एजुकेशन
Jaya Pandey | Sep 16, 2025, 10:41 AM IST
1.UNESCO साइट की लिस्ट में शामिल हैं ये रेलवे स्टेशन

भारतीय रेलवे हमारे देश के इतिहास का एक जीवंत हिस्सा है. ब्रिटिश काल से लेकर आज तक कुछ स्टेशन एक सदी से भी ज़्यादा समय से शान से खड़े और पूरी तरह से चालू हैं. भले ही दुनिया बुलेट ट्रेनों से अपग्रेड हो गई हों लेकिन भारत की पुरानी रेलगाड़ियां आज भी खूबसूरती की मिसाल हैं.
(All Photo Credit: Wikimedia Commons)
2.खूबसूरती और विरासत का हैं दूसरा नाम

क्या आप जानते हैं कि भारत के कुछ रेलवे स्टेशनों को यूनेस्को वर्ल्ड हेरिटेज साइट का दर्जा मिल चुका है. आज हम आपको ऐसे 4 भारतीय रेलवे स्टेशनों के बारे में बताएंगे जो शोहरत का दूसरा नाम हैं.
3.छत्रपति शिवाजी महाराज टर्मिनस

यह रेलवे स्टेशन विक्टोरियन और भारतीय वास्तुकला का अद्भुत संगम है और इसे यूनेस्को वर्ल्ड हेरिटेज साइट की लिस्ट में शामिल किया गया है. इस स्टेशन का डिज़ाइन एफ.डब्ल्यू. स्टीवंस ने तैयार किया था और यह 1887 में बनकर तैयार हुआ था. इसके नुकीले मेहराब, धारीदार पत्थर के गुंबद, रंगीन कांच की खिड़कियां और नक्काशीदार आकृतियां इसे और खूबसूरत बनाती हैं और सूर्यास्त के समय चारों ओर सुनहरी चमक के साथ यह स्टेशन और भी सुंदर हो जाता है.
4.दार्जिलिंग हिमालयन रेलवे

यह रेलवे भारत का पहला पहाड़ी रेलवे है जिसका निर्माण 1879-1881 के बीच हुआ था. यह ट्रेन लाइन जलपाईगुड़ी से दार्जिलिंग तक जाती है. दार्जिलिंग स्टेशन औपनिवेशिक बोर्डिंग स्कूलों और पन्ना चाय के बागानों से घिरा हुआ है और कंचनजंगा पर्वत भी स्टेशन की सुंदरता को बढ़ाने में अहम भूमिका निभाता है. यहां एक डीएचआर संग्रहालय भी है जो रेलवे के इतिहास को दिखाता है.
5.कालका शिमला रेलवे

इस स्टेशन की रेलवे लाइन शिवालिक पहाड़ियों से होकर गुजरती है. शिमला स्टेशन का निर्माण 1903 में हुआ था और इसकी दीवारें लकड़ी की थीं और छत जस्ती लोहे की थी. फिर 1921 में इसका पुनर्निर्माण किया गया और इसे दो मंजिला ईंटों की इमारत में बदल दिया गया. इसके प्लेटफार्म पर आपको पुराने सेमाफोर सिग्नल और विंटेज हिमालयन क्वीन या शिवालिक डीलक्स कोच मिलेंगे जो आपको निश्चित रूप से पुरानी यादों में ले जाएंगे.
6.नीलगिरी माउंटेन रेलवे

यह मनमोहक नैरो-गेज ट्रैक 1908 से चल रहा है. मेट्टुपालयम को केल्लर, कुन्नूर, वेलिंगटन और लवडेल जैसे जगहों से होते हुए ऊटी की धुंध भरी पहाड़ियों से जोड़ने वाला यह सफ़र प्राकृतिक नज़ारों से भरपूर है. इसे 2005 में यूनेस्को विश्व धरोहर स्थल घोषित किया गया था. यह रेलवे पश्चिमी घाट और चाय की पत्तियों से ढकी पहाड़ियों के अद्भुत दृश्यों से भरा हुआ है.
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