एजुकेशन
Jaya Pandey | Jul 06, 2026, 01:09 PM IST
1.इंडोनेशिया के दौरे पर हैं पीएम नरेंद्र मोदी

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 6 से 8 जुलाई 2026 तक इंडोनेशिया के आधिकारिक दौरे पर हैं. इस वजह से दक्षिण-पूर्व एशिया का यह द्वीपीय देश काफी चर्चा में है. ऐसे में लोग इंडोनेशिया के भूगोल, इतिहास और उससे जुड़े रोचक तथ्यों के बारे में जानना चाहते हैं. आज हम आपको इंडोनेशिया की सबसे लंबी नदी और उससे जुड़ी खास बातों के बारे में बता रहे हैं.
(All Image: Wikimedia Commons)
2.इंडोनेशिया की सबसे लंबी नदी

इंडोनेशिया की सबसे लंबी नदी कापुआस है. इसकी कुल लंबाई लगभग 1,143 किलोमीटर है. यह नदी बोर्नियो द्वीप के इंडोनेशियाई हिस्से पश्चिम कालीमंतन प्रांत में बहती है. इसका उद्गम मुलर पर्वतमाला से होता है और यह पश्चिम दिशा में बहते हुए दक्षिण चीन सागर में जाकर मिल जाती है. कापुआस के पास दुनिया की सबसे लंबी द्वीपीय नदी होने का भी खिताब है क्योंकि इस नदी का पूरा प्रवाह एक ही द्वीप के अंदर रहता है.
3.कापुआस नदी किन वजहों से है मशहूर?

कापुआस नदी सिर्फ अपनी लंबाई के लिए ही नहीं बल्कि अपनी समृद्ध जैव विविधता और आर्थिक महत्व के लिए भी जानी जाती है. इसकी विशाल नदी घाटी में सैकड़ों प्रजातियों की मछलियां पाई जाती हैं, जिनमें कई दुर्लभ और स्थानीय प्रजातियां शामिल हैं. यह क्षेत्र प्रोबोस्किस बंदर, हॉर्नबिल जैसे पक्षियों और कई दूसरे वन्यजीवों का भी महत्वपूर्ण आवास है. इस वजह से इसकी तुलना कई बार दुनिया की दूसरी समृद्ध नदी घाटियों से भी की जाती है.
4.भूमध्य रेखा के इस शहर से गुजरती है यह नदी

यह नदी भूमध्य रेखा पर मौजूद पोंटियानक शहर के पास से भी गुजरती है. ऐसे में हर साल यहां खास आयोजन किए जाते हैं जो पर्यटकों को आकर्षित करते हैं. यह नदी लगभग 465 किलोमीटर तक बड़े मालवाहक जहाजों के लिए नौगम्य है. इसके जरिए लकड़ी, कृषि उत्पाद, मछली और दूसरे सामानों की आवाजाही होती है. कापुआस नदी पश्चिम कालीमंतन की अर्थव्यवस्था, व्यापार और स्थानीय लोगों के जीवन का आधार है.
5.इस नदी में पाई जाती है यह दुर्लभ मछली

यह नदी दुर्लभ और बेहद लोकप्रिय एशियाई एरोवाना मछली की 'सुपर रेड' किस्म के लिए भी मशहूर है. यह प्रजाति मुख्य रूप से कापुआस नदी बेसिन में ही पाई जाती है और इंटरनेशनल लेवल पर भी इसकी काफी मांग रहती है. यह मछली संकटग्रस्त प्रजातियों में शामिल है इसलिए इसे संरक्षित किया गया है और इसका व्यापार बेहद सख्त नियमों के तहत किया जाता है.
6.कालीमंतन के लोगों की है जीवनरेखा

कापुआस नदी पश्चिम कालीमंतन के लाखों लोगों के लिए जीवनरेखा का काम करती है. दयाक और मलय समुदायों सहित यहां की कई स्थानीय आबादियां आज भी परिवहन, व्यापार और दैनिक जरूरतों के लिए इस नदी पर निर्भर हैं. कई गांवों तक सड़क की बजाय नाव से पहुंचना अधिक आसान है. नदी के किनारे बसे कस्बों और गांवों में पारंपरिक नावें आज भी लोगों की आवाजाही और सामान ढोने का प्रमुख साधन हैं. यह इलाका घटा है इसलिए कुछ समुदायों ने इस पर तैरते हुए मार्केट बनाए हैं.