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भारत में राष्ट्रपति-उपराष्ट्रपति के चुनाव में EVM का इस्तेमाल क्यों नहीं होता? यहां जानें सभी डिटेल्स

Vice President Election: लोकसभा-विधानसभा चुनावों में जहां EVM की अहम भूमिका होती है, वहीं राष्ट्रपति और उपराष्ट्रपति चुनावों में तस्वीर अलग होती है. सवाल ये है कि आखिर इतने बड़े पदों के लिए वोटिंग मशीन का इस्तेमाल क्यों नहीं होता?

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भारत में राष्ट्रपति-उपराष्ट्रपति के चुनाव में EVM का इस्तेमाल क्यों नहीं होता? यहां जानें सभी डिटेल्स

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Vice President Election: लोकसभा और विधानसभा चुनावों में इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन यानी ईवीएम (EVM) की अहम भूमिका रहती है. करोड़ों मतदाता अपने पसंदीदा उम्मीदवार का चयन इसी मशीन से करते हैं. लेकिन जब बात देश के राष्ट्रपति और उपराष्ट्रपति जैसे संवैधानिक पदों के चुनाव की आती है, तो यहां ईवीएम का प्रयोग नहीं किया जाता. अब जबकि देश का नया उपराष्ट्रपति चुने जाने वाला है, ऐसे में यह जानना जरूरी है कि आखिर क्यों इन बड़े चुनावों में ईवीएम से मतदान नहीं होता.

मतदान की प्रक्रिया सामान्य चुनावों से अलग

भारत में राष्ट्रपति और उपराष्ट्रपति का चुनाव सामान्य चुनावों से अलग प्रणाली के तहत होता है. यहां मतदान की प्रक्रिया आनुपातिक प्रतिनिधित्व प्रणाली (Proportional Representation System) पर आधारित होती है. इसमें सांसद और विधायक मतपत्र (Ballot Paper) के जरिए उम्मीदवारों को वरीयता (Preference Vote) के रूप में अंक देते हैं. हर मतदाता उतनी ही प्राथमिकताएं अंकित कर सकता है, जितने उम्मीदवार चुनाव में हों. उदाहरण के लिए, किसी उम्मीदवार को "1" अंक देने का मतलब है कि वह पहली पसंद है, जबकि "2" अंक दूसरी पसंद को दर्शाता है. 

ईवीएम में इस तरह की तकनीक मौजूद नहीं

चुनाव आयोग के अधिकारियों के अनुसार, ईवीएम केवल सीधे चुनावों में काम करने के लिए बनाई गई है. यानी यह मतों को गिनकर बता सकती है कि किसे सबसे ज्यादा वोट मिले. लेकिन राष्ट्रपति और उपराष्ट्रपति चुनावों में वरीयता क्रम के आधार पर गिनती करनी होती है. इस प्रक्रिया में पहले वरीयता के आधार पर वोटों की गिनती होती है और अगर किसी उम्मीदवार को जरूरी बहुमत नहीं मिलता तो दूसरी वरीयता के वोट जोड़े जाते हैं. इस तरह से यह प्रक्रिया कई दौर तक चल सकती है. चूंकि ईवीएम में इस तरह की तकनीक मौजूद नहीं है, इसलिए इन चुनावों के लिए बैलेट पेपर का इस्तेमाल किया जाता है. 


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मुकाबला सी. पी. राधाकृष्णन और बी. सुदर्शन रेड्डी के बीच

बहरहाल, आपको बता दें,  इस बार उपराष्ट्रपति चुनाव में मुकाबला एनडीए उम्मीदवार सी. पी. राधाकृष्णन और विपक्ष के बी. सुदर्शन रेड्डी के बीच है. पूर्व उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ ने 21 जुलाई को स्वास्थ्य कारणों से इस्तीफा दे दिया था, जिसके चलते यह सीट खाली हो गई. अब 9 सितंबर को मतदान पूरा होगा और देश को नया उपराष्ट्रपति मिल जाएगा. 

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