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राष्ट्रपति का ADC बनने के लिए कितनी कठिन ट्रेनिंग से गुजरना पड़ता है? मेजर ऋषभ सिंह सांब्याल ने बताया पूरा प्रोसेस

राष्ट्रपति के पूर्व एडीसी मेजर ऋषभ सिंह सांब्याल ने बताया कि ADC के पद पर उनकी भूमिका और जिम्मेदारियां क्या रही थीं, इस दौरान ट्रेनिंग में क्या-क्या सिखाया गया और यह ट्रेनिंग कितनी मुश्किल होती है...

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राष्ट्रपति का ADC बनने के लिए कितनी कठिन ट्रेनिंग से गुजरना पड़ता है? मेजर ऋषभ सिंह सांब्याल ने बताया पूरा प्रोसेस

मेजर ऋषभ सिंह सांब्याल ने बताया कि ADC की ट्रेनिंग कितनी मुश्किल होती है? (Image Credit: Major Rishabh Singh Sambyal Insta)

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राष्ट्रपति के सबसे नजदीक रहने वाले अधिकारी ADC यानी ऐड-डि-कैम्प का पद लोगों को खूब लुभाता है. लोग जानना चाहते हैं कि आखिर इस पद तक कैसे पहुंचा जा सकता है और इसकी ट्रेनिंग कितनी मुश्किल होती है. अब राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के पूर्व एडीसी रहे मेजर ऋषभ सांब्याल ने पूरी बात विस्तार से बताई है. वह भारतीय सेना की 12 साल की सर्विस से प्री-मेच्योर रिटायरमेंट ले चुके हैं.

उन्होंने हाल ही में राज शमानी के पॉडकास्ट में बताया है कि यह फैसला लेना उनके लिए कितना कठिन था. साथ ही उन्होंने बताया कि ADC के पद पर उनकी भूमिका और जिम्मेदारियां क्या रही थीं, इस दौरान ट्रेनिंग में क्या-क्या सिखाया गया और यह ट्रेनिंग कितनी मुश्किल होती है. 

उन्होंने बताया कि राष्ट्रपति की सुरक्षा के लिए 1 किलोमीटर तक के इलाके को सेनेटाइज करना होता है. इसका मतलब है कि कोई हथियार, धातु या कुछ और खतरनाक सामान इसके अंदर नहीं जा सकता. उन्होंने बताया कि राष्ट्रपति के लिए जो गिलास रखी गई है, उस पर भी ध्यान देना होता है क्योंकि आपको नहीं पता कि किसी ने किस नीयत से इसे रखा है. उन्होंने बताया कि छोटी से छोटी चीज को भी नजर-अंदाज नहीं किया जा सकता. 

कितनी कठिन होती है ADC की ट्रेनिंग? 

मेजर ने अपनी ट्रेनिंग के बारे में बताया कि प्रोबेशन के दौरान आपको 70 से 80 किलो तक का भार उठाकर चलना होता है. आपको 30 से 40 दिनों तक खाना-पानी और यहां तक की नींद से भी वंचित रखा जाता है. फिर आपको एक किलोमीटर तक के सर्कुलर रूट में वॉक करने के लिए कहा जाएगा. बीच-बीच में किसी भी जगह पर कोई चीज जैसे उदाहरण के लिए पेड़ों से पीछे हेल्मेट रख दी जाती है. फिर जैसे ही आपका टास्क पूरा होता है, आपसे पूछा जाता है कि आपने क्या देखा? यह ट्रेनिंग की एक बानगी भर है. उन्होंने बताया कि इस तरह से ट्रेनिंग के दौरान और भी मुश्किल टास्क दिए जाते हैं.

राष्ट्रपति के ADC की क्या-क्या जिम्मेदारियां होती हैं?

अपने ट्रेनिंग शेड्यूल के अलावा ऋषभ सांब्याल ने अपनी एडीसी के तौर पर हर दिन की जिम्मेदारी के बारे में भी बताया. चूंकि वह राष्ट्रपति के सबसे नजदीकी व्यक्ति होते ऐसे में उनसे जुड़ी सभी जरूरी चीजें चाहें वो ऑफिशियल हों या अनऑफिशियल सबकुछ संभालना होता है. उन्होंने बताया,  'जैसे अगर राष्ट्रपति को प्रधानमंत्री से बात करनी है तो वो हमें फोन पर बताएंगी कि उन्हें प्रधानमंत्री से बात करती है. फिर हम उनके लोगों को फोन मिलाएंगे. मैं प्रधानमंत्री से बात करूंगा. वह वहां मौजूद होंगे फिर वह (राष्ट्रपति) बात करेंगी. '

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के साथ खूबसूरत बॉन्डिंग 

पॉडकास्ट के दौरान उन्होंने राष्ट्रपति के साथ अपने खूबसूरत बॉन्डिंग के बारे में भी खुलकर बात की. काफी लोग इस बॉन्डिंग की तुलना मां-बेटे से भी करते हैं. उन्होंने बताया- 'जब पहली बार मैं राष्ट्रपति से मिला, मुझे ऐसा महसूस हुआ जैसे मेरी मां मेरे सामने खड़ी हों. 2014 से मैं कभी अपनी मां के साथ नहीं रहा. मैं जब कुछ दिनों के लिए अपने घर जाता था, तब बस उनके साथ रह पाता था और फिर अगले 6 से 7 महीनों के लिए उनसे विदा लेना पड़ता था.'

लेकिन जब वह राष्ट्रपति मुर्मू के एडीसी रहे तो उन्होंने पूरे 3 साल उनके साथ बिताए. उन्होंने बताया- 'उनका स्वभाव बेहद सहज और आत्मीय रहा. मेरा उनसे एक खास रिश्ता बन गया. उन्होंने हम सभी लोगों, खासकर मुझे और दूसरे एडीसी को जो स्नेह दिया, वो बेहद अद्भुत था और इससे मुझे अपनी मां की याद आती थी. 

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