Advertisement

UPSC में बार-बार फेल होता था यह इंजीनियर, फिर बदली स्ट्रैटजी और बन गए टॉपर, जानें कितनी मिली रैंक

आईआईटी हैदराबाद के पूर्व स्टूडेंट अभिषेक यूपीएससी की परीक्षा में एक बार नहीं बल्कि तीन बार असफल हुए. लेकिन फिर अपने चौथे प्रयास में उन्हें अपनी मेहनत का फल मिला और वह यूपीएससी की परीक्षा में 78वीं रैंक लाए. जानें उनकी सफलता की कहानी...

Latest News
UPSC में बार-बार फेल होता था यह इंजीनियर, फिर बदली स्ट्रैटजी और बन गए टॉपर, जानें कितनी मिली रैंक

Abhishek Singh UPSC Rank 78

Add DNA as a Preferred Source

ऐसी दुनिया में जहां एक असफलता आपके सपनों को पटरी से उतार सकती है अभिषेक सिंह की कहानी लाखों लोगों के लिए प्रेरणा बन गई है. उत्तर प्रदेश के जौनपुर के रहने वाले और आईआईटी हैदराबाद के पूर्व स्टूडेंट अभिषेक यूपीएससी की परीक्षा में एक बार नहीं बल्कि तीन बार असफल हुए. लेकिन फिर अपने चौथे प्रयास में उन्हें अपनी मेहनत का फल मिला और वह यूपीएससी की परीक्षा में 78वीं रैंक लाए.

यह भी पढ़ें- किस स्कूल-कॉलेज से पढ़े हैं UPSC 2024 में 5वीं रैंक लाने वाले आकाश गर्ग? इंटरव्यू में इस सवाल का जवाब देकर बने IAS

बार-बार असफलताओं से निराश होने के बजाय अभिषेक ने हर बार दोगुनी मेहनत से तैयारी की और शांत होकर दृढ़ संकल्प के साथ अपनी मंजिल हासिल की. उन्होंने खुद बताया कि निरंतरता और कड़ी मेहनत ने उन्हें सबसे बुरे दिनों से बाहर निकाला. भले ही अभिषेक ने आईआईटी हैदराबाद से इंजीनियरिंग में ग्रेजुएशन किया हो लेकिन उन्हें कभी भी कॉरपोरेट करियर या कोडिंग जॉब रास नहीं आया. बल्कि हमेशा से उन्हें पब्लिक सर्विस में दिलचस्पी रही है. 

यह भी पढ़ें- कौन हैं कर्नल सोफिया कुरैशी के फौजी शौहर? किसी फिल्मी स्टोरी से कम नहीं दोनों की प्रेम कहानी

कैसे की यूपीएससी की तैयारी

यूपीएससी की तैयारी में अभिषेक ने स्टैंडर्ड सोर्स पर भरोसा किया. उन्होंने बताया कि अपने सिलेबस पर ध्यान केंद्रित करके और पिछले साल के सवालों को ट्रैक करके उन्हें काफी मदद मिली. पुराने सवालों को हल करके उन्हें यह समझ आया कि यूपीएससी की परीक्षा वास्तव में क्या मांगती है. उन्होंने बताया कि पढ़ने से ज्यादा लिखना मायने रखता है क्योंकि यूपीएससी रटने वालों के लिए नहीं है. यह परीक्षा सिर्फ़ आपके ज्ञान का परीक्षण नहीं करता बल्कि यह आपकी अवधारण, स्पष्टता और सटीकता का परीक्षण करता है. उत्तर लिखने की कला में महारत हासिल करने के लिए उन्होंने पूरे छह महीने अभ्यास पर ध्यान केंद्रित किया. 

यह भी पढ़ें- मॉडलिंग, फैशन डिजाइनिंग और भी बहुत कुछ..., जानें कौन हैं और क्या करती हैं कर्नल सोफिया कुरैशी की जुड़वां बहन

इस स्ट्रैटजी से हासिल की सफलता

अपने पहले के प्रयासों में अभिषेक सिंह ने सिविल इंजीनियरिंग को अपना ऑप्शनल सब्जेक्ट बनाया था. लेकिन जब वह बार-बार असफल हो रहे थे तो अपने चौथे प्रयास में उन्होंने एंथ्रोपॉलॉजी को अपना ऑप्शनल सब्जेक्ट बनाने का सहसिक कदम उठाया. इस कदम से उनका पूरा रिजल्ट ही बदल गया. वह बताते हैं कि यह मेरे सफर का सबसे अच्छा फैसला साबित हुआ. एंथ्रोपोलॉजी में उन्हें 298 मार्क्स मिले और यह यूपीएससी के सिलेक्टेड कैंडिडेट्स की लिस्ट में जगह पाने का करण बन गया.

यह भी पढ़ें- किस स्कूल में पढ़ती हैं महाराष्ट्र के CM देवेंद्र फडणवीस की बेटी? 10वीं की मार्कशीट वायरल

अभिषेक ने असफलता और ध्यान से क्या सीखा?

तीन असफल प्रयासों के दौरान अभिषेक ने न सिर्फ मानसिक बल्कि शारीरिक और व्यक्तिगत चुनौतियों का सामना करना पड़ा. उन्हें कई स्वास्थ्य सेवाओं का सामना करना पड़ा और वह कई बार खुद को टूटा हुआ महसूस करते थे. फिर उन्होंने  अपने माता-पिता के सपनों, अपने दोस्तों के सपोर्ट और विपश्यना ध्यान से ताकत हासिल की. वे कहते हैं कि यूपीएससी सिर्फ़ एक परीक्षा नहीं है बल्कि यह एक परिवर्तनकारी अनुभव है. यह परीक्षा आपको बेहतर उम्मीदवार ही नहीं बल्कि बेहतर इंसान भी बनाती है.

अपनी राय और अपने इलाके की खबर देने के लिए जुड़ें हमारे गूगलफेसबुकx,   इंस्टाग्रामयूट्यूब और वॉट्सऐप कम्युनिटी से.

Read More
Advertisement
Advertisement
Advertisement