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भारत का वो सबसे खतरनाक जासूस, जो पाकिस्तान की सेना में बन गया था मेजर, इंदिरा गांधी ने दिया था ये खास नाम

कुछ जासूस देशभक्ति की ऐसी मिसाल पेश कर जाते हैं, जिनकी कहानियां इतिहास के पन्नों में अमर हो जाती हैं. खतरे, यातना और मौत किसी भी चीज का डर उन्हें रोक नहीं पाता. भारत के ऐसे ही एक जांबाज़ जासूस थे रवीन्द्र कौशिक, जिन्हें उनकी बहादुरी के चलते इंदिरा गांधी ने ‘ब्लैक टाइगर’ का नाम दिया था.

राजा राम | Dec 08, 2025, 10:39 PM IST

1.आज भी लाखों लोगों के दिलों में गर्व भर देती है

आज भी लाखों लोगों के दिलों में गर्व भर देती है
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देश के लिए जान तक न्योछावर कर देने वाले रवीन्द्र कौशिक भारतीय खुफिया इतिहास के सबसे साहसी जासूसों में गिने जाते हैं. उनकी कहानी आज भी लाखों लोगों के दिलों में गर्व भर देती है.
 

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2.जिंदगी का रास्ता बदल गया

जिंदगी का रास्ता बदल गया
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राजस्थान में जन्मे कौशिक बचपन से ही अभिनय में निपुण थे. एक राष्ट्रीय नाट्य कार्यक्रम के दौरान RAW अधिकारियों की नजर उन पर पड़ी और यहीं से उनकी जिंदगी का रास्ता बदल गया. 
 

3.पाकिस्तानी संस्कृति की गहरी जानकारी सिखाई गई

पाकिस्तानी संस्कृति की गहरी जानकारी सिखाई गई
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रॉ ने कौशिक को दो साल तक विशेष ट्रेनिंग दी. उन्हें उर्दू-अरबी भाषा, मुस्लिम रीति-रिवाज और पाकिस्तानी संस्कृति की गहरी जानकारी सिखाई गई, ताकि वो आसानी से दुश्मन देश में घुल-मिल सकें. 

4.नई पहचान के साथ पाकिस्तान पहुंचे

नई पहचान के साथ पाकिस्तान पहुंचे
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साल 1978 में वह नई पहचान के साथ पाकिस्तान पहुंचे. कराची में सेना भर्ती का विज्ञापन देखकर उन्होंने पाकिस्तानी सेना में शामिल होने का जोखिम भरा फैसला किया. 
 

5.पाक सेना में मेजर के पद तक पहुंच गए

पाक सेना में मेजर के पद तक पहुंच गए
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अपनी काबिलियत और सूझबूझ के दम पर कौशिक पाक सेना में मेजर के पद तक पहुंच गए. इस दौरान उन्होंने भारत को कई अहम जानकारियां भेजीं, जिनसे देश की सुरक्षा को बड़ा लाभ मिला. 

6.शादी भी की और एक बेटे के पिता बने

शादी भी की और एक बेटे के पिता बने
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पाकिस्तान में रहते हुए उन्होंने शादी भी की और एक बेटे के पिता बने, लेकिन देश के प्रति उनका समर्पण कभी कमजोर नहीं पड़ा. उनकी बहादुरी के चलते इंदिरा गांधी ने ‘ब्लैक टाइगर’ का नाम दिया था.

7.2001 में उनकी मौत जेल में ही हो गई

2001 में उनकी मौत जेल में ही हो गई
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साल 1983 में उनकी पहचान उजागर हुई और पाकिस्तान ने उन्हें गिरफ्तार कर लिया. वर्षों तक उन्हें अमानवीय यातनाएं दी गईं, लेकिन उन्होंने भारत का नाम उजागर नहीं होने दिया. लंबे अत्याचार, बीमारी और तन्हाई झेलने के बाद 2001 में उनकी मौत जेल में ही हो गई. दुखद बात यह रही कि मौत के बाद भी वह अपने देश की मिट्टी को नहीं छू पाए. 

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