एजुकेशन
आज हम आपको जिस इंसान से मिलवाने जा रहे हैं उन्होंने छोटी उम्र से ही पिता से अलगाव का दर्द झेला लेकिन मां के साथ ने उन्हें हिम्मत दी और आईपीएस बनकर वह आज देश की सेवा कर रहे हैं...
किस शख्स की किस्मत कब पलट जाए कुछ कहा नहीं जा सकता. कई बार हम जैसा सोचते हैं, हमारी जिंदगी बिलकुल उलटे तरीके से ही चलने लगती है. हालांकि बिना मेहनत और लगन से जीवन में कोई बड़ा मुकाम हासिल नहीं किया जा सकता. आज हम आपको जिस इंसान से मिलवाने जा रहे हैं उन्होंने छोटी उम्र से ही पिता से अलगाव का दर्द झेला लेकिन मां के साथ ने उन्हें हिम्मत दी और आईपीएस बनकर वह आज देश की सेवा कर रहे हैं.
यह भी पढ़ें- कौन हैं IPS पिनाक मिश्रा जो बने पुरी के नए SP? इंजीनियरिंग के बाद JNU से पढ़ाई, देखें UPSC की मार्कशीट
हासन जिले के अरासिकेरे के रहने वाले धनुष कुमार का पालन पोषण उनकी मां चेतना गौड़ ने किया. वह सिंगल पैरेंट थीं क्योंकि धनुष के पिता बहुत कम उम्र में घर छोड़कर चले गए थे. धनुष ने कक्षा 5 तक अरासिकेरे में पढ़ाई की और बाद में वे बेंगलुरु चले गए. उन्होंने बीएनएम इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी से कंप्यूटर साइंस एंड इंजीनियरिंग में डिग्री हासिल की. इसके बाद सबकुछ छोड़-छाड़ कर वह संन्यासी बन जाना चाहते थे.
यह भी पढ़ें- कितने पढ़े-लिखे हैं RAW के नए चीफ पराग जैन? जानें हर महीने कितनी सैलरी मिलेगी
द हिंदू को दिए इंटरव्यू में उन्होंने बताया, 'मैं साधु बनना चाहता था और मैंने 6 साल तक अपना अधिकतर समय ध्यान पर बिताया. इस दौरान मेरी मां ने मेरा बहुत साथ दिया और कहा कि मुझे एक जिम्मेदार नागरिक बनना है. कई साल ध्यान के बाद मैंने यह फैसला लिया कि मुझे खुद को समाज के लिए समर्पित कर देना चाहिए. मुझे सिविल सेवा में शामिल होकर समाज की सेवा करना सबसे सही तरीका लगा और मैं इसकी तैयारी में जी-जान से जुट गया.'
यह भी पढ़ें- कौन हैं जान्हवी डांगेती जो Titans Space के 2029 मिशन के लिए हुईं सिलेक्ट? जानें कहां से की है पढ़ाई-लिखाई
यूपीएससी सिविल सेवा की तैयारी के दौरान धनुष ने शंकर आईएएस एकेडमी में ट्यूटर के रूप में भी काम किया. तैयारी के दौरान वह नियमित रूप से समाचार पत्र पढ़ते थे ताकि करंट अफेयर्स तैयार होता रहे और वह घटनाक्रम का विश्लेषण कर सकें. कई प्रयासों में असफल रहने के बाद आखिरकार उन्होंने अपने पांचवें प्रयास में सफलता हासिल कर ली. अपने पिछले प्रयासों में वह तीन बार इंटरव्यू के लिए चुने गए लेकिन फाइनल लिस्ट में जगह नहीं बना पाए. उन्होंने मेन्स एग्जाम में कन्नड़ साहित्य को अपना ऑप्शनल सब्जेक्ट चुना.
धनुष यूपीएससी में अपनी सफलता का श्रेय अपनी मां को देते हैं जिन्होंने डायरेक्ट सेलिंग एजेंट (डीएसए लोन एजेंट) के तौर पर काम करके उनकी जिंदगी संवार दी. वह यूपीएससी सीएसई 2022 में 501वीं रैंक लाकर आईपीएस बने थे. आज उनके संघर्ष की कहानी से देश के लाखों युवा प्रेरणा ले रहे हैं और अपनी मंजिल की ओर बढ़ रहे हैं.
अपनी राय और अपने इलाके की खबर देने के लिए जुड़ें हमारे गूगल, फेसबुक, x, इंस्टाग्राम, यूट्यूब और वॉट्सऐप कम्युनिटी से.