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BRICS में PM मोदी के साथ दिखे IFS सिद्धार्थ बाबू कितने पढ़े-लिखे? जानें इंजीनियरिंग से प्राइवेट जॉब और फिर डिप्लोमैट बनने तक का सफर

ब्रिक्स की वायरल तस्वीर से लोगों के मन में आईएफएस अधिकारी सिद्धार्थ बाबू के बारे में ज्यादा से ज्यादा जानने में दिलचस्पी बढ़ गई है. जानें वह कितने एजुकेटेड हैं और उनका इंजीनियरिंग से डिप्लोमैसी तक का सफर कैसा रहा है...

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BRICS में PM मोदी के साथ दिखे IFS सिद्धार्थ बाबू कितने पढ़े-लिखे? जानें इंजीनियरिंग से प्राइवेट जॉब और फिर डिप्लोमैट बनने तक का सफर

IFS Sidharth Babu की सफलता की कहानी. (Image: Social Media)

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आईएफएस अधिकारी सिद्धार्थ बाबू ने ब्रिक्स सम्मेलन से लोगों का खूब ध्यान खींचा. वह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन और चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग के साथ नजर आए और उनकी तस्वीर सोशल मीडिया पर वायरल हो गई. अपनी ब्रिक्स की वायरल तस्वीर के अलावा उनका मैकेनिकल इंजीनियरिंग से लेकर भारतीय विदेश सेवा तक का सफर भी बेहद शानदार रहा है.

फिलहाल किस पोस्ट पर हैं IFS सिद्धार्थ बाबू?

सिद्धार्थ बाबू फिलहाल विदेश मंत्रालय के ईस्ट एशिया डिविजन में डिप्टी सेक्रेटरी के पद पर काम कर रहे हैं. वह केरल के कोच्चि से आते हैं. उन्होंने मैकेनिकल इंजीनियरिंग की पढ़ाई की है और इसके बाद प्राइवेट सेक्टर में कुछ साल तक काम भी किया. अपने प्राइवेट जॉब में उन्होंने ई-कॉमर्स सेक्टर का अनुभव हासिल किया. 

उन्होंने यूपीएससी की सिविल सेवा की तैयारी शुरू की लेकिन उन्हें अपने पहले प्रयास में सफलता नहीं मिली. वह अपने दूसरे प्रयास के लिए पूरी लगन से जुट गए और उनकी मेहनत रंग लाई और उन्होंने 15वीं रैंक के साथ भारत की सबसे मुश्किल परीक्षाओं में से एक मानी जाने वाली इस परीक्षा को क्रैक किया. उन्होंने भारतीय विदेश सेवा का साल 2017 का बैच जॉइन किया और उनकी पहली पोस्टिंग दिसंबर 2017 में नई दिल्ली में ऑफिसर ट्रेनी के तौर पर हुई थी.

IFS सिद्धार्थ बाबू का एजुकेशनल बैकग्राउंड क्या है?

अगर पढ़ाई-लिखाई की बात करें तो उनके लिंक्डइन प्रोफाइल के मुताबिक, उन्होंने नव निर्माण सीनियर सेकेंडरी स्कूल और भवन आदर्श विद्यालय से अपनी स्कूली शिक्षा पूरी की. इसके बाद मार अथानासियस कॉलेज ऑफ इंजीनियरिंग से मैकेनिकल इंजीनियरिंग में बीटेक किया. इसके बाद उन्होंने मिडिलबरी इंस्टीट्यूट ऑफ इंटरनेशनल स्टडीज मॉन्टेरे से लैंग्वेज इंटरप्रिटेशन और ट्रांसलेशन में मास्टर्स किया. 

IFS सिद्धार्थ बाबू का करियर? 

उनके करियर में चीन के बीजिंग में पोस्टिंग शामिल है. यहां उन्होंने साल 2018 से 2022 तक काम किया और चीनी भाषा स्किल्स को भी मजबूत किया. इसके बाद उन्होंने कैलिफोर्निया में भी काम किया और यहां के टॉप इंस्टीट्यूट से लैंग्वेज इंटरप्रिटेशन और ट्रांसलेशन में मास्टर्स डिग्री हासिल की.  उनका काम हाई लेवल के डिप्लोमैट मीटिंग के दौरान लैंग्वेज और कम्युनिकेशन से जुड़ी दिक्कतों को दूर करने में मददगार रहा. 

चीनी भाषा पर उनकी पकड़ और चीन में उनका अनुभव उनके काम के लिए खास तौर पर प्रासंगिक रहा है.  अक्सरउन्हें पीएम मोदी के अहम कार्यक्रमों में मदद करते हुए देखा जाता है. ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में उनकी मौजूदगी ने एक बार भी ग्लोबल लीडर्स की मीटिंग के बीच पर्दे के पीछे काम करने वाले अधिकारियों की ओर लोगों का ध्यान खींचा है.

उनकी कहानी यह दिखाती है कि आपने जो भी पढ़ाई की हो, ऐसा जरूरी नहीं है कि आपको जिंदगीभर उसी से जुड़ा काम करने की जरूरत है. आप अपने स्किल्स को बेहतर बनाकर अपना फील्ड बदल सकते हैं.  आईएफएस सिद्धार्थ बाबू ने मैकेनिकल इंजीनियरिंग की पढ़ाई और फिर प्राइवेट सेक्टर में काम करने के बाद सिविल सेवा की ओर रुख किया और आखिरकार डिप्लोमेसी को अपना करियर चुना. उनका यह सफर यूपीएससी के एस्पिरेंट्स और दूसरे प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे इंजीनियरिंग ग्रेजुएट्स के लिए किसी प्रेरणा से कम नहीं है.
 

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