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ऋषिकेश के डीएसबी इंटरनेशल स्कूल की स्टूडेंट अन्वेषा सीबीएसई बोर्ड से न्याय की गुहार लगा रही हैं. अन्वेषा का कहना है कि उन्हें उनकी परफॉर्मेंस के हिसाब से 12वीं में नंबर नहीं मिले और रिवैल्यूएशन में भी उन्हें हक के नंबर नहीं मिले, जानें आखिर क्या है पूरा मामला...
सीबीएसई की ऑनस्क्रीन मार्किंग (OSM) प्रक्रिया पर लगातार सवाल उठ रहे हैं. इस बार उत्तराखंड के हरिद्वार की रहने वाली स्टूडेंट अन्वेषा नागपाल ने बोर्ड की मूल्यांकन प्रक्रिया पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं. अन्वेषा ऋषिकेश के डीएसबी इंटरनेशनल स्कूल की स्टूडेंट हैं. उनका कहना है कि 13 मई 2026 को जारी हुए सीबीएसई के 12वीं के रिजल्ट में उन्हें उनकी परफॉर्मेंस के अनुसार नंबर नहीं मिले.
डीएनए हिंदी ने इस पूरे मामले को समझने के लिए उनकी मां कनिका नागपाल से बातचीत की. कनिका नागपाल ने बताया कि रिजल्ट उम्मीद के मुताबिक नहीं आने के बाद उन्होंने सीबीएसई की तय प्रक्रिया का पालन करते हुए री-इवैल्यूएशन के लिए अप्लाई किया. पुनर्मूल्यांकन के बाद योगा और केमिस्ट्री के नंबरों में तो सुधार हुआ, लेकिन फिजिक्स में 3 नंबर, कंप्यूटर साइंस में 4 नंबर और इंग्लिश में केवल 1 नंबर बढ़ाया गया. परिवार का कहना है कि नंबरों की ये बढ़ोतरी भी उनकी बेटी के प्रदर्शन के मुताबिक नहीं है. उनका यह भी आरोप है कि इस पूरी प्रक्रिया में स्कूल की ओर से भी उन्हें कोई सहयोग नहीं मिला.
अन्वेषा नागपाल की 12वीं की मार्कशीट

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अन्वेषा नागपाल का कहना है, 'मैं 21 जून 2026 को घोषित सीबीएसई कक्षा 12 के री-इवैल्यूएशन के नतीजों से बिल्कुल भी संतुष्ट नहीं हूं. सीबीएसई का कहना है कि आंसर शीट का मूल्यांकन दो इवैल्यूएटर्स करते हैं लेकिन मेरे मामले में मार्किंग स्कीम को सही से फॉलो नहीं किया गया. मेरा मामला रांची की अवनी केजरीवाल से मिलता-जुलता है. अगर उन्हें न्याय मिल सकता है तो फिर मुझे क्यों नहीं?
अन्वेषा का दावा है कि उन्होंने अपनी स्कैन की गई आंसर शीट की जांच ऐसे टीचर्स से करवाई जो खुद बोर्ड के इवैल्यूएशन का हिस्सा रह चुके हैं. इसके अलावा उन्होंने अपने आंसर का मिलान सीबीएसई की ऑफिशियल मार्किंग स्कीम से भी किया. इस हिसाब से उन्हें इंग्लिश में 97.5, कंप्यूटर साइंस में 98 और फिजिक्स में 93 नंबर मिलने चाहिए थे. उनका कहना है कि वह इन तीनों सब्जेक्ट्स में हमेशा टॉपर रही हैं और उनके कई उत्तर मार्किंग स्कीम से हूबहू मेल खाते हैं. इसके बावजूद री-इवैल्यूएशन के बाद भी उन्हें न्याय नहीं मिला.
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यहां चेक करें रिवैल्यूएशन का एप्लीकेशन

अन्वेषा का यह भी कहना है कि उन्होंने सीबीएसई के चेयरमैन, कंट्रोलर और सेक्रेटरी समेत सभी संबंधित अधिकारियों को ईमेल भेजकर अपनी बात रखने की कोशिश की, लेकिन उन्हें अब तक कोई संतोषजनक जवाब नहीं मिला है. उनका कहना है कि वह केवल उतने नंबरों की मांग कर रही हैं जिनकी वह असल में हकदार हैं. इस पूरे मामले का सीधा असर उनके भविष्य पर पड़ रहा है क्योंकि कई यूनिवर्सिटी में 12वीं के प्रतिशत के आधार पर एडमिशन मिलता है. ऐसे में उन्हें अगर उनके हक के नंबर नहीं मिलते तो इससे उनका करियर प्रभावित हो सकता है.