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बाहुबली शहाबुद्दीन के आतंक को चुनौती देने वाले बहादुर पुलिस अफसर रिटायर, जानें IPS बच्चू सिंह मीणा का शानदार सर्विस रिकॉर्ड

बिहार के बाहुबली शहाबुद्दीन को अपनी जान बचाने के लिए बुर्का पहनकर भागने के लिए मजबूर करने वाले IPS बच्चू सिंह मीणा अपने पद से रिटायर हो गए हैं, ऐसे में जानें उनके सर्विस का रिकॉर्ड कैसा रहा है और किस घटना ने उनके जीवन को तोड़कर रख दिया था...

Jaya Pandey | Nov 30, 2025, 12:47 PM IST

1.तेजतर्रार आईपीएस बच्चू सिंह मीणा हुए रिटायर

तेजतर्रार आईपीएस बच्चू सिंह मीणा हुए रिटायर
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1996 बैच के आईपीएस अधिकारी बच्चू सिंह मीणा अपनी पुलिस सेवा से रिटायर हो गए हैं. वह गैंगस्टर और आरजेडी नेता मोहम्मद शहाबुद्दीन से उसके गढ़ में जाकर मुकाबला करने और अपने नेतृत्व से खूंखार डॉन के लगभग 8 शूटरों को मार गिराने के बाद सुर्खियों में आए थे. वहीं बाहुबली शहाबुद्दीन को अपनी जान बचाने के लिए बुर्का पहनकर भागना पड़ा था. 

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2.बाहुबली शहाबुद्दीन पर शिकंजा कसकर सुर्खियों में आए थे

बाहुबली शहाबुद्दीन पर शिकंजा कसकर सुर्खियों में आए थे
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आईपीएस बच्चू सिंह मीणा को 2001 में सीवान का एसपी नियुक्त किया गया था. यह वही समय था जब बिहार कई बाहुबलियों के लिए जाना जाता था और शहाबुद्दीन का नाम आतंक और रसूख का पर्याय बन चुका था. उन्होंने सीवान के तत्कालीन जिला मजिस्ट्रेट आईएएस सीके अनिल के साथ मिलकर सीवान के इस बाहुबली पर शिकंजा कसा था.

3.अबतक इन बड़े पदों पर काम कर चुके हैं आईपीएस बच्चू सिंह मीणा

अबतक इन बड़े पदों पर काम कर चुके हैं आईपीएस बच्चू सिंह मीणा
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आईपीएस बच्चू सिंह मीणा वर्तमान में अपर पुलिस महानिदेशक (एडीजी) रेल के पद पर तैनात थे. वह डीजी या एडीजी रैंक में इस साल रिटायर होने वाले तीसरे पुलिस अधिकारी हैं. इसके पहले बिहार के डीजीपी रह चुके आरएस भट्टी 30 सितंबर जबकि बिहार विशेष सशस्त्र पुलिस के डीजी रहे एके अंबेडकर 31 जुलाई को रिटायर हो चुके हैं.

4.ईमानदार पुलिस अफसर के रूप में होती है IPS बच्‍चू सिंह मीणा की गिनती

ईमानदार पुलिस अफसर के रूप में होती है IPS बच्‍चू सिंह मीणा की गिनती
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IPS बच्‍चू सिंह मीणा मूल रूप से राजस्थान के निवासी हैं और उन्होंने बिहार में कई अहम पदों पर काम किया है. राज्य के कई जिलों में एसपी के रूप में सेवा देने के अलावा वह पूर्णिया रेंज और मगध क्षेत्र के डीआईजी भी रहे. उन्होंने स्पेशल ब्रांच के आईजी का भी पदभार संभाला और चार महीने बाद प्रमोशन पाकर वह एडीजी बने. उनकी गिनती राज्य के तेजतर्रार और ईमानदान पुलिस अधिकारी के रूप में होती है.

5.जब उनपर टूटा था दुखों का पहाड़

जब उनपर टूटा था दुखों का पहाड़
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हालांकि इस आईपीएस अधिकारी को जीवन में बड़े दुखों का भी सामना करना पड़ा. साल 2013 में उनके इकलौते बेटे रक्षित की सिक्किम में पीट-पीटकर हत्या कर दी गई थी. रक्षित यहां सिक्किम मणिपाल इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी से इंजीनियरिंग की पढ़ाई कर रहे थे. 

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