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उम्र 2 साल, जवाब देने में बेमिसाल... असम के इस बच्चे को लोग क्यों कह रहे 'ChatGPT Boy'?

असम के 1 साल 11 महीने के उत्कर्ष हजारिका ने अपने टैलेंट के दम पर इंडिया बुक ऑफ रिकॉर्ड्स में अपना नाम भी दर्ज करवाया है. जानें उनकी किस काबिलियत पर लोग हो रहे हैं मुरीद...

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उम्र 2 साल, जवाब देने में बेमिसाल... असम के इस बच्चे को लोग क्यों कह रहे 'ChatGPT Boy'?

असम के Utkarsh Hazarika का इंडिया बुक ऑफ रिकॉर्ड्स में दर्ज हुआ नाम. (Image Credit: Social Media)

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काबिलियत उम्र की मोहताज नहीं होती और असम के दो साल के बच्चे ने इस बात को साबित किया है. इस बच्चे की याददाश्त बेहद कमाल की है. यह बच्चा इतनी कम उम्र में चीजों, गिनती और शब्दों को याद रखने में उस्ताद है. असम के मोरीगांव जिले के सोनारिगांव के 1 साल 11 महीने के उत्कर्ष हजारिका ने अपने टैलेंट के दम पर इंडिया बुक ऑफ रिकॉर्ड्स में अपना नाम भी दर्ज करवा लिया है. 

उत्कर्ष ने अपनी याददाश्त, ज्ञान और लोगों के सवालों के फटाफट जवाब देने की काबिलियत से उन्हें दीवाना बना लिया है. कुछ लोग इसे गूगल बॉय तो कुछ इसे चैटजीपीटी बॉय तक कहने लगे हैं. जिस उम्र में बच्चों को शब्दों को बोलने तक में भी कठिनाई होती है और वह अपने आसपास की चीजों को एक्सप्लोर करके सीखना शुरू करते हैं, उस उम्र में इस बच्चे का अनोखा रिकॉर्ड लोगों को हैरान कर रहा है. उत्कर्ष का जन्म 26 अगस्त 2024 को हुआ था.

इस बच्चे को क्या-क्या याद है?

उत्कर्ष के माता-पिता शुरू से ही उसे सीखने के लिए प्रोत्साहित करते रहे हैं. रिपोर्ट्स के मुताबिक,  वह 22 खाने की चीजें, 28 फल, 28 पक्षी, 24 सब्जियां और 28 वाद्ययंत्रों  को पहचान सकता है. इसके अलावा वह 12 फूलों, 11 प्रोफेशन, 26 शरीर के अंगों, 25 अंतरिक्ष की चीजों और 16 स्मारकों के नाम भी बता सकता है. 

इंडिया बुक ऑफ रिकॉर्ड्स के सर्टिफिकेट के मुताबिक, उत्कर्ष हफ्तों, महीनों, आठों ग्रह और सातों महाद्वीपों का नाम भी चुटकियों में बता देता है. इसके अलावा वह 10 नर्सरी के पोयम, इंग्लिश के अल्फाबेट और उनसे जुड़े शब्दों के साथ-साथ भारत के 17 राष्ट्रीय प्रतीकों के नाम भी सुना सकते हैं. वह 22 तरह के एक्शन कर सकता है और उसे 1 से 20 तक की गिनती भी आती है. 

बच्चे के पैरेंट्स ने क्या बताया?

उत्कर्ष की मां ने मीडिया से बातचीत में बताया कि बच्चे ने यह उपलब्धि नियमित पढ़ाई और परिवार के साथ-साथ लोगों से मिल रहे प्रोत्साहन से हासिल की है. उन्होंने बताया कि एक दिन उन्होंने उसे नेशनल सिंबल दिखाए और दो दिन बाद उससे इसके बारे में पूछा. इसके बाद भी उसे उन स्मारकों के नाम याद रहे. वह दो-तीन चिन्हों के नाम बता पाया. फिर पैरेंट्स ने इस वीडियो को इंडिया बुक ऑफ रिकॉर्ड्स को भेजा. उन्होंने भी बच्चों को मेधावी माना और ईमेल पर प्रशंसा पत्र भेजा. 

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