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मजदूर के बेटे ने किया कमाल, देश की आजादी के बाद पहली बार इस गांव में कोई हाईस्कूल में हुआ पास

उत्तर प्रदेश के लखनऊ के पास एक गांव में जश्न का माहौल है क्योंकि इस गांव का लड़का रामकेवल देश की आजादी के बाद इस गांव से हाईस्कूल पास करने वाला पहला शख्स बना है. जानें पूरी कहानी...

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मजदूर के बेटे ने किया कमाल, देश की आजादी के बाद पहली बार इस गांव में कोई हाईस्कूल में हुआ पास

Ramkeval Barabanki

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ऐसे समय में जब पढ़ाई के मामले में इतनी प्रतिस्पर्धा है कि हर स्टूडेंट 90 प्रतिशत या उससे अधिक मार्क्स हासिल करने की कोशिश कर रहा है. उत्तर प्रदेश के लखनऊ के पास एक गांव में जश्न का माहौल है. ऐसा इसलिए क्योंकि इस गांव का लड़का रामकेवल देश की आजादी के बाद इस गांव से हाईस्कूल पास करने वाला  पहला शख्स बना है.

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शादी-ब्याह में लाइट उठाकर करता है कमाई

15 साल यह लड़का लखनऊ से 30 किलोमीटर दूर निजामपुर गांव का रहने वाला है और दलित समुदाय से है. वह निजामपुर के पास अहमदपुर में सरकारी इंटर कॉलेज का छात्र था. चार भाई-बहनों में वह सबसे बड़ा भाई है और रोज़ी-रोटी कमाने के लिए दिन में छोटे-मोटे काम करता था और रात में परीक्षा की तैयारी करता था. मीडिया से बातचीत में रामकेवल ने बताया कि वह शादी-ब्याह में लाइट लेकर जाता था और रोज़ाना 250 से 300 रुपये कमाकर घर वालों की आर्थिक मदद करता था.

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पिता मजदूर तो मां स्कूल में बनाती हैं खाना

रामकेवल की इस सफलता पर बाराबंकी के जिलाधिकारी शशांक त्रिपाठी ने उसे और उसके माता-पिता को सम्मानित किया और बच्चे को पढ़ाई में हरसंभव मदद का भरोसा भी दिलाया. एक साधारण परिवार से ताल्लुक रखने वाले रामकेवल की मां एक स्कूल में खाना बनाती हैं, जबकि उनके पिता परिवार का भरण-पोषण करने के लिए मज़दूरी करते हैं. 

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भाईयों को भी पढ़ने में कर रहे मदद

रामकेवल ने बताया कि शादी से देर से आने के बावजूद वे घर पर सोलर लैंप के नीचे कम से कम दो घंटे पढ़ाई करते थे. उन्होंने बताया, 'गांव में कुछ लोग मेरा मजाक उड़ाते थे और कहते थे कि मैं कभी हाई स्कूल पास नहीं कर पाऊंगा. लेकिन मुझे हमेशा विश्वास था कि मैं उन्हें गलत साबित कर दूंगा.' रामकेवल न सिर्फ अपनी पढ़ाई पूरी कर रहे हैं बल्कि अपने भाई-बहनों को भी पढ़ने में मदद कर रहे हैं. उनका एक भाई नौवीं कक्षा में, दूसरा पांचवीं में और सबसे छोटा कक्षा 1 में है. रामकेवल ने न सिर्फ खुद सफलता हासिल की है बल्कि गांव के उस लड़कों के लिए भी मिसाल बने हैं जो किसी वजह से अपनी पढ़ाई पूरी नहीं कर पा रहे हैं लेकिन अपनी मंजिल हासिल करना चाहते हैं.

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