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पराग जैन को खुफिया एजेंसी रिसर्च एंड एनालिसिस विंग (R&AW) का नया बॉस बनाया गया है, जानें वह कितने पढ़े-लिखे हैं और उन्हें हर महीने कितनी सैलरी मिलेगी...
मोदी सरकार ने पराग जैन को भारत की बाहरी खुफिया एजेंसी रिसर्च एंड एनालिसिस विंग (R&AW) का नया चीफ नियुक्त किया है. पराग पंजाब कैडर के 1989 बैच के आईपीएस अधिकारी हैं जो रवि सिन्हा की जगह लेंगे, जो 30 जून को अपने पद से रिटायर हो रहे हैं. पराह जैन अपनी प्रमोशन से पहले रॉ की तकनीकी शाखा एविएशन रिसर्च सेंटर (ARC) के हेड के तौर पर कार्यरत थे. इस दौरान उनके पास प्रशासन और कार्मिक प्रबंधन के अलावा पाकिस्तान डेस्क की जिम्मेदारी भी थी.
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पराग जैन का जन्म 1 जनवरी 1967 को पंजाबमें हुआ था. उन्होंने अमृतसर के स्थानीय स्कूल में अपनी पढ़ाई-लिखाई की है. वह शुरू से ही इतिहास और राजनीति विज्ञान के होनहार स्टूडेंट रहे हैं. अपनी ग्रेजुएशन की डिग्री पूरी करने के बाद उन्होंने इतिहास से ही मास्टर डिग्री भी हासिल की और इसके बाद पब्लिक सर्विस में एमबीए किया. उन्होंने साल 1988 में यूपीएससी की सिविल सेवा परीक्षा पास की और उन्हें इंडियन पुलिस सर्विस अलॉट किया गया.
1990 के दशक की शुरुआत में पंजाब में एक युवा आईपीएस अधिकारी के रूप में पराग जैन ने उग्रवाद के चरम पर राज्य के कुछ सबसे चुनौतीपूर्ण जिलों में काम किया. उन्होंने बठिंडा, होशियारपुर, मानसा और चंडीगढ़ में वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक के रूप में अहम पदों पर काम किया. बिना किसी कठोरता का सहारा लिए चरमपंथी नेटवर्क को खत्म करने के लिए उन्हें काफी तारीफ भी मिली.
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जनवरी 2021 में पराग को पंजाब में पुलिस महानिदेशक (DGP) के पद पर पदोन्नत किया गया, इस दौरान वे केंद्रीय प्रतिनियुक्ति पर भी रहे. जमीनी स्तर पर पुलिसिंग में उनके अनुभव ने भारत की बाहरी खुफिया एजेंसी R&AW का ध्यान खींचा. उन्होंने कनाडा में विदेशी पोस्टिंग ली जहां उन्होंने खालिस्तानी नेटवर्क की निगरानी की और श्रीलंका में संघर्ष के बाद के नाजुक स्थिति के दौरान स्थानीय अधिकारियों के साथ निकटता से समन्वय किया.
रॉ में पराग पाकिस्तान डेस्क के प्रमुख बने और उन्होंने जम्मू-कश्मीर में अनुच्छेद 370 को हटाने और 2019 में ऑपरेशन बालाकोट जैसी अहम राष्ट्रीय घटनाओं के दौरान खुफिया प्रयासों का मार्गदर्शन किया. मानव खुफिया (HUMINT) और तकनीकी खुफिया (TECHINT) के उनके मिश्रण ने उन्हें एक ऑपरेशन मास्टर के रूप में पहचान दिलाई.
हाल ही में पराग ने एविएशन रिसर्च सेंटर (ARC) का नेतृत्व किया जो R&AW की हवाई निगरानी शाखा है. यह सिग्नल ट्रैकिंग, इमेजरी टोही और गुप्त हवाई मिशनों के लिए जिम्मेदार है. मई 2025 में वे ऑपरेशन सिंदूर के आर्किटेक्ट के रूप में उभरे जहां ARC से मिली खुफिया जानकारी ने पाकिस्तान और पीओके में आतंकी प्रशिक्षण शिविरों का पता लगाया. उस मिशन के सटीक मिसाइल हमलों ने उनकी रणनीतिक सूझबूझ को उजागर किया और भारत के सुरक्षा अधिकारियों में सुपर जासूस के रूप में उनकी प्रतिष्ठा को और मजबूत किया.
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अगर रॉ के चीफ की सैलरी की बात की जाए तो उनके वेतन और भत्तों को लेकर अटकलें लगाई जाती रही हैं. हालांकि नौकरी की संवेदनशीलता के कारण सटीक आंकड़ा सार्वजनिक रूप से नहीं बताया गया है लेकिन रिपोर्ट बताती है कि रॉ प्रमुख प्रति माह लगभग 2.5 लाख रुपये कमाते हैं. यह 7वें वेतन आयोग के तहत भारत सरकार में वरिष्ठतम सचिवों के वेतनमान के अनुरूप है.
उनके पैकेज में बेसिक सैलरी, महंगाई भत्ता (डीए), मकान किराया भत्ता (एचआरए) और कई विशेष भत्ते शामिल हैं. वेतन के अलावा रॉ प्रमुख को कई सुविधाएं भी दी जाती हैं जिसमें सरकारी आवास, सरकारी वाहन, मेडिकल लाभ, सुरक्षा कवर, यात्रा भत्ते और नौकरी की प्रकृति से संबंधित दूसरे भत्ते भी शामिल हैं. कुल मिलाकर इस पद पर कुल मासिक पैकेज 3.5 से 4 लाख रुपये तक हो सकता है.
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