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झारखंड में चल रहे विरोध प्रदर्शन में राहुल क्रांति उन 6 आंदोलनकारियों में से एक हैं जो भूख हड़ताल पर बैठे थे. खराब तबीयत के बीच उन्हें आईसीयू में भर्ती करवाया गया. जानें वह कौन हैं और क्या है उनके नाम के पीछे लगी 'क्रांति' की कहानी...
झारखंड में जेपीएससी और जेएसएससी परीक्षाओं में अनियमितताओं के खिलाफ चल रहे प्रोटेस्ट के बीच 40 साल के राहुल कुमार एक जाना-पहचाना नाम बन गए हैं. रांची के जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम में आमरण अनशन पर बैठे राहुल की तबीयत लगातार बिगड़ने के बाद उन्हें रांची के अस्पताल में भर्ती कराया गया. यहां डॉक्टर उनकी सेहत पर लगातार नजर बनाए हुए हैं. पलामू जिले के रहने वाले राहुल उन छह प्रदर्शनकारियों में शामिल हैं जो भूख हड़ताल पर बैठे थे. अब लोग यह जानना चाहते हैं कि आखिर राहुल क्रांति कौन हैं और उनकी कहानी क्या है?
झारखंड के कई उम्मीदवारों के लिए राहुल कुमार अब सिर्फ राहुल कुमार नहीं हैं, बल्कि वे राहुल क्रांति बन चुके हैं. प्रदर्शनकारी 14वीं झारखंड लोक सेवा आयोग सिविल सेवा परीक्षा को रद्द करने और भर्ती प्रक्रिया में हुई कथित गड़बड़ियों के निष्पक्ष जांच की मांग कर रहे हैं. उनकी मांग है कि इस मामले की जांच या तो सीबीआई करे या फिर राज्य से बाहर हाईकोर्ट के रिटायर जजों की एक कमिटी बनाई जाए.
राहुल का असली नाम राहुल कुमार है और 'क्रांति' शब्द बाद में उनके नाम से जुड़ गया. उन्होंने मीडिया को बताया कि झारखंड कर्मचारी चयन आयोग की भर्ती प्रक्रियाओं के खिलाफ आवाज उठाने वाले शुरुआती लोगों में वे शामिल थे. जब मेरिट लिस्ट जारी किए बिना ही काउंसलिंग करवाई गई, तब वह उम्मीदवारों की आवाज उठा रहे थे. उस समय राज्य के उम्मीदवारों ने उनसे कहा कि अगर कोई उनके अधिकारों की लड़ाई लड़ सकता है तो वह राहुल ही हैं. धीरे-धीरे यह पहचान क्रांति के रूप में उनके नाम के साथ जुड़ गई.
राहुल का दावा है कि उन्होंने जेपीएससी, जेएसएससी सीजीएल, असिस्टेंट प्रोफेसरों की भर्ती, महिला सुपरवाइजरों की नियुक्ति और आयु सीमा में छूट जैसे मुद्दों को लेकर करीब दस बड़े आंदोलनों का नेतृत्व किया है. उन्होंने बताया कि उनकी इन मुहिमों से उम्मीदवारों को सकारात्मक नतीजा मिला. इन आंदोलनों में एक बड़ी कानूनी लड़ाई जेपीएससी परीक्षा में आयु सीमा को लेकर थी. कई उम्मीदवारों को उम्र पार करने की वजह से परीक्षा में बैठने से रोक दिया गया था. उस समय राहुल झारखंड हाईकोर्ट में याचिकाकर्ता बने और फिर कोर्ड के फैसले के बाद उन्हें और कई और उम्मीदवारों को 14वीं जेपीएससी परीक्षा में शामिल होने का मौका मिला था.
राहुल सिर्फ प्रोटेस्ट का नेतृत्व ही नहीं कर रहे हैं बल्कि वह खुद भी सरकारी नौकरियों की तैयारी करने वाले एक उम्मीदवार थे. उन्होंने जेपीएससी का मेन्स एग्जाम क्लियर कर लिया था. लेकिन उनके मुताबिक इस भर्ती में भ्रष्टाचार की वजह से उनका सरकारी जॉब का सपना अधूरा ही रह गया. उन्होंने बताया कि उस समय एग्जाम पेपर और उसकी आंसर रांची रेलवे स्टेशन के पास के होटल में बांटी गई थी. कड़ी मेहनत और मेन्स पास करने के बावजूद वह फाइनल मेरिट लिस्ट में जगह नहीं बना पाए. इस घटना ने उनकी जिंदगी बदल दी और उन्होंने ठान लिया कि वे अब सिर्फ अपने करियर के लिए ही नहीं बल्कि पूरे एग्जाम सिस्टम में सुधार के लिए संघर्ष करेंगे.
33 साल की उम्र में शादी करने वाले राहुल के दो बच्चे हैं और उनकी पत्नी गृहिणी हैं. राहुल का कहना है कि वे उम्मीदवारों के हक की लड़ाई जारी रखेंगे. चाहे धरना स्थल हो या अस्पताल का बिस्तर वह इस संघर्ष को खत्म नहीं होने देंगे. इस बार भी सरकार को उनकी बात सुननी पड़ेगी क्योंकि यह लड़ाई आने वाली पीढ़ियों के भविष्य के लिए है.