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Jaya Pandey | Jul 21, 2026, 11:00 AM IST
1.भारत में बनाए गए थे 5 जंतर-मंतर

दिल्ली का जंतर-मंतर आज देशभर में विरोध-प्रदर्शनों के लिए जाना जाता है. लेकिन क्या आप जानते हैं कि दिल्ली के अलावा भी भारत में तीन और जंतर-मंतर मौजूद हैं. वहीं, एक जंतर-मंतर अब पूरी तरह से नष्ट हो चुका है. 18वीं सदी में जयपुर के महाराजा सवाई जय सिंह द्वितीय ने भारत के 5 शहरों में पांच खगोलीय वेधशालाओं का निर्माण कराया था. इनमें दिल्ली, जयपुर, उज्जैन, वाराणसी और मथुरा शामिल थे. आज इनमें से चार वेधशालाओं के अवशेष मौजूद हैं, जबकि मथुरा वाली वेधशाला अब अस्तित्व में नहीं है.
(All Image Credit: Wikimedia Commons)
2.जयपुर का जंतर-मंतर

भारत के 5 जंतर-मंतर में से जयपुर का जंतर-मंतर आज यूनेस्को वर्ल्ड हेरिटेज साइट है. साल 2010 में इसे यह दर्जा मिला था. यह जंतर-मंतर अपने विशाल आकार, बेहतरीन संरक्षण और वैज्ञानिक उपकरणों की विविधता की वजह से सबसे खास माना जाता है. यहां करीब 20 बड़े खगोलीय उपकरण हैं, जिनमें प्रसिद्ध सम्राट यंत्र भी शामिल है. यह दुनिया की सबसे बड़ी पत्थर से बनी धूप घड़ियों में से एक है और सूर्य की छाया की मदद से समय की गणना करने के लिए बनाया गया था.
3.दिल्ली का जंतर-मंतर

दिल्ली का जंतर-मंतर पांचों जंतर-मंतर में से सबसे पहले बनाया गया था. इसके निर्माण 1720 के दशक में शुरू हुआ था और कुछ डॉक्यूमेंट्स में इसे 1721 तो कुछ में 1724 में इसे पूरा बताया गया है. यहां विशाल खगोलीय उपकरणों के जरिए सूर्य और दूसरे खगोलीय पिंडों की स्थिति का अध्ययन किया जाता था. नई दिल्ली के पार्लियामेंट स्ट्रीट के पास यह ऐतिहासिक परिसर आज अपने शांतिपूर्ण प्रदर्शनों की वजह से ज्यादा पहचाना जाता है.
4.उज्जैन का जंतर-मंतर

मध्य प्रदेश के उज्जैन में भी जय सिंह द्वितीय ने जंतर-मंतर का निर्माण कवाया गया. इस शहर का प्राचीन भारत में खगोल विज्ञान और गणित के अध्ययन से गहरा संबंध रहा है. यहां बनाई गई वेधशाला का मकसद भी खगोलीय पिंडों की स्थिति और गति से जुड़ी गणनाएं करना था. भले ही यह जयपुर वाले जंतर-मंतर से आकार में छोटा हो लेकिन भारत की खगोलीय विरासत में इसकी अहम जगह है.
5.वाराणसी का जंतर-मंतर

वाराणसी का जंतर-मंतर भी इस वैज्ञानिक परंपरा की एक अहम कड़ी है. इसे बनारस की खगोलीय वेधशाला के रूप में जाना जाता है और यह गंगा के किनारे मान महल परिसर से जुड़ा हुआ है. वाराणसी उस दौर में शिक्षा और ज्ञान का बड़ा केंद्र था, इसलिए जय सिंह द्वितीय ने यहां भी इस अजूबे का निर्माण करवाया था. समय के साथ यहां मौजूद कई उपकरण नष्ट हो गए या उनका स्वरूप बदल गया, लेकिन जो संरचनाएं बची हैं वे आज भी 18वीं सदी की खगोलीय वास्तुकला और वैज्ञानिक सोच की झलक देती हैं.
6.मथुरा का जंतर-मंतर

मथुरा का जंतर-मंतर इन पांचों में सबसे दुखद कहानी वाला है. यह वेधशाला भी जय सिंह द्वितीय ने बनवाई थी, लेकिन समय के साथ इसका अस्तित्व खत्म हो गया. उपलब्ध ऐतिहासिक दस्तावेजों के मुताबिक, मथुरा की वेधशाला और जिस किले में यह बनाई गई थी, दोनों को 1857 से पहले ही ध्वस्त कर दिया गया था. इसलिए आज यहां जयपुर, दिल्ली, उज्जैन या वाराणसी की तरह कोई संरक्षित जंतर-मंतर परिसर देखने को नहीं मिलता.