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रेगिस्तान में कैसे अपने लाखों लोगों की प्यास बुझाता है कुवैत? जानें कैसे बनाता है खारे पानी को पीने लायक

आधुनिक लेकिन रेगिस्तानी देश कुवैत अपने नलों को कैसे चालू रखता है, अपनी आबादी के लिए कैसे पानी मुहैया कराता है और फसलों के लिए पानी का प्रबंध कैसे करता है, इसके बारे में हम आपको आगे बताने वाले हैं....

जया पाण्डेय | Jan 12, 2026, 10:28 AM IST

1.क्या है कुवैत की भौगोलिक स्थिति?

क्या है कुवैत की भौगोलिक स्थिति?
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कुवैत की जगमगाती गगनचुंबी इमारतें और आधुनिक शहर ऐसे इलाके में बसे हैं, जहां प्राकृतिक रूप से पीने का पानी लगभग नहीं के बराबर है. करीब 18,000 वर्ग किलोमीटर में फैला यह छोटा सा देश फारस की खाड़ी के उत्तरी किनारे पर इराक और सऊदी अरब के बीच स्थित है. इसका अधिकांश भूभाग रेगिस्तान से घिरा हुआ है और यहां बारिश भी बहुत कम होती है.

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2.कुवैत में लगभग शून्य हैं मीठे पानी के स्रोत

कुवैत में लगभग शून्य हैं मीठे पानी के स्रोत
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हालांकि कुवैत भौगोलिक रूप से टाइग्रिस-यूफ्रेट्स नदी प्रणाली के क्षेत्र के पास स्थित है, लेकिन देश के भीतर न तो कोई स्थायी नदी है, न झील और न ही कोई ऐसी जलधारा जो साल भर मीठा पानी उपलब्ध करा सके. यही वजह है कि कुवैत दुनिया के उन चुनिंदा देशों में शामिल है, जहां प्राकृतिक मीठे पानी के संसाधन लगभग शून्य हैं. यह स्थिति कुवैत की आधुनिक और समृद्ध छवि से बिल्कुल उलट नजर आती है.

3.अपने तेल भंडारों के लिए जाना जाता है कुवैत

अपने तेल भंडारों के लिए जाना जाता है कुवैत
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करीब 49 लाख लोगों की आबादी वाला यह हाई-इनकम देश अपने विशाल तेल भंडार, वैश्विक ऊर्जा बाजार में अहम भूमिका और समृद्ध सांस्कृतिक इतिहास के लिए जाना जाता है. एक समय कुवैत को खाड़ी क्षेत्र का हॉलीवुड भी कहा जाता था. लेकिन इस चमक-दमक के पीछे पानी की भारी चुनौती हमेशा बनी रही है.

4.कैसे अपने नागरिकों के पानी की जरूरत को पूरा करता है कुवैत?

कैसे अपने नागरिकों के पानी की जरूरत को पूरा करता है कुवैत?
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ऐसे देश में जहां प्रकृति से मीठे पानी का कोई भरोसेमंद स्रोत नहीं है, वहां नल से साफ पानी मिलना किसी चमत्कार से कम नहीं लगता. रेगिस्तानी जलवायु और अत्यधिक गर्मी के बावजूद कुवैत अपने शहरों, उद्योगों और नागरिकों की पानी की जरूरतें कैसे पूरी करता है, यही इसकी सबसे बड़ी खासियत है.

5.समुद्र के पानी को मीठा बनाने की पुरानी है रणनीति

समुद्र के पानी को मीठा बनाने की पुरानी है रणनीति
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कुवैत की जल रणनीति की नींव 1950 के दशक में ही रख दी गई थी. साल 1953 में यहां खारे समुद्री पानी को मीठा बनाने यानी डिसैलिनेशन का पहला संयंत्र शुरू किया गया. इसके बाद दशकों तक फारस की खाड़ी के तट पर ऐसे संयंत्रों का तेजी से विस्तार हुआ. आज कुवैत अपनी कुल पेयजल जरूरत का 90 प्रतिशत से भी अधिक हिस्सा समुद्र के पानी को मीठा बनाकर पूरा करता है.

6.कैसे खारे पानी को बनाया जाता है पीने लायक?

कैसे खारे पानी को बनाया जाता है पीने लायक?
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इन विशाल तटीय संयंत्रों में समुद्री जल को पहले साफ किया जाता है, फिर अत्याधुनिक तकनीक की मदद से उसमें मौजूद नमक और खनिजों को अलग कर दिया जाता है. इसके बाद इस पानी को पीने योग्य बनाया जाता है और पाइपलाइन नेटवर्क के जरिए पूरे देश में सप्लाई किया जाता है.

7.कहां-कहां इस्तेमाल होता है यह पानी?

कहां-कहां इस्तेमाल होता है यह पानी?
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डिसैलिनेशन से तैयार किया गया पानी कुवैत में दैनिक जीवन के लगभग हर पहलू में इस्तेमाल होता है. घरों में पीने और घरेलू कामों के लिए, उद्योगों में, अस्पतालों, स्कूलों और दूसरे सार्वजनिक सेवाओं में इसी पानी का उपयोग किया जाता है. सरकार पीने के पानी को सबसे अधिक प्राथमिकता देती है.

8.खराब पानी का कहां होता है इस्तेमाल?

खराब पानी का कहां होता है इस्तेमाल?
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हालांकि खारे पानी को मीठा बनाने की प्रक्रिया में काफी मात्रा में अत्यधिक खारा अपशिष्ट जल निकलता है. कुवैत इस पानी को भी पूरी तरह बर्बाद नहीं करता. इसका इस्तेमाल सीमित कृषि कार्यों, चारा फसलों, खजूर के बागानों और शहरी हरित क्षेत्रों की सिंचाई में किया जाता है. इससे ताजे पानी पर दबाव कम होता है.

9.कुवैत की प्यास बुझाने का भरोसेमंद तरीका

कुवैत की प्यास बुझाने का भरोसेमंद तरीका
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कुवैत का जल मॉडल दिखाता है कि प्राकृतिक संसाधनों की कमी के बावजूद तकनीक, निवेश और दीर्घकालिक योजना के जरिए किसी देश की बुनियादी जरूरतें पूरी की जा सकती हैं. हालांकि यह व्यवस्था महंगी और ऊर्जा-खपत वाली है लेकिन फिलहाल यही कुवैत की प्यास बुझाने का सबसे भरोसेमंद तरीका है.

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