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भारत में SC-ST और OBC से कितने IAS-IPS और IFS अफसर हैं? सरकार ने संसद में रखा पूरा आंकड़ा

देश की शीर्ष सिविल सेवाओं में पिछले पांच वर्षों के दौरान आरक्षित वर्गों की भागीदारी को लेकर सरकार ने संसद में आंकड़े पेश किए हैं. आंकड़े बताते हैं कि चयन की प्रक्रिया में सामाजिक प्रतिनिधित्व बढ़ा है, लेकिन दूसरी ओर पदों में कमी और बड़ी संख्या में खाली सीटें चिंता का विषय हैं. 

राजा राम | Feb 13, 2026, 11:18 AM IST

1.केंद्र सरकार की ओर से लिखित जवाब में दी गई

केंद्र सरकार की ओर से लिखित जवाब में दी गई
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संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) की सिविल सेवा परीक्षा 2020 से 2024 के बीच भारतीय प्रशासनिक सेवा, भारतीय पुलिस सेवा और भारतीय वन सेवा में आरक्षित वर्गों से बड़ी संख्या में अभ्यर्थियों का चयन हुआ. यह जानकारी राज्यसभा में केंद्र सरकार की ओर से लिखित जवाब में दी गई. 

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2.भारतीय प्रशासनिक सेवा

भारतीय प्रशासनिक सेवा
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आंकड़ों के अनुसार, भारतीय प्रशासनिक सेवा (IAS) में ओबीसी वर्ग से 245, अनुसूचित जाति से 135 और अनुसूचित जनजाति से 67 उम्मीदवारों को नियुक्ति मिली.
 

3.भारतीय पुलिस सेवा

भारतीय पुलिस सेवा
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वहीं भारतीय पुलिस सेवा (IPS) में ओबीसी के 255, अनुसूचित जाति के 141 और अनुसूचित जनजाति के 71 अभ्यर्थियों को सेवा आवंटित की गई. 
 

4.भारतीय वन सेवा

भारतीय वन सेवा
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भारतीय वन सेवा (IFS) में ओबीसी वर्ग से 231, अनुसूचित जाति से 95 और अनुसूचित जनजाति से 48 उम्मीदवारों का चयन हुआ. तीनों सेवाओं को मिलाकर देखें तो ओबीसी से 731, अनुसूचित जाति से 371 और अनुसूचित जनजाति से 186 उम्मीदवारों को अवसर मिला है. 

5.सामाजिक प्रतिनिधित्व के लिहाज से महत्वपूर्ण

सामाजिक प्रतिनिधित्व के लिहाज से महत्वपूर्ण
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इन आंकड़ों से स्पष्ट होता है कि विशेष रूप से पुलिस सेवा में आरक्षित वर्गों की भागीदारी अपेक्षाकृत ज्यादा रही है. इसे सामाजिक प्रतिनिधित्व के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है. 
 

6.भर्ती के कुल पदों में लगातार कमी

भर्ती के कुल पदों में लगातार कमी
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हालांकि, भर्ती के कुल पदों में लगातार कमी देखने को मिल रही है. वर्ष 2024 में 1,056 पदों पर भर्ती निकली थी, जो 2025 में घटकर 979 और 2026 में 933 रह गई. यह गिरावट प्रशासनिक जरूरतों को लेकर सवाल खड़े करती है. 
 

7.1 जनवरी 2025 तक की स्थिति

1 जनवरी 2025 तक की स्थिति
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1 जनवरी 2025 तक की स्थिति के अनुसार, प्रशासनिक सेवा में 6,877 स्वीकृत पदों के मुकाबले 1,300 पद खाली हैं. पुलिस सेवा में 5,099 स्वीकृत पदों में से 505 पद रिक्त हैं. सबसे अधिक कमी वन सेवा में है, जहां 3,193 स्वीकृत पदों में से 1,029 पद खाली पड़े हैं. विशेषज्ञों का मानना है कि एक ओर आरक्षण व्यवस्था के तहत विभिन्न वर्गों की भागीदारी सुनिश्चित हो रही है, वहीं दूसरी ओर घटती भर्तियां और बढ़ती रिक्तियां शासन-प्रशासन की कार्यक्षमता पर असर डाल सकती हैं. आने वाले समय में सरकार के सामने इन दोनों पहलुओं में संतुलन बनाना बड़ी जिम्मेदारी होगी.

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