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पंखों से कुछ नहीं होता, हौसलों से उड़ान होती है!एक्सिडेंट हुआ, नहीं मिला इलाज, बिना पैरों के लगाई IIT से Google तक की छलांग

कहते हैं मन के हारे हार है और मन के जीते जीत. ये कहानी है ऐसे ही बहादुर और दृढ निश्चयी नागा नरेश की. इन्होंने बचपन में एक हादसे में अपने पैर खो दिए लेकिन हौसलों की उड़ान को रुकने नहीं दिया.

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पंखों से कुछ नहीं होता, हौसलों से उड़ान होती है!एक्सिडेंट हुआ, नहीं मिला इलाज, बिना पैरों के लगाई IIT से Google तक की छलांग
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आज हम आपको एक ऐसे शख्स के बारे में बताएंगे, जिसने ये साबित कर दिखाया कि हौसले से बड़ी कोई चीज नहीं होती है. मन में अगर दृढ़ संकल्प और आत्मविश्वास हो तो व्यक्ति मंजिल को जरूर हासिल कर सकता है. मन में अगर विश्वास हो तो कोई भी बाधा आ जाए वो डगमगा नहीं सकता है. ये कहानी है नागा नरेश की. नागा ने बचपन में ही एक हादसे में अपने दोनों पैर खो दिए, लेकिन इसके बावजूद उन्होंने जीवन में हार नहीं मानी. उन्होंने JEE Advanced (जेईई एडवांस्ड) परीक्षा पास की और IIT मद्रास में पढ़ाई करने के बाद अब Google कंपनी में काम कर रहे हैं. वो कहते हैं न कि अगर इंसान में कुछ कर गुजरने का जज्बा और लगन हो तो दुनिया की कोई ताकत उसे मंजिल तक पहुंचने से नहीं रोक सकती है.

कौन हैं नागा नरेश करुतुरा 

नागा नरेश करुतुरा का जन्म गोदावरी नदी के किनारे बसे आंध्र प्रदेश के एक छोटे से गांव टीपर्रू में हुआ था. जानकारी के अनुसार, उनके पिता एक ड्राइवर थे और उनकी मां एक गृहिणी थीं और दोनों ही पढ़े लिखे नहीं थे. गरीबी और मुश्किल भरे जीवन के बीच नागा नरेश एक दुर्घटना का शिकार हो गए और उन्होंने दोनों पैर खो दिए. नागा नरेश ने बताया कि उन्हें एक प्राइवेट अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टर ने उनके इलाज के लिए मना कर दिया, क्योंकि उनके माता-पिता के पास पैसे नहीं थे. फिर पुलिस उन्हें एक सरकारी अस्पताल ले गई, जहां डॉक्टरों को उनके दोनों पैर काटने पड़े और नागा नरेश का जीवन को हमेशा के लिए व्हीलचेयर पर आ गया. 

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शारीरिक रूप से अक्षम होने के बावजूद नागा पढ़ाई में बहुत तेज थे. स्कूल की पढ़ाई पूरी करने के बाद, नागा नरेश ने IIT-JEE परीक्षा के लिए जमकर मेहनत की और इस परीक्षा में 992वां रैंक हासिल की. उन्हें शारीरिक रूप से अक्षम श्रेणी में उन्हें चौथा रैंक मिला. JEE Advanced पास करने के बाद, नागा नरेश को IIT मद्रास के अंदर B.Tech. में दाखिला मिला.

लोगों ने की मदद 

नागा नरेश को एक ट्रेन में सुंदर नाम का एक व्यक्ति मिला जिसने उनकी हॉस्टल फीस भरने की जिद की. जिस अस्पताल में उनका इलाज हुआ था, उसने उनकी कॉलेज की ट्यूशन फीस भरी. डिग्री पूरी करने के बाद, नागा नरेश को देश और दुनिया की कई बड़ी कंपनियों से नौकरी के ऑफर मिले और उन्होंने Google में सॉफ्टवेयर इंजीनियर की नौकरी ज्वाइन करने का फैसला किया.

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