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पिता ने छोड़ा साथ तो मां ने अकेले पाला, संन्यासी बनते-बनते IPS बन गए धनुष कुमार, जानें पूरी कहानी

आज हम आपको जिस इंसान से मिलवाने जा रहे हैं उन्होंने छोटी उम्र से ही पिता से अलगाव का दर्द झेला लेकिन मां के साथ ने उन्हें हिम्मत दी और आईपीएस बनकर वह आज देश की सेवा कर रहे हैं...

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पिता ने छोड़ा साथ तो मां ने अकेले पाला, संन्यासी बनते-बनते IPS बन गए धनुष कुमार, जानें पूरी कहानी

IPS Dhanush Kumar

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किस शख्स की किस्मत कब पलट जाए कुछ कहा नहीं जा सकता. कई बार हम जैसा सोचते हैं, हमारी जिंदगी बिलकुल उलटे तरीके से ही चलने लगती है. हालांकि बिना मेहनत और लगन से जीवन में कोई बड़ा मुकाम हासिल नहीं किया जा सकता. आज हम आपको जिस इंसान से मिलवाने जा रहे हैं उन्होंने छोटी उम्र से ही पिता से अलगाव का दर्द झेला लेकिन मां के साथ ने उन्हें हिम्मत दी और आईपीएस बनकर वह आज देश की सेवा कर रहे हैं.

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पिता ने छोड़ा साथ तो मां बनीं सहारा

हासन जिले के अरासिकेरे के रहने वाले धनुष कुमार का पालन पोषण उनकी मां चेतना गौड़ ने किया. वह सिंगल पैरेंट थीं क्योंकि धनुष के पिता बहुत कम उम्र में घर छोड़कर चले गए थे. धनुष ने कक्षा 5 तक अरासिकेरे में पढ़ाई की और बाद में वे बेंगलुरु चले गए. उन्होंने बीएनएम इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी से कंप्यूटर साइंस एंड इंजीनियरिंग में डिग्री हासिल की. इसके बाद सबकुछ छोड़-छाड़ कर वह संन्यासी बन जाना चाहते थे. 

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सांसारिक मोह त्याग साधु बनना चाहते थे धनुष

द हिंदू को दिए इंटरव्यू में उन्होंने बताया, 'मैं साधु बनना चाहता था और मैंने 6 साल तक अपना अधिकतर समय ध्यान पर बिताया. इस दौरान मेरी मां ने मेरा बहुत साथ दिया और कहा कि मुझे एक जिम्मेदार नागरिक बनना है. कई साल ध्यान के बाद मैंने यह फैसला लिया कि मुझे खुद को समाज के लिए समर्पित कर देना चाहिए. मुझे सिविल सेवा में शामिल होकर समाज की सेवा करना सबसे सही तरीका लगा और मैं इसकी तैयारी में जी-जान से जुट गया.'

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कोचिंग सेंटर में भी किया काम

यूपीएससी सिविल सेवा की तैयारी के दौरान धनुष ने शंकर आईएएस एकेडमी में ट्यूटर के रूप में भी काम किया. तैयारी के दौरान वह नियमित रूप से समाचार पत्र पढ़ते थे ताकि करंट अफेयर्स तैयार होता रहे और वह घटनाक्रम का विश्लेषण कर सकें. कई प्रयासों में असफल रहने के बाद आखिरकार उन्होंने अपने पांचवें प्रयास में सफलता हासिल कर ली. अपने पिछले प्रयासों में वह तीन बार इंटरव्यू के लिए चुने गए लेकिन फाइनल लिस्ट में जगह नहीं बना पाए. उन्होंने मेन्स एग्जाम में कन्नड़ साहित्य को अपना ऑप्शनल सब्जेक्ट चुना.

धनुष यूपीएससी में अपनी सफलता का श्रेय अपनी मां को देते हैं जिन्होंने डायरेक्ट सेलिंग एजेंट (डीएसए लोन एजेंट) के तौर पर काम करके उनकी जिंदगी संवार दी. वह यूपीएससी सीएसई 2022 में 501वीं रैंक लाकर आईपीएस बने थे. आज उनके संघर्ष की कहानी से देश के लाखों युवा प्रेरणा ले रहे हैं और अपनी मंजिल की ओर बढ़ रहे हैं.

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