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नेत्रहीन रवि राज की सफलता में उनकी मां ने अहम भूमिका निभाई और अपने प्रेम और समर्पण के बल पर अपने बेटे को आईएएस बनाकर ही दम लिया. आज हम आपको इस मां-बेटे की सफलता की कहानी के बारे में बताने वाले हैं...
यूपीएससी के नतीजे आने के बाद देश के भावी आईएएस-आईपीएस अधिकारियों की सफलता की कहानी वायरल होती रहती है. उनमें से कुछ कहानियां बेहद खास होती हैं जो हमारे दिल को अंदर तक झकझोर देती हैं. बिहार के रवि राज की कहानी भी कुछ ऐसी ही है जिनकी आंखों की रोशनी कभी उनके सपने को तोड़ नहीं पाई. उनकी सफलता में उनकी मां ने अहम भूमिका निभाई और अपने प्रेम और समर्पण के बल पर अपने बेटे को आईएएस बनाकर ही दम लिया. आज हम आपको इस मां-बेटे की सफलता की कहानी के बारे में बताने वाले हैं.
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बिहार के नवादा जिले के महुली गांव के रवि राज ने यूपीएससी सिविल सेवा परीक्षा 2024 में 182वीं रैंक हासिल की है. किसान रंजन कुमार सिन्हा और गृहिणी विभा सिन्हा के घर जन्मे रवि की दृष्टिहीनता को उनकी मां ने कभी उनपर हावी नहीं होने दिया. मां उनकी मार्गदर्शक बन गईं. वह किताबों को जोर से पढ़कर अपने बेटे को सुनाती थीं और उनके जवाब लिखती थीं. घर के कामकाज को संभालते हुए वह यूट्यूब से रवि के लिए नोट्स भी बनाती थीं.
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यूपीएससी क्रैक करने से पहले रवि ने 2023 में 69वीं BPSC परीक्षा भी 490वीं रैंक के साथ पास की. इसके बाद राजस्व अधिकारी के पद पर उनका सिलेक्शन हुआ. हालांकि बढ़िया सरकारी नौकरी होने के बावजूद उन्होंने अपनी तैयारी जारी रखी और नए जोश के साथ यूपीएससी की परीक्षा दी. इस पूरे सफर के दौरान परिवार ने उनका हर कदम पर समर्थन किया. मां ने खासकर सामाजिक बाधाओं और शैक्षणिक चुनौतियों को पार करने में उनकी काफी मदद की.
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रवि की सफलता की कहानी सिर्फ एक स्टूडेंट की नहीं है बल्कि मां और बेटे की अटूट पार्टनरशिप और संघर्ष की भी है. विभा अपने नेत्रहीन बेटे की आंखें बनीं और ढ़ने-लिखने और समझने के हर कदम पर उनका साथ दिया. मीडिया से बातचीत में रवि ने बताया, 'मेरी सफलता में मेरी मां का भी बराबर का योगदान है. उन्होंने अपना जीवन एक स्टूडेंट की तरह जिया ताकि मैं कुछ कर सकूं.' आज रवि अपनी सफलता की कहानी से लाखों उम्मीदवारों के प्रेरणास्रोत बने हुए हैं.
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