एजुकेशन
जया पाण्डेय | Jan 14, 2026, 12:49 PM IST
1.कौन थे होशियार सिंह दहिया?

वरुण धवन फिल्म 'बॉर्डर 2' में परमवीर चक्र विजेता होशियार सिंह दहिया की वीरता को पर्दे पर उतारने जा रहे हैं. इसके बाद से लोगों में यह जानने की उत्सुकता बढ़ गई है कि आखिर यह महान सैनिक कौन थे, कितने पढ़े-लिखे थे और भारतीय सेना में उनका सफर कैसा रहा. आइए जानते हैं उनकी प्रेरक जीवनगाथा.
2.साधारण किसान परिवार से आते थे होशियार सिंह दहिया

परमवीर चक्र विजेता होशियार सिंह दहिया का जन्म हरियाणा के सोनीपत जिले के एक छोटे से गांव में हुआ था. वह एक साधारण किसान परिवार से आते थे. सीमित संसाधनों के बावजूद उन्होंने अनुशासन, मेहनत और देशभक्ति के बल पर भारतीय सेना में एक विशेष स्थान हासिल किया. उनका जीवन इस बात का उदाहरण है कि साधारण पृष्ठभूमि से निकलकर भी असाधारण इतिहास रचा जा सकता है.
3.1971 के भारत-पाकिस्तान युद्ध में यूं दिया था बहादुरी का परिचय

1971 के भारत-पाकिस्तान युद्ध के दौरान उन्होंने अपनी बटालियन का नेतृत्व करते हुए शकड़गढ़ सेक्टर में दुश्मन की एक महत्वपूर्ण चौकी पर कब्जा किया. इस दौरान पाकिस्तानी सेना की ओर से भीषण गोलीबारी हो रही थी. गंभीर रूप से घायल होने के बावजूद उन्होंने युद्ध क्षेत्र को छोड़ने से इनकार कर दिया और अपने सैनिकों के साथ मोर्चे पर डटे रहे.
4.भारतीय सैन्य इतिहास में स्वर्ण अक्षरों में दर्ज है नाम

उनके अदम्य साहस, निडर नेतृत्व और बलिदान की भावना ने युद्ध की दिशा बदलने में अहम भूमिका निभाई. इन्हीं असाधारण वीरतापूर्ण कार्यों के लिए उन्हें भारत के सर्वोच्च युद्धकालीन सम्मान परमवीर चक्र से सम्मानित किया गया. उनका नाम भारतीय सैन्य इतिहास में स्वर्ण अक्षरों में दर्ज है.
5.कितने पढ़े-लिखे थे होशियार सिंह दहिया?

जहां तक उनकी शिक्षा की बात है, होशियार सिंह दहिया ने अपनी स्कूली शिक्षा हरियाणा में पूरी की. इसके बाद उन्होंने रोहतक के जाट कॉलेज से आगे की पढ़ाई शुरू की और वहां बी.ए. प्रथम वर्ष तक अध्ययन किया. पढ़ाई के दौरान ही उनका रुझान सेना की ओर था और उन्होंने देश सेवा को अपना लक्ष्य बना लिया.
6.होशियार सिंह दहिया का इंडियन आर्मी में सफर

उन्हें 30 जून 1963 को भारतीय सेना की ग्रेनेडियर्स रेजिमेंट में कमीशन मिला. इसके बाद 30 जून 1965 को उन्हें लेफ्टिनेंट के पद पर पदोन्नत किया गया. उनकी सैन्य क्षमता और नेतृत्व कौशल के चलते वह लगातार महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां संभालते रहे. 30 जून 1976 को उन्हें स्थायी रूप से मेजर के पद पर पदोन्नत किया गया. इसके बाद उन्होंने मद्रास ऑफिसर्स ट्रेनिंग स्कूल में लगभग दो साल तक प्रशिक्षक के रूप में सेवाएं दीं. साल 1981 में उन्हें देहरादून स्थित भारतीय सैन्य अकादमी में प्रशिक्षक नियुक्त किया गया. 8 अप्रैल 1983 को उन्हें लेफ्टिनेंट कर्नल के पद पर पदोन्नत किया गया.
7.आखिरी समय तक युवाओं को भारतीय सशस्त्र बल में शामिल होने के लिए किया प्रेरित

आगे चलकर वह अपनी बटालियन के कमांडिंग ऑफिसर बने. आर्मी से रिटायरमेंट के समय उन्हें कर्नल का मानद पद प्रदान किया गया. रिटायरमेंट के बाद भी वह युवाओं को भारतीय सशस्त्र बलों में शामिल होने के लिए प्रेरित करते रहे. परमवीर चक्र विजेता होशियार सिंह दहिया का दिसंबर 1998 में 61 वर्ष की आयु में हृदयाघात के कारण निधन हो गया. हालांकि वह आज हमारे बीच नहीं हैं, लेकिन उनका साहस, नेतृत्व और देशभक्ति आने वाली पीढ़ियों को हमेशा प्रेरित करता रहेगा.
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