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अब इंसानों की क्लास में बैठकर 'डॉ. AI' बनेगा रोबोट, चीन की यूनिवर्सिटी ने दिया Ph.D में एडमिशन

दुनिया में पहली बार एक एआई रोबोट पीएचडी की पढ़ाई करेगा. चीन ने इस रोबोट को अपनी यूनिवर्सिटी में दाखिला भी दे दिया है. जानें आखिर क्या है पूरा मामला...

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अब इंसानों की क्लास में बैठकर 'डॉ. AI' बनेगा रोबोट, चीन की यूनिवर्सिटी ने दिया Ph.D में एडमिशन

Xueba 01

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पिछले कुछ साल में पूरी दुनिया एआई तकनीक की ओर तेज़ी से बढ़ रही है. हर देश इस फील्ड में प्रगति करना चाहता है लेकिन अगर इस टेक्निक में किसी देश का सबसे पहले नाम आता है तो वह चीन है. चीन ने एआई के जरिए रोबोटिक्स में भी काफी उपलब्धियां हासिल की हैं. चीन ने एआई के ज़रिए ह्यूमनॉइड रोबोट बनाए हैं. ये ह्यूमनॉइड रोबोट फ़ुटबॉल ( रोबोट फ़ुटबॉल वीडियो ) और बॉक्सिंग ( रोबोट बॉक्सिंग वीडियो ) में प्रतिस्पर्धा करते रहे हैं .

एआई रोबोट करेगा पीएचडी

अब चीन ने एक और अहम कदम उठाया है. दुनिया में पहली बार एक एआई रोबोट पीएचडी की पढ़ाई करेगा. चीन ने इस रोबोट को अपनी यूनिवर्सिटी में दाखिला भी दे दिया है. इस ह्यूमनॉइड रोबोट का नाम ज़ुएबा 01 रखा गया है. अगले चार साल के लिए इस ज़ुएबा 01 रोबोट को शंघाई यूनिवर्सिटी ऑफ़ साइंस एंड टेक्नोलॉजी में पीएचडी के लिए दाखिला मिल गया है. यह इस संस्थान की एक अहम पहल है. ज़ुएबा 01 रोबोट चीनी ओपेरा सब्जेक्ट पर रिसर्च करेगा.

एक मानव जैसा रोबोट

ज़ुएबा 01 एक मानव जैसा दिखने वाला रोबोट है. इसकी त्वचा सिलिकॉन से बनी है. इसके चेहरे के हाव-भाव भी इंसानों जैसे हैं. इस रोबोट का वजन 30 किलो है और यह 1.75 मीटर लंबा है. यह रोबोट चलता है, बोलता है, सवालों के जवाब देता है और एक रिसर्चर की तरह काम करता है.

ज़ुएबा 01 का आधिकारिक तौर पर सितंबर 2025 में पीएचडी के लिए रजिस्ट्रेशन होगा. यह किसी भी दूसरे इंसानी स्टूडेंट की तरह ही अध्ययन, शोध और अपने निष्कर्ष देगा. चीन की इस पहल ने पूरी दुनिया का ध्यान खींचा है. यह भविष्य के लिए एक नई शुरुआत है लेकिन एक्सपर्ट्स ने आशंका जताई है कि ऐसे कदम से शिक्षा के क्षेत्र में इंसान पिछड़ जाएगा. एआई ने कई चीजों को आसान और सरल बनाया है लेकिन एक्सपर्ट्स ने संभावना जताई है कि इसके परिणाम भी उतने ही गंभीर होंगे.

एआई वर्तमान में शिक्षा क्षेत्र में स्टूडेंट्स की मदद कर रहा है लेकिन इसने काफी स्टूडेंट्स को खुद पर निर्भर बना दिया है जिससे उनके कौशल में गिरावट आ रही है. यह आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और ह्यूमन इंटेलिजेंस में नया चैप्टर हो सकता है लेकिन इंसानों के लिए इसके नकारात्मक परिणाम भी होंगे.

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