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क्या इतिहास की सबसे बड़ी सड़क है धोखाधड़ी? जानें शेरशाह सूरी और GT रोड की असली कहानी

दिल्ली में एक प्रचीन सड़क है जो 4 देशों को जोड़ती है. कई लोगों का मानना ​​है कि इस सड़क का निर्माण शेरशाह सूरी ने करवाया था लेकिन कई इतिहासकार इस दावे को खारिज करते हैं. जानें क्या है सच्चाई...

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क्या इतिहास की सबसे बड़ी सड़क है धोखाधड़ी? जानें शेरशाह सूरी और GT रोड की असली कहानी

Grand Trunk Road

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दिल्ली में एक सड़क है जो चार देशों को जोड़ती है. इसे जीटी रोड या ग्रैंड ट्रंक रोड के नाम से जाना जाता है. यह प्राचीन सड़क महाभारत, मुगल काल और ब्रिटिश काल का गवाह रही है. कई लोगों का मानना ​​है कि इस सड़क का निर्माण शेरशाह सूरी ने करवाया था लेकिन कई इतिहासकार इस दावे को खारिज करते हैं.

ग्रैंड ट्रंक रोड की असली उत्पत्ति

इतिहासकार विश्वजीत कुमार के अनुसार यह कहना गलत है कि शेरशाह सूरी ने जीटी रोड बनवाई थी. शेरशाह सूरी ने 1540 से 1545 तक शासन किया था और सिर्फ 5 साल में 3655 किलोमीटर लंबी सड़क का निर्माण असंभव था. 2600 किलोमीटर लंबी जीटी रोड चार देशों को पार करती है और उनकी राजधानियों को जोड़ती है.

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जीटी रोड का रास्ता

यह सड़क अफ़ग़ानिस्तान के काबुल से शुरू होकर दोरहम से होते हुए ख़ैबर दर्रे को पार करते हुए पाकिस्तान पहुंचती है. यह जमरूद, पेशावर, नौशेरा और अटक से होते हुए इस्लामाबाद पहुंचती है. इस्लामाबाद से यह रावलपिंडी, गुजरांवाला, मुरीदके और लाहौर होते हुए वाघा बॉर्डर तक पहुंचती है. भारत में यह दिल्ली पहुंचने से पहले अटारी, अमृतसर, करतारपुर, जालंधर, लुधियाना, सरहिंद, अंबाला, कुरूक्षेत्र, करनाल, पानीपत और सोनीपत से होकर गुजरती है.

दिल्ली से यह मथुरा, आगरा, कानपुर, प्रयागराज, वाराणसी, सासाराम, औरंगाबाद, धनबाद, आसनसोल, दुर्गापुर, बर्धमान, कोलकाता में हावड़ा और बनगांव से होते हुए आखिरकार ढाका और चटगांव में खत्म होती है.

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उत्तरापथ से जीटी रोड

विश्वजीत कुमार बताते हैं कि हिंदू अभिलेखों में इस सड़क का उल्लेख उत्तरापथ के रूप में मिलता है. शेरशाह सूरी के शासनकाल में इसे काबुल से चटगांव तक फिर से बनवाया गया और इसका नाम सड़क-ए-आज़म रखा गया. शेरशाह सूरी ने सड़क के किनारे फलों के पेड़ लगवाए और यात्रियों की सुविधा के लिए सराय बनवाईं. हालांकि वह अपने साम्राज्य को मज़बूत करना चाहता था और इसका उद्देश्य पूरी तरह से आर्थिक था.

सम्राट चंद्रगुप्त मौर्य ने व्यापारिक उद्देश्यों के लिए सड़कों का और भी विकास किया. अकबर, जहांगीर और शाहजहां ने भी अपने शासनकाल में संपर्क सड़कों का निर्माण करके योगदान दिया जिन्हें बादशाही सड़क कहा जाता था.

मुगल काल के बाद अंग्रेजों ने कोलकाता से पेशावर तक की सड़क को अपने नियंत्रण में ले लिया और उसकी मरम्मत करवाई. ब्रिटिश शासन के दौरान इसका नाम बदलकर ग्रैंड ट्रंक रोड (जीटी रोड) कर दिया गया और यह सड़क आज भी इसी नाम से जाना जाता है. प्रसिद्ध लेखक रुडयार्ड किपलिंग ने जीटी रोड के बारे में लिखा था और इसके जीवंत जीवन प्रवाह को दुनिया में कहीं और बेजोड़ बताया था.

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