एजुकेशन
दिल्ली के जंतर-मंतर पर नीट यूजी पेपर लीक मामले के बाद अब झारखंड में भी हजारों उम्मीदवार JPSC और JSSC परीक्षाओं में अनियमितताओं को लेकर प्रदर्शन कर रहे हैं, जानें आखिर क्या है पूरा मामला जिसने उड़ा रखी है झारखंड सरकार की नींद...
दिल्ली के जंतर-मंतर पर नीट यूजी पेपर लीक मामले को लेकर हुए प्रोटेस्ट को पूरे देश ने देखा था. अब इसी तरह झारखंड में भी हजारों सरकारी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे हजारों उम्मीदवार सड़कों पर उतरकर भर्ती परीक्षाओं में पारदर्शिता और नियमित भर्ती कैलेंडर की मांग कर रहे हैं. विरोध प्रदर्शन का केंद्र झारखंड लोक सेवा आयोग (JPSC) की 14वीं संयुक्त सिविल सेवा परीक्षा है, लेकिन प्रदर्शन कर रहे छात्रों का कहना है कि उनका आंदोलन सिर्फ एक परीक्षा तक सीमित नहीं है. उनका आरोप है कि कई साल से भर्तियां समय पर नहीं निकलतीं, परीक्षाएं और रिजल्ट लगातार विवादों में घिरे रहते हैं, कानूनी मामलों की वजह से भर्ती प्रक्रिया लंबी खिंच जाती है और इन वजहों से पूरे सिस्टम पर उम्मीदवारों का भरोसा लगातार कम होता जा रहा है.
झारखंड का गठन साल 2000 में हुआ था, लेकिन स्थापना के बाद से पिछले करीब ढाई दशक में राज्य में संयुक्त सिविल सेवा परीक्षाएं नियमित रूप से आयोजित नहीं हो सकीं. स्टूडेंट्स का कहना है कि जिस परीक्षा का आयोजन लगभग हर साल होना चाहिए, उसे कई-कई साल तक खींचा जा रहा है. इसके अलावा आयोग के पास कोई तय वार्षिक भर्ती कैलेंडर भी नहीं है. आरोप है कि अलग-अलग साल की वैकेंसी को एक साथ जोड़कर एक ही संयुक्त भर्ती परीक्षा आयोजित की जाती है जिससे भर्ती प्रक्रिया और लंबी हो जाती है.
उदाहरण के तौर पर, 7वीं से 10वीं संयुक्त सिविल सेवा परीक्षा में अलग-अलग साल की वैकेंसी को मिलाकर भर्ती प्रक्रिया पूरी की गई थी. इसी तरह 11वीं से 13वीं संयुक्त सिविल सेवा परीक्षाओं की वैकेंसी को भी एक साथ जोड़कर भर्ती प्रक्रिया आगे बढ़ाई गई और इसका प्रीलिम्स एग्जाम 2024 में आयोजित हुआ. स्टूडेंट्स का कहना है कि जब किसी एक भर्ती पर कोर्ट केस, प्रशासनिक देरी या किसी दूसरे विवाद का असर पड़ता है तो उसके बाद आने वाली कई भर्तियां भी सालों तक प्रभावित होती रहती हैं.
उम्मीदवारों का कहना है कि सरकारी नौकरी की तैयारी में वे अपने जीवन के कई साल लगा देते हैं. लेकिन भर्ती विज्ञापन आने में देरी, परीक्षा और रिजल्ट का लंबा इंतजार, नियुक्ति प्रक्रिया का अटक जाना और इस दौरान अधिकतम आयु सीमा पार हो जाने की वजहों से कई उम्मीदवारों का करियर प्रभावित हो जाता है. उनका कहना है कि अनियमित भर्ती प्रक्रिया का सबसे बड़ा नुकसान युवाओं को उठाना पड़ रहा है.
स्टूडेंट्स का कहना है कि जेपीएससी में विवाद कोई नई बात नहीं है. साल 2003 में पहली संयुक्त सिविल सेवा परीक्षा के दौरान इतिहास विषय का पेपर लीक होने के आरोप के बाद परीक्षा कैंसिल करनी पड़ी थी. इसके बाद भी मामला नहीं सुधरा और आयोग की कई भर्तियां विवादों में रहीं.
