद्र की 1975 की ब्लॉकबस्टर फिल्म प्रतिज्ञा की काफी भूमिका रही है.
2.आईपीएस विश्वजीत श्रीवास्तव की पढ़ाई-लिखाई

11 फरवरी 1969 को उत्तर प्रदेश के फैजाबाद में जन्मे आईपीएस विश्वजीत श्रीवास्तव बचपन से ही बड़े सपने देखते थे. उन्होंने बीएससी और एलएलबी की पढ़ाई की और इस दौरान उनमें न्याय और सेवा की भावना का विकास हुआ. उनके दृढ़ संकल्प ने उन्हें सिविल सेवा परीक्षा में सफलता दिलाई और 1996 में वह प्रांतीय पुलिस सेवा (पीपीएस) और फिर 2017 में भारतीय पुलिस सेवा (आईपीएस) में शामिल हुए.
3.सेवाओं के लिए मिल चुके हैं कई अवॉर्ड

अपने करियर में उन्होंने यूपी पुलिस के कई बड़े पदों पर काम किया है और वर्तमान में लखनऊ पुलिस कमिश्नरेट में डीसीपी पश्चिम के पद पर कार्यरत हैं. उन्हें अपनी सेवाओं के लिए कई पुरस्कार भी मिल चुके हैं जिनमें डीजी कमेंडेशन डिस्क सिल्वर, डीजी कमेंडेशन डिस्क गोल्ड और राष्ट्रपति पदक शामिल हैं.
4.कैसे धर्मेंद्र की 'प्रतिज्ञा' ने बदल दी जिंदगी?

उत्तर प्रदेश में पले-बढ़े विश्वजीत धर्मेंद्र के परदे पर दिखने वाले बहादुरी, करुणा, हास्य और साहस जैसे व्यक्तित्व से काफी प्रभावित थे. लेकिन प्रतिज्ञा ने ही उनके जीवन और कर्तव्य के प्रति दृष्टिकोण को सही मायने में आकार दिया. फैजाबाद के पुष्पराज सिनेमा हॉल में फिल्म देखते हुए युवा विश्वजीत ने न केवल एक नायक को बल्कि साहस और निष्ठा की एक मिसाल को भी परदे पर देखा.
5.जब धर्मेंद्र से मिलने का मिला मौका

आईपीएस विश्वजीत को अपने सपने के हीरो से एक बार मिलने का भी मौका मिला. 87 साल की उम्र में धर्मेंद्र अपनी फिल्म इक्कीस की शूटिंग के लिए लखनऊ आए तो विश्वजीत उस समय लखनऊ के एक वरिष्ठ अधिकारी थे और उन्हें धर्मेंद्र की शूटिंग के लिए प्रोटोकॉल अधिकारी नियुक्त किया गया था.
6.धर्मेंद्र से मिलकर कैसा हुआ महसूस?

धर्मेंद्र की वैनिटी वैन में कदम रखते ही विश्वजीत को लगा जैसे समय रुक गया हो. उन्होंने इंटरव्यू में बताया कि यह कोई संयोग नहीं था बल्कि जिंदगी का एक चक्र पूरा हो गया था. एक्टर ने भी उनका गर्मजोशी से स्वागत किया और यह बातचीत विश्वजीत के जीवन की कभी न भूल सकने वाली स्मृति बन गई.
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