एजुकेशन
कहते हैं कुछ सुपरवुमन होती हैं जो कुछ भी ठान लेती हैं तो उसे पूरा करके ही दम लेती हैं, IAS प्रगति रानी की कहानी भी कुछ ऐसी ही है जिन्होंने अपने दुधमुंहे बच्चे के साथ यूपीएससी की तैयारी शुरू की और उसे क्रैक करके ही दम लिया...
महिलाओं को सुपरवुमन कहा जाता है क्योंकि वह एक ही समय में कई जिम्मेदारियां बखूबी संभाल लेती है. हालांकि कई बार यह आसान नहीं होता लेकिन घर वालों और जीवनसाथी के सहयोग से कभी-कभी नामुमकिन सा लगने वाला लक्ष्य भी हासिल हो जाता है. आज हम आपको जिस शख्सियत से आपको मिलवाने जा रहे हैं उनकी कहानी भी काफी प्रेरणादायक है.
हरियाणा के रोहतक के महम कस्बे की रहने वाली प्रगति के पिता एक प्राइमरी टीचर हैं और मां स्वास्थ्य विभाग में कार्यरत हैं. उनकी शादी अतुल वर्मा से हुई है जो डॉक्टर हैं. प्रगति खुद मेडिकल बैकग्राउंड से आती हैं और रेडियोलॉजिस्ट हैं. मेडिकल फील्ड में अच्छे करियर के बावजूद उन्होंने सिविल सेवा चुना क्योंकि वह समाज सेवा के लिए सिविल सेवा को बेस्ट मानती हैं.
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हालांकि प्रगति का यूपीएससी का सफर आसान नहीं था. जब उन्होंने इस कठिन परीक्षा की तैयारी शुरू की थी तो उनका बेटा महज 6 महीने का था. उनके पति एमडी की पढ़ाई कर रहे थे इसलिए उनसे मदद मिलना भी मुश्किल हो गया था लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी और यूपीएससी क्रैक करके ही दम लिया. उनका यूपीएससी का सफर साल 2021 से शुरू हुआ था लेकिन प्रीलिम्स में कुछ नंबरों से वह चूक गईं लेकिन उन्होंने असफलता को खिद पर हावी नहीं होने दिया और 355वीं रैंक के साथ आईएएस सेवा पक्की कर ली.
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एक इंटरव्यू में उन्होंने बताया, 'मैं घर से ही सिविल सेवा की तैयारी करती थी और अपने बच्चे की देखभाल के साथ-साथ अपनी पढ़ाई में भी संतुलन बनाने की कोशिश करती थी. कभी-कभी वह अपनी दादी के साथ रहता था, जिससे मुझे अपनी पढ़ाई पर ध्यान केंद्रित करने के लिए थोड़ा समय मिल जाता था.'
वह बताती हैं कि बेटे के सोने के बाद वह पढ़ाई पर अच्छे से फोकस कर पाती थीं. लेकिन इतनी चुनौतियों के बाद भी उन्होंने दो बार यह परीक्षा पास की. इसके साथ ही हरियाणा सिविल सेवा में भी उनका दूसरा रैंक आया और उन्होंने नवंबर 2023 में अंबाला डिविजनल कमिश्नर के ऑफिसर ऑन स्पेशल ड्यूटी की भूमिका संभाली. लेकिन उनके मन में IAS बनने का सपना पल रहा था और आखिरकार 355वीं रैंक के साथ उन्होंने यह मुकाम हासिल कर लिया. आज उनकी कहानी ऐसी महिलाओं के लिए प्रेरणास्रोत है जो अपनी जिम्मेदारियों की वजह से अपने सपने को पीछे छोड़ देती हैं.
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