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छूटा क्रिकेट का सपना, कुछ कर गुजरने की जिद में बने IAS... अब बाढ़ में किताबें गंवाने वाली बच्ची की मदद कर जीता दिल

आज हम आपको बताएंगे कि दिलीप प्रताप सिंह शेखावत की एजुकेशनल बैकग्राउंड क्या रही है और उन्होंने यूपीएससी सिविल सेवा परीक्षा पास करके आईएएस बनने तक का सफर कैसे तय किया.

Jaya Pandey | Aug 21, 2026, 07:40 PM IST

1.बाढ़ में बच्ची की बह गई किताबें तो डीसी दिलीप प्रताप सिंह शेखावत की मदद ने जीता दिल

बाढ़ में बच्ची की बह गई किताबें तो डीसी दिलीप प्रताप सिंह शेखावत की मदद ने जीता दिल
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झारखंड के पलामू जिले के डीसी दिलीप प्रताप सिंह शेखावत इन दिनों बाढ़ में फंसी एक छोटी बच्ची कृतिका की मदद करने की वजह से खूब चर्चा में हैं. बाढ़ के दौरान उस बच्ची की किताबें और सामान बह गया था, जिसके बाद डीसी साहब ने खुद आगे बढ़कर उसकी मदद की. उनके इस दयालु और संवेदनशील व्यवहार की लोग जमकर तारीफ कर रहे हैं. आज हम आपको बताएंगे कि दिलीप प्रताप सिंह शेखावत की एजुकेशनल बैकग्राउंड क्या रही है और उन्होंने यूपीएससी सिविल सेवा परीक्षा पास करके आईएएस बनने तक का सफर कैसे तय किया.

(Image Credit: Instagram @Dilip Pratap Singh Shekhawat)

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2.बचपन में क्रिकेटर बनने का था सपना

बचपन में क्रिकेटर बनने का था सपना
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राजस्थान के जोधपुर के रहने वाले दिलीप प्रताप सिंह शेखावत का बचपन क्रिकेट के इर्द-गिर्द बीता. उन्हें क्रिकेट खेलना बेहद पसंद था और बचपन में उनका सपना भारतीय क्रिकेट टीम के लिए खेलना था. जोधपुर की गलियों में क्रिकेट खेलने वाले दिलीप पढ़ाई में भी ठीक थे, लेकिन उस समय उन्होंने यह नहीं सोचा था कि आगे चलकर सिविल सेवा में जाएंगे. क्रिकेट को लेकर उनके जुनून को उनके कोच ने भी पहचाना. समय के साथ परिस्थितियां बदलीं और परिवार की प्राथमिकताओं के कारण उन्हें क्रिकेट से अपना ध्यान हटाकर पढ़ाई पर फोकस करना पड़ा.

3.कितने एजुकेटेड हैं आईएएस दिलीप प्रताप सिंह शेखावत?

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इसके बाद दिलीप ने इंजीनियरिंग की राह चुनी. उन्होंने ओडिशा के NIT राउरकेला से केमिकल इंजीनियरिंग में बीटेक की डिग्री हासिल की. कॉलेज के दौरान ही उनके भीतर समाज और देश के लिए कुछ करने की इच्छा मजबूत हुई. ग्रेजुएशन पूरा करने के बाद उन्होंने यूपीएससी सिविल सेवा परीक्षा की तैयारी शुरू कर दी और अपने लक्ष्य को हासिल करने के लिए पूरी तरह जुट गए.

4.यूपीएससी का सफर नहीं रहा आसान, तीसरे प्रयास में मिली सफलता

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यूपीएससी का सफर हालांकि उनके लिए आसान नहीं रहा. दिलीप को सफलता तीसरे प्रयास में मिली. पहली कोशिश में वे प्रीलिम्स परीक्षा में बेहद मामूली अंतर से चूक गए. इसके बाद उन्होंने अपनी तैयारी को और बेहतर किया. दूसरी कोशिश में उन्होंने प्रीलिम्स और मेन्स दोनों परीक्षाएं पास कर लीं, लेकिन इंटरव्यू के बाद अंतिम चयन सूची में जगह नहीं बना सके. सफलता के बेहद करीब पहुंचकर मिली इस असफलता ने उन्हें निराश जरूर किया, लेकिन उन्होंने हार मानने के बजाय अपनी गलतियों को समझा और तीसरी कोशिश के लिए नए आत्मविश्वास के साथ तैयारी शुरू की.

5.यूपीएससी में 72वीं रैंक हासिल कर रचा था इतिहास

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अपने दो प्रयासों में तो वह विफल रहे लेकिन तीसरे प्रयास में उनकी मेहनत रंग लाई. यूपीएससी की साल 2018 की सिविल सेवा परीक्षा में उन्होंने ऑल इंडिया 72वीं रैंक हासिल की. उन्हें भारतीय प्रशासनिक सेवा मिली. इस तरह एक ऐसा युवा, जो कभी क्रिकेट के मैदान पर देश के लिए खेलने का सपना देखता था, अपनी मेहनत और लगातार प्रयासों के दम पर आईएएस अधिकारी बन गया.
 

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