एजुकेशन
Jaya Pandey | Sep 04, 2025, 02:44 PM IST
1.मंजू शर्मा ने दिया आरपीएससी से इस्तीफा

कवि और आप के पूर्व नेता कुमार विश्वास की पत्नी मंजू शर्मा ने 2021 सब-इंस्पेक्टर (एसआई) भर्ती पेपर लीक मामले में कड़ी न्यायिक टिप्पणियों के बाद अपने पद से इस्तीफा दे दिया है. उनके इस्तीफे के फैसले से वह चर्चा में आ गई हैं और लोग उनकी पढ़ाई-लिखाई और पेशेवर सफर के बारे में जानना चाहते हैं.
2.कौन हैं मंजू शर्मा?

मंजू शर्मा पीएचडी स्कॉलर और पेशे से प्रोफेसर हैं. उनकी एकेडमिक एक्सीलेंस ने उन्हें राजस्थान के सबसे प्रभावशाली संवैधानिक निकायों में से एक राजस्थान पब्लिक सर्विस तक पहुंचाया. मंजू ने भूगोल से एमए और पीएचडी की डिग्री हासिल की है.
3.इस कॉलेज में असोसिएट प्रोफेसर थीं मंजू शर्मा

मंजू शर्मा भरतपुर के एमएसजे पोस्टग्रेजुएट कॉलेज में एसोसिएट प्रोफेसर के रूप में कार्यरत थीं. यहां उन्होंने टीचिंग के साथ-साथ अकादमिक मार्गदर्शन भी किया. कई साल तक उन्होंने स्टूडेंट्स को भूगोल के समाज, अर्थव्यवस्था और पर्यावरण के साथ अंतर्संबंधों के बारे में पढ़ाया.
4.2020 में आरपीएससी की सदस्य बनीं मंजू शर्मा

अक्टूबर 2020 में मंजू शर्मा आरपीएससी के सदस्य के तौर पर जुड़ीं. कांग्रेस सरकार के कार्यकाल में हुई यह नियुक्ति उनके करियर में एक महत्वपूर्ण बदलाव साबित हुई. उनकी शैक्षणिक योग्यता और लंबे शिक्षण अनुभव ने उन्हें महत्वपूर्ण राज्य सेवाओं में भर्ती की निगरानी करने वाली संस्था के सदस्य के रूप में विश्वसनीयता प्रदान की.
5.मंजू की नियुक्ति पर उठे थे सवाल

हालांकि उनकी नियुक्ति राजनीतिक बहस से अछूती नहीं रही. आप के संस्थापक सदस्य और कांग्रेस नेतृत्व के मुखर आलोचक कुमार विश्वास की पत्नी होने की वजह से उनकी नियुक्ति को काफी आलोचना का सामना करना पड़ा. इसके बावजूद मंजू शर्मा का कार्यकाल इस उम्मीद के साथ शुरू हुआ कि उनकी शैक्षणिक पृष्ठभूमि आयोग की कार्यवाही में निष्पक्षता और तत्परता लाएगी.
6.2026 तक चलता कार्यकाल

मंजू शर्मा का आरपीएससी में छह साल का कार्यकाल अक्टूबर 2026 तक चलने वाला था. लेकिन राजस्थान हाई कोर्ट के आरपीएससी के आचरण को "जनता के विश्वास के साथ विश्वासघात" बताते हुए 2021 सब-इंस्पेक्टर भर्ती प्रक्रिया को रद्द करने के बाद उन्होंने अपने पद से इस्तीफा दे दिया.
7.मंजू शर्मा ने क्यों दिया इस्तीफा?

मंजू शर्मा ने अपने त्यागपत्र में कहा कि उन्होंने हमेशा अत्यंत पारदर्शिता और ईमानदारी के साथ काम किया है और किसी भी जांच में उन्हें आरोपी नहीं बनाया गया है. उन्होंने यह भी स्वीकार किया कि इस विवाद ने उनकी और आयोग की प्रतिष्ठा को ठेस पहुंचाई है. उन्होंने निष्पक्षता और विश्वसनीयता बनाए रखने के लिए पद छोड़ने का फैसला किया.
8.राजनीति से परे सबक

मंजू शर्मा के जाने से शिक्षा, प्रशासन और संस्थागत विश्वास के बीच के संबंध पर नए सिरे से ध्यान केंद्रित हुआ है. भूगोल में पीएचडी से लेकर फैकल्टी और फिर आरपीएससी तक उनका शैक्षणिक सफर दर्शाता है कि कैसे आपकी शैक्षणिक योग्यता, प्रशासनिक ज़िम्मेदारी में तब्दील हो सकती है.
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