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विकास दिव्यकीर्ति न्यायपालिका पर टिप्पणी कर बुरे फंस गए हैं. राजस्थान की एक कोर्ट ने उनके खिलाफ दायर मानहानि की याचिका पर संज्ञान लिया है. जानें आखिर क्या है पूरा मामला
यूपीएससी की तैयारी करवाने वाले जाने-माने शिक्षक विकास दिव्यकीर्ति न्यायपालिका पर टिप्पणी कर बुरे फंस गए हैं. राजस्थान की एक कोर्ट ने उनके खिलाफ दायर मानहानि की याचिका पर संज्ञान लिया है. न्यायिक मजिस्ट्रेट मनमोहन चंदेल की अध्यक्षता वाली अदालत ने विकास दिव्यकीर्ति पर बीएनएस अधिनियम 2023 की धारा 356 की कई उपधाराओं के तहत आरोप लगाए हैं. कोर्ट ने दिव्यकीर्ति को 22 जुलाई को अदालत में व्यक्तिगत रूप से पेश होने का निर्देश दिया है.
अजमेर की अदालत में दायर याचिका में दिव्यकीर्ति के यूट्यूब पर 'IAS vs Judge कौन ज्यादा ताकतवर?' शीर्षक वाले वीडियो में दिए गए विवादास्पद बयानों का उल्लेख किया गया है. इसमें उन्होंने कथित तौर पर हाई कोर्ट या सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश बनने की प्रक्रिया के बारे में अनुचित टिप्पणियां की थीं. शिकायतकर्ता अधिवक्ता कमलेश मनोलिया ने कोर्ट के सामने सोशल मीडिया क्लिप प्रस्तुत की. इस क्लिप में दिव्यकीर्ति ने न्यायिक नियुक्तियों और कॉलेजियम प्रणाली के संबंध में 'जुगाड़' (अनौपचारिक व्यवस्था) पर चर्चा की थी.
कोर्ट को बताया गया कि विवादास्पद वीडियो में विकास दिव्यकीर्ति ने कथित तौर पर दावा किया था कि कॉलेजियम की मंज़ूरी के बाद भी संभावित न्यायाधीशों की फाइलें सरकारी लालफीताशाही के कारण अटकी रह सकती हैं. उन्होंने कथित तौर पर ज़िला न्यायाधीशों और ज़िला मजिस्ट्रेटों की शक्तियों के बीच विवादास्पद तुलना भी की थी और यह कहा कि न्यायिक शक्ति पुलिस के सहयोग पर निर्भर है. शिकायतकर्ता की कानूनी टीम ने तर्क दिया कि इस तरह के बयान न्यायपालिका की छवि को नुकसान पहुंचाते हैं.
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