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यूपीएससी की भारतीय वन सेवा परीक्षा में झारखंड रांची की कनिका अनभ ने टॉप किया है. जानें उन्होंने कहां से पढ़ाई-लिखाई की है और उनके माता-पिता क्या करते हैं....
यूपीएससी की परीक्षा देश की मुश्किल परीक्षाओं में से एक है. आज यूपीएससी ने भारतीय वन सेवा परीक्षा के नतीजे जारी किए हैं जिसमें कनिका अनभ ने टॉप किया है. कनिका अनभ की सफलता की कहानी बेहद दिलचस्प है. वह लगातार दो बाद यूपीएससी की प्रीलिम्स और मेन्स परीक्षा में पास होकर इंटरव्यू राउंड तक पहुंची थीं लेकिन हर बार फाइनल सिलेक्शन में नाकाम रही. इस बार उनकी मेहनत रंग लाई और उन्होंने यूपीएससी की आईएफएस परीक्षा में पहली रैंक लाकर अपनी मंजिल हासिल की.
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कनिका अनभ का फैमिली बैकग्राउंड
कनिका अनभ झारखंड के रांची से ताल्लुक रखती हैं. उनके पिता अभय कुमार सिन्हा, खूंटी में प्रिंसिपल डिस्ट्रिक्ट जज के पद से रिटायर्ड हो चुके हैं जबकि उनकी मां अनिता सिन्हा गृहिणी हैं. मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक कनिका ने रांची की JVM श्यामली स्कूल से पढ़ाई-लिखाई की है. इसके बाद उन्होंने दिल्ली यूनिवर्सिटी के मिरांडा हाउस से ग्रेजुएशन किया है. उन्होंने जेएनयू से पोस्टग्रेजुएशन भी किया है. कनिका की उपलब्धियां कम नहीं हैं. उन्होंने नेट जेआरएफ 2019 की परीक्षा में भी शानदार प्रदर्शन किया था. लाइफ साइंसेस सब्जेक्ट में उन्हें पूरे देश में दूसरी रैंक हासिल हुई थी.
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तीन साल की कड़ी मेहनत का मिला फल
कनिका ने तीन साल तक कड़ी मेहनत की और उन्हें इसका फल मिला. वह दो बार इंटरव्यू राउंड तक पहुंची लेकिन फिर भी उनका सिलेक्शन नहीं हो पाया. लेकिन वह लगातार मेहनत करती रहीं. वह अपनी सफलता का श्रेय अपनी मम्मी-पापा और परिवारवालों को देती हैं. उन्होंने कहा कि बिना परिवार के सपोर्ट के वह कभी भी यह सफलता हासिल नहीं कर पातीं. आज जब उन्हें यह सफलता मिली है तो उनके परिवार के साथ उनके इलाके के लोग भी काफी खुश हैं और उनपर गर्व कर रहे हैं.
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कनिका की सफलता उन सभी उम्मीदवारों के लिए प्रेरणास्रोत है जो छोटे शहरों से आते हैं. सफलता किसी शहर या जगह की वजह से नहीं मिलती बल्कि यह आपके परिश्रम, निरंतरता और दृढ़ इच्छाशक्ति पर निर्भर करती है. अगर आपमें कुछ कर गुजरने का जज्बा और काबिलियत हो तो आपको अपनी मंजिल हासिल करने से कोई रोक नहीं सकता. कनिका की सफलता से हम सीख सकते हैं कि हमें अपनी असफलताओं से निराश नहीं होना चाहिए बल्कि उसे अपनी ताकत बनाकर दोगुनी मेहनत से अपनी मंजिल तक पहुंचना चाहिए.
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