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फ्लाइट लेफ्टिनेंट अर्शदीप सिंह डांग ब्रिटेन के रॉयल एयर फोर्स से विंग हासिल करने वाले दूसरे विश्वयुद्ध के बाद पहले सिख फाइटर पायलट बने हैं. जानें उनकी सफलता की कहानी...
भारतीय मूल के अर्शदीप सिंह डांग ने ब्रिटेन की रॉयल एयर फोर्स में फाइटर पायलट बनकर एक बड़ी उपलब्धि हासिल की है. 28 साल के फ्लाइट लेफ्टिनेंट अर्शदीप सेकेंड वर्ल्ड वॉर के बाद RAF के फाइटर स्क्वाड्रन से विंग हासिल करने वाले पहले सिख हैं. उनकी यह सफलता इसलिए भी खास है क्योंकि इससे सिर्फ उनका सपना ही नहीं पूरा हुआ है, बल्कि उनके परिवार की कई साल पुरानी अधूरी इच्छा भी पूरी हुई है. अर्शदीप चाहते हैं कि उनकी कहानी उन युवाओं को प्रेरित करे, जो किसी बड़े सपने को पूरा करने की कोशिश कर रहे हैं.
अर्शदीप की जड़ें पंजाब से जुड़ी हुई हैं. उनके पिता जगदीप सिंह डांग का संबंध लुधियाना से है, जबकि उनकी मां गगनदीप कौर अमृतसर से हैं. अर्शदीप का जन्म 1998 में चंडीगढ़ में हुआ था. जब वह करीब 6 साल के थे, तब उनका परिवार ब्रिटेन चला गया और साइथॉल में बस गया. भले ही उनका बचपन इंग्लैंड में बीता लेकिन भारत से उनका रिश्ता भी लगातार बना रहा. परिवार और रिश्तेदारों से मिलने के लिए वह पंजाब आते-जाते रहते हैं. 2 साल पहले वह अमृतसर और लुधियाना में अपनों से मिल चुके हैं.
भारत में रहने के दौरान अर्शदीप ने मोहाली के एक स्कूल में करीब दो साल पढ़ाई की थी. लेकिन वह इतने छोटे थे कि उस समय की ज्यादातर यादें उनके जेहन में मौजूद नहीं है. बाद में उनकी पढ़ाई ब्रिटेन में हुई और उन्होंने आगे चलकर साइंस और मैथमैटिक्स में अपने करियर की नींव बनाई. उन्होंने ब्रिस्टन यूनिवर्सिटी से मैथमैटिक्स और फिजिक्स में बीएससी ऑनर्स की पढ़ाई की. यह फाइटर पायलट बनने की दिशा में एक बड़ा कदम था.
अर्शदीप ने इंडियन एक्सप्रेस को दिए अपने इंटरव्यू में बताया कि उनके दादा सरदार संतोख सिंह डांग चाहते थे कि उनके बेटे पायलट बनें. लेकिन जब अर्शदीप के पिता सिर्फ 6 साल के थे, तभी उनके दादा का निधन हो गया. इस वजह से वह अपने पिता के सपने को पूरा नहीं कर सके. लेकिन यह सपना परिवार में खत्म नहीं हुआ. उनके पिता ने यही सपना अपने बेटे अर्शदीप में बो दिया और बचपन से ही उन्हें पायलट बनने के लिए प्रोत्साहित किया.
अर्शदीप ने फरवरी 2022 में ऑफिसर ट्रेनिंग पूरी करने की दिशा में कदम बढ़ाया और 2023 में फ्लाइंग ट्रेनिंग पूरी की. इसके बाद उन्होंने RAF के फास्ट जेट पायलट बनने के लिए अपनी ट्रेनिंग जारी रखी. 2024 में उन्हें फास्ट जेट स्ट्रीम में आगे बढ़ने का मौका मिला. इसके बाद मार्च 2025 में उन्होंने फास्ट जेट ट्रेनिंग शुरू की और जुलाई 2025 में बेसिक फास्ट जेट ट्रेनिंग पूरी की.
फाइटर पायलट बनने की ट्रेनिंग का अगला चरण और भी कठिन होता है. इसमें पायलट को तेज गति से उड़ने वाले लड़ाकू विमानों को संभालने, हवा में बदलती परिस्थितियों के बीच तुरंत फैसला लेने और मिशन के दौरान प्रेशर में काम करने के लिए तैयार किया जाता है. अक्टूबर 2025 में उन्हें अमेरिका के टेक्सास में आगे की ट्रेनिंग के लिए भेजा गया था. इसके बाद जुलाई 2026 में उन्होंने अपने विंग टेस्ट को पास किया.
अब अर्शदीप को ऑपरेशनल फ्रंट लाइन फाइटर पायलट की भूमिका के लिए आगे की ट्रेनिंग से गुजरना पड़ेगा. फाइटर स्क्वाड्रन में पूरी तरह से ऑपरेशनल भूमिका संभालने से पहले अब वह एक साल की और ट्रेनिंग लेंगे और अपने बैच के इकलौते भारतीय मूल के पायलट होंगे. इस ट्रेनिंग में विमान संचालन के साथ-साथ हथियार प्रणाली, टैक्टिकल फ्लाइंग, एयर कॉम्बैट और मिशन प्लानिंग की क्षमताओं को मजबूत करने पर फोकस होगा.