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कितने पढ़े-लिखे हैं रूस में भारतीय मूल के विधायक अभय सिंह? भारत से खास अपील कर फिर से चर्चा में आए

पुतिन की भारत यात्रा से पहले रूस के भारतीय मूल के विधायक अभय सिंह भारत से खास अपील करके चर्चा में आ गए हैं. जानें अभय सिंह कितने पढ़े-लिखे हैं और कैसे उन्होंने राजनीति का सफर तय किया?

जया पाण्डेय | Dec 04, 2025, 12:27 PM IST

1.कौन हैं रूस के विधायक अभय सिंह?

कौन हैं रूस के विधायक अभय सिंह?
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रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन की भारत यात्रा से पहले रूस के भारतीय मूल के विधायक अभय सिंह भारत से खास अपील करके चर्चा में आ गए हैं. उन्होंने भारत से एस-500 डिफेंस सिस्टम के लिए जोर देने की पेशकश की है.

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2.बिहारी हैं रूस के विधायक अभय सिंह

बिहारी हैं रूस के विधायक अभय सिंह
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आज हम आपको बताएंगे कि बिहार में जन्मे और रूस के विधायक बने अभय सिंह कितने पढ़े-लिखे हैं और कैसे उन्होंने राजनीति का सफर तय किया?

3.कितने पढ़े-लिखे हैं अभय सिंह?

कितने पढ़े-लिखे हैं अभय सिंह?
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अभय सिंह की शुरुआती पढ़ाई पटना के लोयोला हाई स्कूल से हुई है. इसके बाद उन्होंने मेडिकल में करियर बनाने का सोचा और एमबीबीएस की पढ़ाई के लिए रूस चले गए. यहां उन्होंने कुर्स्क स्टेट मेडिकल यूनिवर्सिटी से मेडिकल की पढ़ाई की. हालांकि इसके बाद वह अपनी मेडिकल की प्रैक्टिस के लिए पटना तो लौटे लेकिन उनका मन रूस में ही रम गया था.

4.कैसे राजनीति में आए अभय सिंह?

कैसे राजनीति में आए अभय सिंह?
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इसके बाद वह वापस कुर्स्क लौट गए और वहां फार्मा बिजनेस में हाथ आजमाया. वह यहीं नहीं रुके और रियल एस्टेट में भी अपनी किस्मत आजमाई. इसके बाद उन्होंने राजनीति में उतरने का मन बना लिया. उन्होंने कुर्स्क से दो बार 2017 और 2022 में चुनाव जीता और पहली बार कोई भारतीय मूल का शख्स यहां से विधायक बना.

5.रूस में पढ़ाई के दौरान आईं कई दिक्कतें

रूस में पढ़ाई के दौरान आईं कई दिक्कतें
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हालांकि अभय के लिए रूस में दिक्कतें कम आईं. मेडिकल की पढ़ाई के दौरान यहां की सर्दी ने उन्हें काफी परेशान किया और कई बार तो उन्होंने वापस पटना लौटने का भी मन बना लिया था. लेकिन उनकी एलेना नाम की एक डीन ने उनकी काफी मदद की और वहां उन्हें घर जैसा महसूस होने लगा.

6.राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन तगड़े समर्थक हैं अभय सिंह

राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन तगड़े समर्थक हैं अभय सिंह
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अभय सिंह को राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन का कट्टर समर्थक माना जाता है. एक इंटरव्यू में उन्होंने उस समय को याद किया जब रूस में चीजें खरीदने के लिए लंबी-लंबी कतारें लगती थीं और टीवी से लेकर खाने-पीने की चीजों तक को खरीदने के लिए टिकट की जरूरत होती थी हालांकि पुतिन के आने के बाद तेजी से हालात बदले.

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