शुरुआती साल में हुईं कुछ भर्तियों में चयन प्रक्रिया को लेकर भी गंभीर सवाल उठे थे. साल 2024 में सीबीआई ने एक पुराने विवाद में जेपीएससी के पूर्व चेयरमैन, तत्कालीन एग्जाम कंट्रोलर और इंटरव्यू बोर्ड से जुड़े सदस्यों समेत 50 लोगों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की थी. जांच एजेंसी ने आरोप लगाया कि चयन प्रक्रिया में कथित अनियमितताएं हुईं और प्रभावशाली लोगों से जुड़े कुछ उम्मीदवारों को अनुचित फायदा पहुंचाया गया. हालांकि, इन मामलों का आखिरी फैसला अदालत में होना बाकी है.
फिलहाल विवाद 14वीं संयुक्त सिविल सेवा परीक्षा को लेकर है. आयोग ने इस भर्ती के जरिए 103 पदों पर नियुक्ति के लिए आवेदन मांगे थे. प्रीलिम्स एग्जाम के बाद 2,204 उम्मीदवारों को मेन्स एग्जाम के लिए सफल घोषित किया गया. रिजल्ट जारी होने के बाद कई उम्मीदवारों ने चयन प्रक्रिया की पारदर्शिता पर सवाल उठाए. उनका आरोप है कि आयोग ने कैटिगरी वाइज कटऑफ मार्क्स पब्लिक नहीं किए और मेरिट लिस्ट से जुड़ी जानकारी भी उपलब्ध नहीं कराई गई.
इस दौरान सोशल मीडिया पर एक कथित ओएमआर शीट वायरल होने के बाद विवाद और बढ़ गया. दावा किया गया कि मेन्स एग्जाम के लिए चयनित एक उम्मीदवार ने प्रीलिम्स एग्जाम में सिर्फ 48 सवाल ही अटेम्प्ट किए थे. हालांकि वायरल ओएमआर शीट की प्रामाणिकता की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है और जांच एजेंसियों ने भी इस दावे पर अभी तक कोई टिप्पणी नहीं की है.
मामला बढ़ने के बाद झारखंड सरकार ने जांच के लिए सीआईडी की स्पेशल इन्वेस्टिगेटिव टीम (SIT) का गठन किया. जांच के दौरान जेपीएससी के कुछ कर्मचारियों, आउटसोर्सिंग एजेंसी से जुड़े कर्मियों और कई और आरोपियों को गिरफ्तार किया गया. अब तक इस मामले में 19 गिरफ्तारियां हो चुकी हैं. विवाद गहराने के बाद जेपीएससी के तत्कालीन चेयरमैन एल. खियांगते ने भी अपने पद से इस्तीफा दे दिया.
प्रदर्शन कर रहे उम्मीदवारों का कहना है कि सबसे बड़ी समस्या भर्ती प्रक्रिया में पारदर्शिता की कमी है. उनकी मांग है कि जेपीएससी और झारखंड कर्मचारी चयन आयोग (JSSC) समय पर कैटिगरी वाइज कटऑफ, फाइनल आंसर-की, इवैल्यूएशन से जुड़ी जरूरी जानकारियों के साथ मेरिट लिस्ट भी पब्लिक करे. उनका मानना है कि इससे भर्ती प्रक्रिया पारदर्शी होगी, उम्मीदवारों का भरोसा बढ़ेगा और हर परीक्षा के बाद होने वाले विवादों में भी कमी आएगी.
स्टूडेंट्स आउटसोर्सिंग एजेंसियों की भूमिका पर भी सवाल उठा रहे हैं. उनका कहना है कि भर्ती परीक्षाओं से जुड़े संवेदनशील काम प्राइवेट एजेंसियों को सौंपने पर सख्त निगरानी और जवाबदेही तय होनी चाहिए. 14वीं संयुक्त सिविल सेवा परीक्षा मामले की जांच में टीएसआर डेटा प्रोसेसिंग प्राइवेट लिमिटेड की भूमिका भी जांच के दायरे में है. प्रदर्शनकारियों का कहना है कि भविष्य में ऐसी एजेंसियों के चयन, कामकाज और जवाबदेही को लेकर स्पष्ट नियम बनाए जाएं जिससे भर्ती प्रक्रिया पर उम्मीदवारों का विश्वास मजबूत हो सके.