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तमिलनाडु के कुड्डालोर जिले के पिचावरम मैंग्रोव फॉरेस्ट की वैल्यू 2,485.38 करोड़ रुपये आंकी गई है, ऐसे में जानें भारत में कहां-कहां फैला है मैंग्रोव फॉरेस्ट का खजाना...
प्रकृति ने भारत को कई अनमोल खजानों से नवाजा है और मैंग्रोव वन उनमें से एक हैं. ये वन सिर्फ पेड़ों के समूह नहीं हैं बल्कि ये ऐसे तटीय पारिस्थितिकी तंत्र हैं जो समुद्री तूफानों, चक्रवातों और तटीय कटाव से सुरक्षा करते हैं. इसके अलावा ये जैव विविधता और स्थानीय लोगों की आजीविका का आधार भी हैं. इन दिनों तमिलनाडु के कुड्डालोर जिले का पिचावरम मैंग्रोव फॉरेस्ट काफी चर्चा में है. इंस्टीट्यूट फॉर सोशल एंड इकोनॉमिक चेंज की मदद से राज्य अधिकारियों ने इस वन की वैल्यू 2,485.38 करोड़ रुपये आंकी है. ऐसे में आज हम आपको भारत और दुनिया के अहम मैंग्रोव वनों के बारे में बताएंगे.
पिचावरम मैंग्रोव वन तमिलनाडु के चिदंबरम के पास कुड्डालोर जिले में है. यह भारत के सबसे बड़े मैंग्रोव पारिस्थितिकी तंत्रों में से एक है और साल 2022 में इसे रामसर कन्वेंशन के तहत रामसर साइट का दर्जा भी मिल चुका है. रामसर कन्वेंशन 1971 में ईरान के रामसर शहर में शुरू हुआ था और इसका मकसद दुनिया के अहम वेटलैंड्स का संरक्षण करना था. मैंग्रोव वन वो खास जंगल होते हैं जो समुद्र के खारे पानी और नदी के मीठे पानी के मिलने वाले ज्वारीय तटीय इलाकों में उगते हैं. यहां पाए जाने वाले पेड़ भी अनोखे होते हैं क्योंकि इनकी जड़ें कीचड़ वाली जमीन और खारे पानी में आसानी से विकसित हो जाती है.
पिचावरम को भारत के सबसे बड़े मैंग्रोव इकोसिस्टम में से एक माना जाता है. यह मैंग्रोव वन वेल्लर और कोलेरून नदी के मुहानों के बीच स्थित है. यहां की किललाई बैकवाटर सिस्टम मैंग्रोव जंगलों के साथ मिलकर एक अनोखा प्राकृतिक दृश्य बनाती है. यहां पेड़ों की जड़ें कई जगहों पर पानी में ही डूबी रहती हैं, जो इस वन की सबसे खास पहचान हैं.
भारत में मैंग्रोव वन खासतौर से पश्चिम बंगाल, गुजरात, ओडिशा, आंध्र प्रदेश, तमिलनाडु, महाराष्ट्र, गोवा, कर्नाटक, केरल और अंडमान-निकोबार द्वीप समूह में पाए जाते हैं. भारत का कुल मैंग्रोव क्षेत्र लगभग 4,992 वर्ग किलोमीटर है. यह देश के कुल भौगोलिक क्षेत्र का करीब 0.15 प्रतिशत है. क्षेत्रफल के लिहाज से पश्चिम बंगाल में सबसे अधिक मैंग्रोव हैं, जबकि गुजरात दूसरे नंबर पर आता है. इसके बाद अंडमान और निकोबार द्वीप समूह का नंबर आता है.

सुंदरबन दुनिया का सबसे बड़ा मैंग्रोव फॉरेस्ट है. यह गंगा, ब्रह्मपुत्र और मेघना नदियों के विशाल डेल्टा में भारत और बांग्लादेश के बीच फैला हुआ है. इसका भारतीय हिस्सा पश्चिम बंगाल में है. सुंदरबन यूनेस्को की वर्ल्ड हेरिटेज साइट की लिस्ट में शामिल है और यह रॉयल बंगाल टाइगर, खारे पानी के मगरमच्छ, गंगा और इरावदी डॉल्फिन सहित कई दुर्लभ जीवों का प्राकृतिक आवास है. यह वन समुद्री तूफानों के प्रभाव को कम करने में भी अहम भूमिका निभाता है.
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ओडिशा का भीतरकनिका मैंग्रोव भारत का दूसरा सबसे बड़ा मैंग्रोव इकोसिस्टम है. यह महानदी, ब्राह्मणी और वैतरणी नदी तंत्र के डेल्टा क्षेत्र में फैला हुआ है. भीतरकनिका को मैंग्रोव जैव विविधता के लिहाज से दुनिया के सबसे समृद्ध इलाकों में गिना जाता है और इसे 'मैंग्रोव जेनेटिक पैराडाइज' के नाम से भी जाना जाता है. हां दुनिया की सबसे बड़ी खारे पानी के मगरमच्छों की आबादी पाई जाती है. इतना ही नहीं यह ऑलिव रिडले कछुओं, प्रवासी पक्षियों और दूसरे दुर्लभ जीवों का घर है.