एजुकेशन
मध्य प्रदेश का जो बालाघाट नक्सलवाद की वजह से सुर्खियों में रहता था, वहां की बेटी ने नीट में इतिहास रच दिया है और अब वह डॉक्टरी की पढ़ाई कर अपने सपने को साकार करने जा रही हैं, जानें मुस्कान डोंगरे की सफलता की कहानी...
मध्य प्रदेश का बालाघाट जिला अक्सर नक्सलवाद के कारण चर्चा में रहता है. लेकिन बालाघाट की बेटियां जिले के बारे में लोगों की धारणा बदल रही हैं. बालाघाट विभिन्न क्षेत्रों में लगातार नई ऊंचाइयों को छू रहा है. अब बालाघाट के एक छोटे से गांव की एक बेटी एमबीबीएस की पढ़ाई करने जा रही है. कटंगी विकासखंड के महादुली गांव की मुस्कान डोंगरे डॉक्टर बनने की राह पर हैं. पहले चरण में चयनित मुस्कान अब सरकारी कॉलेज में मेडिकल की पढ़ाई करेंगी.
मध्य प्रदेश चिकित्सा शिक्षा विभाग ने 18 अगस्त को एमपी नीट यूजी 2025 काउंसलिंग के पहले दौर के सीट अलॉटमेंट का रिजल्ट जारी किया. नीट में 4343वीं रैंक हासिल करने वाली मुस्कान डोंगरे को शहडोल के बिरसा मुंडा कॉलेज में सीट आवंटित की गई है. मुस्कान के परिजनों और ग्रामीणों में बेहद खुशी का माहौल है.
महादुली गांव में पहली बार कोई बेटी डॉक्टर बन रही है. मुस्कान के माता-पिता उसकी इस उपलब्धि पर गर्व महसूस कर रहे हैं. मुस्कान ने बताया कि डॉक्टर बनना उसका सपना था जिसकी प्रेरणा उसे अपनी बड़ी बहन डॉ. रोशनी नागदेवा से मिली. रोशनी मुस्कान की मौसी की बेटी हैं. मुस्कान के पिता सरोज डोंगरे एक शिक्षक हैं और उनकी मां विमता एक आंगनवाड़ी कार्यकर्ता हैं. मुस्कान पढ़ाई में हमेशा अव्वल रही हैं और उन्होंने जवाहर नवोदय विद्यालय वारासिवनी से अपनी शिक्षा पूरी की है.
मुस्कान ने बताया कि डॉक्टर बनना उनका सपना था और अब वह सच हो रहा है. उन्होंने ज़ोर देकर कहा कि सफलता के लिए कड़ी मेहनत और लगन बेहद ज़रूरी है. मीडिया को दिए इंटरव्यू में उन्होंने बताया कि NEET की तैयारी के दौरान कई बार उन्हें निराशा भी हुई, लेकिन उनके परिवार ने उन्हें आगे बढ़ने के लिए प्रोत्साहित किया. मुस्कान अपनी सफलता का श्रेय अपने परिवार और शिक्षकों को देती हैं. उनकी मां ने भावुक होते हुए कहा कि उन्हें गर्व है कि उनकी बेटी डॉक्टर बनेगी और परिवार का नाम रोशन करेगी.
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