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लुधियाना के आर्यन गुप्ता ने नीट यूजी 2026 की परीक्षा में जीत का परचम लहरा दिया है और 715 नंबर लाकर टॉपर बने हैं, जानें उनकी सफलता की कहानी...
कहते हैं कि अगर इंसान मुश्किल हालात में भी हार न माने और लगातार मेहनत करता रहे, तो सफलता आखिरकार उसके कदम चूमती है. पंजाब के लुधियाना के रहने वाले 17 के आर्यन गुप्ता ने कुछ ऐसा ही कर दिखाया है. NEET UG 2026 परीक्षा पेपर लीक विवाद के बाद रद्द हो गई थी, जिससे लाखों स्टूडेंट्स की ही तरह आर्यन का सपना भी टूटता हुआ नजर आया. लेकिन उन्होंने हिम्मत नहीं हारी. दोबारा हुई परीक्षा में उन्होंने शानदार प्रदर्शन करते हुए 720 में से 715 नंबर हासिल किए और हरियाणा के पांशुल बंसल के साथ संयुक्त रूप से पहली रैंक हासिल की.
आर्यन बताते हैं कि जब उन्हें परीक्षा रद्द होने की खबर मिली तो वह बहुत रोए थे. उन्हें लगा कि महीनों की मेहनत एक झटके में बेकार हो गई. हालांकि, अगले ही दिन उन्होंने खुद को संभाला और फिर से तैयारी शुरू करने का फैसला किया. उन्होंने कहा, 'मैंने तय कर लिया था कि इतनी आसानी से हार नहीं मानूंगा. दोबारा पढ़ाई की लय में लौटने में करीब एक हफ्ता लगा, लेकिन उसके बाद मैंने पूरी ताकत के साथ तैयारी शुरू कर दी.'
आर्यन के इस मुश्किल दौर में उनके बड़े भाई आदित्य गुप्ता सबसे बड़े सहारा बने. आदित्य खुद एमबीबीएस की पढ़ाई कर रहे हैं. उन्होंने आर्यन को समझाया कि दोबारा परीक्षा देने का मौका मिलना नुकसान नहीं, बल्कि अपनी परफॉर्मेंस को और बेहतर बनाने का एक नया मौका है. भाई की इस बात ने आर्यन का आत्मविश्वास बढ़ाया और उन्होंने नई एनर्जी के साथ अपनी तैयारी शुरू.
आर्यन ने सराभा नगर के सेक्रेड हार्ट कॉन्वेंट स्कूल से 12वीं की पढ़ाई की है. उन्होंने बताया कि शुरुआत में दोबारा तैयारी करना आसान नहीं था, लेकिन फिर उन्हें एहसास हुआ कि वे अकेले नहीं हैं. उनके जैसे 22 लाख और स्टूडेंट्स भी इसी दौर से गुजर रहे हैं. इस सोच ने उन्हें लगातार आगे बढ़ने की प्रेरणा दी.
आर्यन सिर्फ पढ़ाई ही नहीं बल्कि खेल-कूद में भी अव्वल हैं. वह स्टेट लेवल टेबल टेनिस प्लेयर हैं. इसके साथ ही उन्होंने सीबीएसई की 12वीं बोर्ड की परीक्षा में 98.4 प्रतिशत मार्क्स भी हासिल किए हैं. उनका मानना है कि पढ़ाई में सफलता केवल लंबे समय तक किताबों के सामने बैठने से नहीं मिलती, बल्कि समय का सही इस्तेमाल सबसे ज्यादा मायने रखता है.
उन्होंने बताया कि तैयारी के दौरान वह रोजाना 16 से 17 घंटे तक पढ़ाई करते थे. लेकिन, लगातार पढ़ने के बजाय वह बीच-बीच में छोटे-छोटे ब्रेक भी लेते थे, जिससे उन्हें मेंटल स्ट्रेस न हो और नई ताजगी के साथ वह अपनी तैयारी कर सकें. खाली समय में वह सोशल मीडिया का इस्तेमाल करते थे और नेटफ्लिक्स देखकर खुद को रिलैक्स करते थे. उनका कहना है कि मानसिक रूप से तरोताजा रहना भी अच्छी तैयारी के लिए बेहद जरूरी है.
आर्यन अपनी सफलता का श्रेय अपने शिक्षकों, कोचिंग संस्थान और परिवार को देते हैं. उनका कहना है कि सही मार्गदर्शन और परिवार का भरोसा कठिन से कठिन परिस्थितियों में भी आगे बढ़ने की ताकत देता है. उनके पिता डॉ. सचिन गुप्ता एनेस्थेटिस्ट हैं, जबकि उनकी मां डॉ. रीनू गुप्ता गायनेकोलॉजिस्ट हैं. परिवार के सहयोग और अपनी मेहनत के दम पर आर्यन ने यह साबित कर दिया कि परिस्थितियां चाहे कितनी भी मुश्किल क्यों न हों, अगर लक्ष्य पर फोकस बना रहे तो सफलता जरूर मिलती है.