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कहां से पढ़ाई कर देश के इंटरनेशनल एयरपोर्ट्स की 'दृष्टि' बनीं डॉ. शुभा वेंकटेश अयंगर? पद्म श्री से हो चुकी हैं सम्मानित

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने 23 जून 2026 को साइंटिस्ट डॉ. शुभा वेंकटेश अयंगर को पद्म श्री अवॉर्ड से सम्मानित किया. जानें कौन हैं डॉ. अयंगर, उन्होंने कहां से अपनी पढ़ाई की है और भारत में उनके किस योगदान के लिए उन्हें इतने बड़े सम्मान से नवाजा गया...

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कहां से पढ़ाई कर देश के इंटरनेशनल एयरपोर्ट्स की 'दृष्टि' बनीं डॉ. शुभा वेंकटेश अयंगर? पद्म श्री से हो चुकी हैं सम्मानित

Dr. Shubha Venkatesh  Iyengar पद्म श्री अवॉर्ड 2026 से सम्मानित होने वाली साइंटिस्ट (Image: Social Media)

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  • पद्म श्री से सम्मानित हुईं साइंटिस्ट डॉ. शुभा वेंकटेश अयंगर
  • एयरोस्पेस, डिफेंस और स्वदेशी प्रौद्योगिकी विकास में योगदान के लिए मिला सम्मान
  • 46 साल तक CSIR के  नेशनल एयरोस्पेस लेबोरेट्रीज में दीं सेवाएं
  • पढ़ाई में गोल्ड मेडलिस्ट होने से लेकर पद्म श्री अवॉर्ड मिलने तक का सफर है अनोखा

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने 23 जून को राष्ट्रपति भवन में आयोजित दूसरे नागरिक अलंकरण समारोह में देश के विभिन्न क्षेत्रों में उत्कृष्ट योगदान देने वाले व्यक्तित्वों को पद्म पुरस्कारों से सम्मानित किया. इसमें साइंटिस्ट डॉ. शुभा वेंकटेश अयंगर को एयरोस्पेस, डिफेंस और स्वदेशी प्रौद्योगिकी विकास में उनके योगदान के लिए पद्म श्री से सम्मानित किया गया.

कौन हैं डॉ. शुभा वेंकटेश अयंगर?

डॉ. अयंगर ने लगभग 46 साल तक काउंसिल ऑफ साइंटिफिक एंड इंडस्ट्रियल रिसर्च (CSIR) की नेशनल एयरोस्पेस लेबोरेट्रीज में सेवाएं दीं और देश में कई स्वदेशी तकनीकों के विकास में अपना योगदान दिया. उन्होंने बैंगलोर यूनिवर्सिटी में फिजिक्स से ग्रेजुएशन और पोस्ट ग्रेजुएशन किया है और पहले नंबर पर आकर कई गोल्ड मेडल भी जीते. उनकी उपलब्धियों ने भारत को तकनीकी आत्मनिर्भरता दिलाने में अहम भूमिका निभाई है. 

डॉ. शुभा वेंकटेश अयंगर का सबसे बड़ा योगदान क्या है?

डॉ. अयंगर ने दृष्टि सिस्टम विकसित किया जो एक एडवांस्ड रनवे विजुअल रेंज और मौसम निगरानी प्रणाली है. इसके इस्तेमाल से हवाई अड्डों पर विजिबिलटी का आकलन करने में मदद मिलती है. इस स्वदेशी तकनीक को देश के लगभग सभी बड़े इंटरनेशनल एयरपोर्ट और इंडियन एयरफोर्स के कई ठिकानों पर इस्तेमाल में लाया जाता है. इसके विकास से भारत की निर्भरता विदेशों से खरीदे जाने वाले महंगी प्रणालियों पर कम हुई. डॉ. अयंगर की दृष्टि की सिर्फ देश में ही नहीं बल्कि विदेशों में भी जमकर तारीफ हुई.

डॉ. शुभा वेंकटेश अयंगर का डिफेंस सेक्टर में क्या योगदान है?

डिफेंस सेक्टर में भी डॉ. अयंगर का योगदान काफी अहम है. उन्होंने अग्नि मिसाइल में मौजूद तकनीकी खामी को दूर करके भारत को डिफेंस सेक्टर में भी आत्मनिर्भर बनाया. उनके नेतृत्व में ऐसे स्वदेशी वस्तुओं के विकास को बढ़ावा मिला जो अत्यधिक तापमान और हाइपरसोनिक स्पीड जैसी चुनौतियों का भी सामना कर सकते हैं. इन तकनीकों का इस्तेमाल मिसाइल प्रणालियों, रैमजेट-स्क्रैमजेट इंजनों और स्पेस लॉन्च प्रोग्राम्स में हुआ.

डॉ. अयंगर के कई रिसर्च पेपर छप चुके हैं और उनके रिसर्च वर्क का संदर्भ दुनिया के टॉप स्पेस एजेंसी और साइंटिफिक इंस्टीट्यूट्स भी लेते हैं. अपने लंबे करियर में उन्हें 40 से ज्यादा नेशनल और इंटरनेशनल अवॉर्ड से भी नवाजा जा चुका है. साल 2015 में उन्हें मेक इन इंडिया अवॉर्ड से भी सम्मानित किया गया था. अब पद्म श्री से सम्मानित होना उनके देश के निर्माण में दिए गए योगदान को मान्यता देता है.

क्या है पद्म श्री अवॉर्ड?

पद्म श्री भारत के सर्वोच्च नागरिक सम्मानों में से एक है. यह सम्मान कला, साहित्य, शिक्षा, विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी, चिकित्सा, सामाजिक कार्य, खेल, उद्योग और सार्वजनिक जीवन जैसे विभिन्न क्षेत्रों में उत्कृष्ट और विशिष्ट योगदान देने वाले व्यक्तियों को दिया जाता है. भारत सरकार से मिलने वाला यह पुरस्कार उन लोगों की उपलब्धियों को मान्यता देता है जिन्होंने अपने काम से समाज, देश और मानवता के विकास में महत्वपूर्ण योगदान दिया हो.

क्या है काउंसिल ऑफ साइंटिफिक एंड इंडस्ट्रियल रिसर्च?

CSIR यानी काउंसिल ऑफ साइंटिफिक एंड इंडस्ट्रियल रिसर्च भारत का सबसे बड़ा वैज्ञानिक अनुसंधान एवं विकास (R&D) संगठन है. यह विज्ञान और प्रौद्योगिकी मंत्रालय के अंतर्गत काम करने वाला एक स्वायत्त संस्थान है. देश में नई तकनीकों के विकास, वैज्ञानिक शोध और औद्योगिक नवाचार को बढ़ावा देने में इसकी महत्वपूर्ण भूमिका है. साल 1942 में स्थापित सीएसआईआर का मुख्यालय नई दिल्ली में है. अपनी लैब्स और रिसर्च सेंटर के जरिये यह स्वास्थ्य, एयरोस्पेस, पर्यावरण, ऊर्जा, कृषि और रक्षा जैसे सेक्टर में रिसर्च वर्क करता है और देश के वैज्ञानिक और तकनीकी प्रगति को मजबूत करता है.

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